अन्ना ने वरूण को दिया रालेगण सिदिध आने का न्यौता
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देश में नई राजनीति की दिशा तलाश रहे भाजपा सांसद वरूण गांधी को समाजसेवी अन्ना हजारे ने अपने पैतृक गांव रालेगण सिदिध आने का न्यौता दिया है। सूत्र बताते हैं कि अन्ना के न्यौते को स्वीकार करते हुए भाजपा के गांधी उनसे मिलने के लिए जून माह में रालेगण जा सकते हैं।
दरअसल लोकपाल को लेकर देश में सफल आंदोलन करने वाले हजारे को राइट टू रिकॉल के रूप में दूसरा बडा मुदृदा हाथ लग गया है। इस मुदृदे पर वे गांधी के नेतृत्व में लोकपाल सरीखा माहौल खड़ा करना चाहते हैं।
पत्र लिखकर वरूण को दे चूके हैं साथ देने का भरोसा
राइट टू रिकॉल के मामले पर वरूण को पत्र लिखकर अन्ना हजारे ने एक दिन पहले ही साथ देने का भरोसा जताया है। सूत्र बताते हैं कि अन्ना के समर्थन पत्र के बाद नई राजनीतिक पहचान बनाने में जुटे वरूण गांधी का उत्साह बढ़ा है। वरूण ने भाजपा नेतृत्व से भी इस मामले में समर्थन एवं सहयोग मांगा है।
अन्ना के समर्थन पत्र को ट्वीट करते हुए वरूण ने लिखा है कि मैं अपने पार्टी नेतृत्व से भी आग्रह करता हुं कि वे इस मुददे पर बहस की शुरूआत करें। गांधी का कहना है कि यह कदम लोकतंत्र की जडों को गहरा बनाने के साथ राजनीति में जवाबदेही सुनिश्चित करने में मदद करेगा।
राइट टू रिकॉल पर वरूण को अन्ना का साथ
इससे पहले वरूण को लिखे समर्थन पत्र में अन्ना ने कहा है कि वे राइट टू रिकॉल मामले पर उनका सहारा बनेंगे। अन्ना का कहना है कि राइट टू रिकॉल के साथ ही राइट टू रिजेक्ट का कानून भी होना चाहिए। ऐसा होने के बाद ही सही मायनों में देश में लोकतंत्र आएगा।
राइट टू रिकॉल पर अन्ना हजारे के समर्थन का इजहार करते हुए वरूण गांधी ने कहा है कि अन्ना ने उन्हें आश्वस्त किया है कि इस तरह के कानून के लिए होने वाले उनके सम्मेलनों और गोष्ठियों के आयोजनों में शामिल होंगे।
संसद के बीते सत्र में वरूण ने पेश किया था लोकसभा में बिल
संसद के बीते बजट सत्र में वरूण ने बतौर प्राइवेट मेंबर राइट टू रिकॉल बिल लोकसभा में पेश किया था। इस बिल के लिए वरुण गांधी को बधाई देते हुए अन्ना ने कहा है कि इस बिल के पारित होने से देश में सच्चा लोकतंत्र लाने में मदद मिलेगी।
दिल्ली समेत देश में बडा आंदोलन खडा करने की अन्ना की मंशा
भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकपाल बिल के लिए आंदोलन करने वाले अन्ना को राइट टू रिकॉल का मुदृदा कारगर लग रहा है। लोकपाल आंदोलन में उनके सहयोगी रहे अरविंद केजरीवाल के राजनीति में उतरने के बाद से अन्ना को एक योग्य एवं कुशल चेहरे की जरूरत थी। गांधी के रूप में उन्हें अब नया चेहरा मिलता दिख रहा है।
अन्ना ने कहा नोटा नहीं है समस्या का समाधान
सूत्र बताते हैं कि अन्ना हजारे लोकपाल की तरह राइट टू रिकॉल के मुदृदे को लेकर भी दिल्ली में एक बड़ा आयोजन करना चाहते हैं। वरूण के समक्ष भी उन्होंने अपनी मंशा रखती है। इसके अलावा अन्ना ने वरूण को देशभर के कार्यक्रमों में उनका साथ देने का भरोसा दिया है।
क्या है राइट टू रिकॉल
राइट टू रिकॉल बिल के कानून बनने के बाद जनता को अपने चुने हुए प्रतिनिधि को कार्यकाल से पहले वापस कराने का अधिकार मिल जाएगा। दरअसल राइट टू रिजेक्ट बिल की कवायद राजनीति में दागियों की राह मुश्किल करने के लिए है। कई राजनीतिक दल जीत के लिए किसी को भी टिकट दे देते हैं। ऐसे में कई बार अच्छे उम्मीदवार भी दागी उम्मीदवारों से बेहद कम अंतर से जीत जाते हैं।
अन्ना का कहना है कि जनता को अपना चयन ठीक करने का अधिकार मिलना चाहिए। अन्ना हजारे इस बिल की मांग वर्ष 2008 से ही कर रहे हैं। उन्होंने कई बार इस तरह के बिल को संसद में लाने का प्रयास भी किया।
अन्ना ने कहा नोटा नहीं है समस्या का समाधान
नोटा का जिक्र करते हुए अन्ना हजारे ने लिखा है कि यह अपने आप में पूर्ण नहीं है। इसमें सुधार की बेहद सख्त जरूरत है। लोगों को यह अधिकार होना चाहिए कि उन्हें कोई उम्मीदवार पसंद नहीं है। तो ऐसी जगहों पर दोबारा चुनाव कराने और पहले से रिजेक्ट किए गए उम्मीदवारों को फिर से उम्मीदवार नहीं बनने का अधिकार भी होना चाहिए।