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Amit Shah: क्या घाटी के इस दस्तूर को बदल सकेंगे शाह, 'हाथ-पत्थर-मोबाइल' से टूटेगा कश्मीर में 'जीरो' का तिलिस्म

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Wed, 05 Oct 2022 11:06 PM IST
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सार
Amit Shah in Kashmir: बारामुला में जनसभा को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा, भाजपा ने पंचायत चुनाव कराकर तीस हजार से ज्यादा लोगों को शासन प्रक्रिया से जोड़ा है। इन तीन परिवारों की वजह से यहां भ्रष्टाचार का बोलबाला रहा। पहले कश्मीर आतंकियों का हॉटस्पॉट था, अब वह टूरिस्ट हॉटस्पॉट बन गया है...
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Amit Shah, through his visit, set the path of strengthening the BJP in Jammu-Kashmir
Amit Shah in Kashmir - फोटो : Agency

विस्तार

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने घाटी के राजनीतिक दस्तूर को बदलने का प्लान तैयार कर लिया है। जम्मू-कश्मीर की तीन दिवसीय यात्रा के दौरान दो अलग-अलग जनसभाओं में 'शाह' के प्लान की झलक देखने को मिली है। जम्मू में उन्होंने पहाड़ी समुदाय के लोगों को एसटी में शामिल कर आरक्षण देने का भरोसा दिलाया है, तो वहीं कश्मीर में शाह ने 'हाथ-पत्थर-मोबाइल' की सफल थ्योरी लोगों के सामने रखी। कश्मीर घाटी में अभी तक भाजपा से दूरी बनाए रखने का दस्तूर रहा है। प्रदेश में पिछली बार 2014 में विधानसभा चुनाव हुए थे, जिसमें भाजपा को पहली बार 25 सीटें मिली थीं। हालांकि कश्मीर में 'जीरो' से बाहर नहीं आ पाए। अब शाह ने अपनी यात्रा के जरिए जम्मू में भाजपा को और अधिक मजबूती प्रदान करने व कश्मीर में 'जीरो' तोड़ने की राह पर कदम रख दिया है।

जानबूझकर लोगों को सुविधाओं से दूर रखा गया

बारामुला के प्रो. शोकत अली मीर स्टेडियम में एक जनसभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, इस प्रदेश में 70 साल तक तीन परिवारों (अब्दुल्ला, मुफ्ती, गांधी) ने शासन किया है। यहां के जरूरतमंद लोगों को जो अधिकार एवं सुविधाएं मिलनी चाहिए थीं, उन्हें नहीं मिल सकीं। इन तीन परिवारों ने जानबूझकर लोगों को उन सुविधाओं से दूर रखा। भाजपा ने पंचायत चुनाव कराकर तीस हजार से ज्यादा लोगों को शासन प्रक्रिया से जोड़ा है। इन तीन परिवारों की वजह से यहां भ्रष्टाचार का बोलबाला रहा। एंटी करप्शन ब्यूरो को घुसने तक नहीं दिया गया। शाह ने कहा, पहले कश्मीर आतंकियों का हॉटस्पॉट था, अब वह टूरिस्ट हॉटस्पॉट बन गया है। पहले एक वर्ष में मुश्किल से छह लाख सैलानी आते थे, मगर अब अक्तूबर तक 22 लाख प्रवासी घाटी आ चुके हैं। पूर्व सीएम महबूबा और फारूक ने कश्मीर के युवाओं के हाथ में पत्थर और बंदूक थमाई। पीएम मोदी ने यहां इंडस्ट्री लाकर युवाओं के हाथ में मोबाइल और नेटवर्क पकड़ाया है। केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा, अब आतंकवाद खत्म होने की तरफ जा रहा है।

शाह ने चला दिया ये चुनावी तीर

अनुच्छेद-370 खत्म होने के बाद दलित, पिछड़े, गुर्जर, बकरवाल व पहाड़ी समुदाय के लोगों को आरक्षण का लाभ मिलेगा। सरकारी दस्तावेज में जम्मू-कश्मीर में पहाड़ी समुदाय के लोगों की संख्या दस लाख से अधिक है। राजौरी, हंदवाड़ा, पुंछ, बारामूला, अनंतनाग और पीर पंजाल जैसे इलाकों में पहाड़ी समुदाय के लोग बसते हैं। अमित शाह ने इन्हें आरक्षण का भरोसा देकर चुनावी तीर चला दिया है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इसका फायदा जम्मू और कश्मीर, दोनों क्षेत्रों में मिलेगा। शाह ने अपनी रणनीति से जम्मू में भाजपा को पहले के मुकाबले और ज्यादा मजबूती देने का काम किया है। इसमें, जम्मू कश्मीर परिसीमन आयोग की रिपोर्ट में नौ सीटें अनुसूचित जनजाति समुदाय के लिए आरक्षित करना, गुर्ज-मुस्लिम समुदाय के गुलाम अली को राज्यसभा में भेजना और अब पहाड़ी समुदाय के लोगों को आरक्षण का भरोसा, ये सब शामिल है।

पहाड़ियों की संख्या 14 लाख से अधिक

जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 खत्म होने से पहले 87 विधानसभा सीटें थीं। लद्दाख, अलग केंद्र शासित प्रदेश बना तो यहां 83 सीटें रह गईं। पिछले दिनों आई परिसीमन आयोग की रिपोर्ट के बाद अब इनकी संख्या 90 हो गई है। इसमें जम्मू क्षेत्र की 43 और कश्मीर की 47 विधानसभा सीट शामिल हैं। परिसीमन आयोग की रिपोर्ट में 9 सीट एसटी समुदाय के लिए आरक्षित की गई हैं। कश्मीरी पंडितों के लिए भी दो सीटें रिजर्व हैं। जम्मू-कश्मीर पहाड़ी पीपल मूवमेंट के अनुसार, राज्य में पहाड़ियों की संख्या 14 लाख से अधिक है। 2014 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने पहली बार 25 सीटें जीती थीं। पीडीपी को 28, नेशनल कॉन्फ्रेंस 15 व कांग्रेस के खाते में 12 सीट आई थीं। अन्य को 9 सीटें मिली थीं। हालांकि भाजपा ने जम्मू-कश्मीर चुनाव में मिशन 44 सीट निर्धारित किया था, लेकिन उसे 25 पर संतुष्ट होना पड़ा। यह कामयाबी भी उसे जम्मू क्षेत्र में ही मिली। कश्मीर में भाजपा को जीरो पर रोक दिया गया। नरेंद्र मोदी ने किश्तवाड़, पुंछ, उधमपुर, श्रीनगर, सांबा, कठुआ, राजौरी, बिलावर व जम्मू में रैलियां कीं थी। जो विधानसभा श्रीनगर के साथ लगती थी, वहां भी कमल नहीं खिल सका।  

भाजपा को यहां फायदा मिलने की उम्मीद

अब अमित शाह ने गुर्जर व बकरवाल समुदाय की तर्ज पर पहाड़ी लोगों को भी अनुसूचित जनजाति में शामिल करने का भरोसा दिया है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इससे पार्टी को कश्मीर में थोड़ा बहुत फायदा मिल सकता है। वजह, पहाड़ी लोगों की संख्या कश्मीर में भी है। इसके चलते भाजपा को यहां फायदा मिलने की उम्मीद दिखाई पड़ रही है। अमित शाह ने बारामूला की जनसभा में अब्दुल्ला, मुफ्ती और गांधी परिवार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा, आजादी के बाद 1947 से 2014 तक यहां सिर्फ चार मेडिकल कॉलेज बने थे। 2014 से 2022 के बीच जम्मू कश्मीर में 9 कालेज बनाए गए हैं। घाटी के युवा अब पत्थर फेंकने से तौबा कर रहे हैं। केंद्र सरकार एवं जम्मू कश्मीर प्रशासन, उन्हें विकास के नए अवसर प्रदान कर रहा है। बहुत से युवा अब हथियार छोड़कर मुख्य धारा में लौट रहे हैं। शाह ने कहा, आतंकवाद भी जल्द ही खत्म हो जाएगा। घाटी में जिस तरह से पर्यटकों की संख्या बढ़ी है, उससे यहां का बदलाव सभी को नजर आ रहा है।

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