फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Amit Shah said Aided by technology new criminal laws will deliver justice within 3 years

Amit Shah: नए आपराधिक कानून प्रणाली पूरी तरह से तकनीक पर निर्भर, शाह का दावा- तीन साल के अंदर मिलेगा न्याय

Mon, 27 May 2024 02:59 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: काव्या मिश्रा Updated Mon, 27 May 2024 02:59 PM IST
सार

अमित शाह ने पहली बार नए आपराधिक कानून प्रणाली पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि यह प्रणाली लगभग पूरी तरह से तकनीक पर आधारित है।

विज्ञापन
Amit Shah said Aided by technology new criminal laws will deliver justice within 3 years
गृहमंत्री अमित शाह। - फोटो : amar ujala

विस्तार

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि एक जुलाई से लागू होने वाले नए आपराधिक कानूनों में प्रौद्योगिकी (Technology) एक महत्वपूर्ण कारक होगी। उन्होंने कहा कि समन एसएमएस द्वारा भेजे जाएंगे, 90 फीसदी गवाह वीडियो कॉल के जरिए पेश होंगे और अदालतें प्राथमिकी दर्ज होने के तीन साल के भीतर आदेश जारी करेंगी।

विज्ञापन


उन्होंने एक न्यूज एजेंसी को दिए इंटरव्यू में कहा, 'मैं आपको विश्वास के साथ कह सकता हूं कि तीन साल बाद हमारी आपराधिक न्याय प्रणाली दुनिया की सबसे आधुनिक आपराधिक न्याय प्रणाली होगी।'
विज्ञापन


बीते साल मिली थी मंजूरी
नए कानूनों में देशद्रोह कानून को नए अवतार में लाया जा रहा है और इसके दोषी को उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है। लोकसभा में बीती 21 दिसंबर को तीन नए आपराधिक कानूनों- भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य विधेयक को मंजूरी मिली थी। ये कानून मौजूदा कानूनों भारतीय दंड संहिता, दंड प्रक्रिया संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम 1872 की जगह लेंगे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 25 दिसंबर को इन कानूनों को मंजूरी दे दी थी। अब यह कानून एक जुलाई से लागू होंगे। 
विज्ञापन
विज्ञापन


प्रणाली पूरी तरह से तकनीक पर आधारित
शाह ने इंटरव्यू के दौरान पहली बार नए आपराधिक कानून प्रणाली पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि यह प्रणाली लगभग पूरी तरह से तकनीक पर आधारित है। उदाहरण के लिए, सभी अदालती मामले ऑनलाइन हो जाएंगे और एफआईआर, कोर्ट डायरी और फैसले का डिजिटलीकरण किया जाएगा। पहले ही, अधिकारियों ने पिछले पांच वर्षों में देश भर में नौ करोड़ अपराधियों के फिंगरप्रिंट डाटा एकत्र किए हैं।

यह किए गए बदलाव
उन्होंने कहा कि नए आपराधिक कानूनों के जरिए हम बहुत बड़े सुधार लाएंगे। कानून लागू होने के बाद 90 फीसदी लोगों को कोर्ट नहीं जाना पड़ेगा। गवाह ऑनलाइन पेश होंगे। उन्होंने आगे कहा कि इससे पहले समन को किसी के घर पर भेजना होता था। अब  समन एसएमएस द्वारा भेजे जाएंगे। ऐसे कई बदलाव नए कानूनों में शामिल किए गए हैं। यही हाल आरोपपत्र का भी था। पहले आरोपपत्र का मतलब दस्तावेजों का विस्तार करना होता था, लेकिन एक बार नए कानून लागू होने के बाद आरोपपत्र को पेन ड्राइव के जरिए रखा जाएगा और इसका जवाब भी पेन ड्राइव के जरिए डिजिटल तरीके से दिया जा सकता है।

शाह ने कहा, 'सभी मामले ऑनलाइन हो जाएंगे। एफआईआर, कोर्ट डायरी, जजमेंट को भी डिजिटल किया जाएगा। हमने उन मामलों में फॉरेंसिक साक्ष्य अनिवार्य कर दिए हैं जहां न्यूनतम सात साल की अवधि के लिए कारावास का प्रावधान है।' 

अधिकारियों का प्रशिक्षण लगभग पूरा
नए कानूनों को लागू करने की तैयारी के बारे में पूछे जाने पर गृह मंत्री ने कहा कि तैयारियां तेजी से चल रही हैं और अधिकारियों का प्रशिक्षण लगभग पूरा हो चुका है। उन्होंने कहा कि इसके लागू होने के बाद, नए आपराधिक कानूनों के तहत कोई भी प्राथमिकी दर्ज करने के दिन से तीन साल के भीतर सुप्रीम कोर्ट से आदेश प्राप्त कर सकता है।


अमित शाह ने कहा कि वह साल 2019 से तीन नए आपराधिक कानूनों पर काम कर रहे हैं। हम अदालतों और पुलिस थानों के आधुनिकीकरण की दिशा में काम कर रहे हैं। सब कुछ तकनीक की मदद से हो रहा है। तकनीक के माध्यम से कानून का आधुनिकीकरण हो रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed