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Punjab Politcs: पंजाब के प्रभारी के सहारे राज्य में नई जमीन तैयार कर रहे हैं अमित शाह, टिकैत को अलग-थलग करने की तैयारी

Wed, 01 Dec 2021 09:28 PM IST
Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Wed, 01 Dec 2021 09:28 PM IST
सार

बताते हैं पंजाब में शाह भाजपा अध्यक्ष नड्डा के साथ मिलकर नया समीकरण बना रहे हैं। पंजाब के प्रभारी गजेन्द्र सिंह शेखावत लगातार कोशिश कर रहे हैं। शाह पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के संपर्क में हैं।

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Amit Shah is preparing new land in the state with the help of incharge of Punjab Latest News Update
अमित शाह - फोटो : ANI

विस्तार

मनजिंदर जीत सिंह सिरसा शिरोमणि अकाली दल को छोड़कर भाजपा ज्वाइन करना चाहते थे। पंजाब के प्रभारी और केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने इसका रोडमैप बनाने में उनकी सहायता की, लेकिन सिरसा चाहते थे कि भाजपा के बड़े नेता की उपस्थिति में ज्वाइन करें। ऐसा हुआ भी। संसद से कोई चार बजे गजेन्द्र सिंह शेखावत पार्टी मुख्यालय के लिए निकले। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा को पता था। केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह, शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान भी वहां पहुंचे और सबकी मौजूदगी में सिरसा ने भाजपा का पटका पहना, पार्टी की सदस्यता ली और भाजपाई हो गए।

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बताते हैं पंजाब में शाह भाजपा अध्यक्ष नड्डा के साथ मिलकर नया समीकरण बना रहे हैं। पंजाब के प्रभारी गजेन्द्र सिंह शेखावत लगातार कोशिश कर रहे हैं। शाह पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के संपर्क में हैं। सरकार की नजर अगले साल पंजाब विधानसभा के चुनाव पर टिकी है और रणनीतिकारों को उम्मीद है कि राज्य से कांग्रेस की सत्ता हटेगी। भाजपा वहां चुनाव में अपने ठीकठाक उम्मीदवार उतारेगी। इसके लिए भी गजेन्द्र सिंह शेखावत को अभी काफी काम करना है।
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भाजपा का दावा: पंजाब के किसान भी देंगे भाजपा का साथ
भाजपा के एक नेता ने कहा कि राज्य के किसान संगठन तीनों कृषि कानूनों के वापस लिए जाने के बाद आंदोलन को खत्म करना चाहते हैं। केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत को भी इसी तरह की उम्मीद है। कहा जा रहा है कि शनिवार से पंजाब के किसानों के कुछ संगठन लौटने की घोषणा करना शुरू कर देंगे। सिंघु बार्डर को खाली किए जाने का आश्वासन मिलना शुरू हो गया है। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बनने वाली समिति के लिए पांच किसानों के प्रतिनिधि का नाम आने के बाद सरकार अपना काम शुरू कर देगी। 
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इसके लिए पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह, अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार और तमाम नेताओं ने कोशिशों को जारी रखा है। पार्टी के नेताओं का कहना है कि पंजाब के किसान नेताओं के पीछे हटने के बाद भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत अलग-थलग पड़ जाएंगे। केन्द्र सरकार के एक मंत्री ने ऑफ द रिकार्ड चर्चा में कहा कि केन्द्र सरकार राकेश टिकैत के आंदोलन जारी रखने की धमकियों पर बहुत कान नहीं देती।

कहां टिकी है अमित शाह की नजर
किसान आंदोलन के समाप्त होने के बाद पंजाब में भाजपा की उम्मीद को पंख लग सकता है। इसका हरियाणा में भी फायदा मिलना तय माना जा रहा है। समझा जा रहा है कि केन्द्रीय मंत्री अमित शाह की निगाह पंजाब में त्रिकोणीय मुकाबले की स्थिति पर टिकी है। पंजाब के बदलते समीकरण में भाजपा के रणनीतिकारों को लग रहा है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ कांग्रेस के तमाम असंतुष्ट नेता जुड़ सकते हैं। 

कई नेता कांग्रेस पार्टी को छोड़कर दूसरे दल में जा सकते हैं। इनके ऊपर भी भाजपा की नजर है। ऐसे में कैप्टन अमरिंदर सिंह और शिरोमणि अकाली दल के पूर्व चुनाव पूर्व गठबंधन होने की संभावना है। भाजपा इन दोनों सहयोगी दलों के सहारे पंजाब चुनाव में प्रभावी स्थिति में आकर सरकार बनवाने की पहल कर सकती है।

चिंता की कोई बात नहीं: कांग्रेस

  • कांग्रेस पार्टी अपने पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को दिल्ली बुलाया है। चन्नी के साथ पंजाब कांग्रेस के प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू और पूर्व प्रधान सुनील जाखड़ भी दिल्ली की वार्ता में रहेंगे। पार्टी को 2022 के विधानसभा चुनाव में सीधी चुनौती आम आदमी पार्टी से मिलने की उम्मीद है। शिरोमणि अकाली दल के नेता सुखबीर बादल भी कमर कसकर चुनाव जीतने की तैयारी कर रहे हैं। 
  • कैप्टन अमरिंदर सिंह के इफेक्ट से पार्टी को भितरघात का भी डर है। ऐसे में पार्टी के प्रभारी हरीश चौधरी की रिपोर्ट पर कांग्रेस के नेता मुख्यमंत्री और कांग्रेस के प्रधान सिद्धू के बीच में कामकाजी तालमेल को बेहतर करना चाहते हैं। पंजाब से आने वाले कांग्रेस के पूर्व सांसद का कहना है कि पंजाब में अभी समीकरण हमारे पक्ष में हैं। सरकार विरोधी वोट बंटेगा। इसका बहुत छोटा सा हिस्सा कैप्टन अमरिंदर सिंह के पास जा सकता है। 
  • कांग्रेस नेता का कहना है कि पंजाब में भाजपा अभी गिनती में नहीं है। शिरोमणि अकाली दल को 15 सीटों से 58 सीटों का सफर तय करना इतना आसान नहीं है। अकाली दल और आम आदमी पार्टी दोनों सरकार विरोधी लहर के वोट का बंटवारा कर सकती हैं और ऐसे में कांग्रेस के फिर सत्ता में लौटने की पूरी उम्मीद है। वह कहते हैं कि पंजाब में हमारे पास अभी चिंता का कोई कारण नहीं है।
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