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Amit Shah: गृह मंत्री की दो टूक- कानूनी एजेंसियां सीमाओं से बंधी नहीं; न्यायपालिका को सरल बनाने पर कही यह बात
Sun, 04 Feb 2024 07:21 PM IST
ज्योति भास्कर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Sun, 04 Feb 2024 07:21 PM IST
सार
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने न्यायपालिका को आम जनता के लिए सरल बनाने पर अहम बयान दिया। उन्होंने कहा कि तकनीक के इस्तेमाल से न्यायपालिका सरल बनती है। उन्होंने देश की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के कामकाज पर कहा कि बॉर्डर इन एजेंसियों की राह में रुकावट नहीं बन सकते।
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गृह मंत्री ने कॉमनवेल्थ अटॉर्नी और सॉलिसिटर जनरल कॉन्फ्रेंस (सीएजीएससी-24) को संबोधित किया
- फोटो : amar ujala graphics
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विस्तार
कॉमनवेल्थ अटॉर्नी और सॉलिसिटर जनरल कॉन्फ्रेंस (सीएजीएससी-24) के समापन सत्र में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कानून का राज स्थापित करने को लेकर सख्त संदेश दिया। शाह ने कहा कि न्यायपालिका में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ने से पूरा सिस्टम सरल बनाया जा सकता है। शाह ने तीन A का फॉर्मूला बताते हुए कहा, न्यायपालिका आम लोगों की पहुंच में (Accessible) होनी चाहिए। इसके अलावा उन्होंने कम खर्च में गरीबों को न्याय दिलाने के विजन के तहत किफायती (Affordable) और न्याय सुनिश्चित करने के लिए अदालतों की जवाबदेही (Accountable) का जिक्र किया। उन्होंने पूरे सिस्टम को सुलभ, किफायती और जवाबदेह बनाने की दिशा में प्रयास किए जाने का आह्वान भी किया।
कानूनी एजेंसियों के लिए बॉर्डर बेमानी हैं
शाह ने रविवार को कहा कि अपराध और अपराधी भौगोलिक सीमाओं का सम्मान नहीं करते। इसलिए, देश की विभिन्न कानून प्रवर्तन एजेंसियों को भी जांच और पीड़ितों को इंसाफ दिलाने की राह में किसी भी सीमा को बाधा नहीं मानना चाहिए। उन्होंने कहा कि अपराधों को सुलझाने के इन बाधाओं को एक शुरुआती बिंदु के रूप में समझना चाहिए।
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कानूनी एजेंसियों के लिए बॉर्डर बेमानी हैं
शाह ने रविवार को कहा कि अपराध और अपराधी भौगोलिक सीमाओं का सम्मान नहीं करते। इसलिए, देश की विभिन्न कानून प्रवर्तन एजेंसियों को भी जांच और पीड़ितों को इंसाफ दिलाने की राह में किसी भी सीमा को बाधा नहीं मानना चाहिए। उन्होंने कहा कि अपराधों को सुलझाने के इन बाधाओं को एक शुरुआती बिंदु के रूप में समझना चाहिए।
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