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अमेरिकी टकराव के बीच भारत से व्यापार संबंधों को गहरा करना चाहता है चीन

Thu, 11 Oct 2018 04:02 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 11 Oct 2018 04:02 PM IST
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Amid trade friction between China and US, China wants India to deepen trade ties
पीएम मोदी और शी जिनपिंग

अमेरिका और चीन के व्यापार युद्ध के बीच खबर आई है कि चीन भारत के साथ व्यापार संबंधों को गहरा करना चाहता है। बीजिंग ने कहा है कि व्यापार संरक्षणवाद से लड़ने के लिए सहयोग को और मजबूत करना होगा। एकतरफा और धमकाने जैसी गतिविधियों पर चीनी दूतावास ने अपने बयान में कहा कि चीन और भारत के पास ऐसे बहुत से कारण हैं कि वह उचित अतंरराष्ट्रीय व्यवस्था को बनाए रखें।


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व्यापारिक नीतियों पर ट्रंप प्रशासन ने भारत को भी नहीं छोड़ा और बीते सप्ताह ही ट्रंप ने भारत को टैरिफ किंग तक कहा। ट्रंप ने यह भी कहा कि आयात पर अधिक आयात शुल्क की चेतावनी के बाद भी भारत अमेरिका से व्यापार करना चाहता है। केवल इतना ही नहीं अमेरिका ने ईरान से तेल मंगाने वाले देशों के लिए भी नियम निर्धारित किए हैं जो 4 नवंबर के बाद से लागू होंगे।

अमेरिका का कहना है कि जो भी देश ईरान से तेल मंगवाएगा उससे वह नियमों के द्वारा निपटेगा। बता दें ईरान से भारत तो तेल मंगवा ही रहा है लेकिन चीन भी पीछे नहीं है। वह भी ईरान से तेल का आयात कर रहा है। इसी बात को आधार मानते हुए बीजिंग ने अमेरिका से भी कहा है कि वह भारत और चीन जैसे विकासशील देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करना बंद करे।

बयान में कहा गया है कि दो विकसित होती अर्थव्यवस्थाएं और उभरते हुए बाजार को एक होना चाहिए। दोनों को ही एक स्थिर बाहरी वातावरण की आवश्यकता है। भारत में चीनी दूतावास के प्रवक्ता जी रोंग ने आगे कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और निष्पक्ष व्यापार के नाम पर एकतरफा व्यापार संरक्षणवाद करना न केवल चीन के आर्थिक विकास को बल्कि भारत के बाहरी वातावरण को भी प्रभावित कर रहा है।

बता दें दावोस में हुए वर्ल्ड इकोनोमिक फोरम में भी चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली और मुक्त व्यापार की बात कर चुके हैं। राजदूत ने कहा कि दोनों देशों ने  10वें ब्रिक्स फोरम में भी हिस्सा लिया था। इससे संरक्षणवाद के खिलाफ होने का संदेश मिलता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका को परेशानियां खड़ी करने की बजाय संबंधित पक्षों को मेलभाव से समस्या का समाधान करने देना चाहिए। जी ने आगे कहा कि चीन पर लगने वाला आरोप कि वह विकासशील देशों को ऋण जाल में फंसा रहा है, वह फूट डालने का प्रयास मात्र है।

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