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मार्को रूबियो की यात्रा से क्या मिला: भारत-अमेरिका के रिश्तों में आएगा कितना बदलाव, कितने बेहतर होंगे हालात?
सार
मार्को रूबियो की भारत यात्रा चर्चा में है। अमेरिकी विदेश मंत्री के इस दौरे के बीच अहम सवाल ये है कि दौरे से क्या हासिल हुआ? इस यात्रा के बाद भारत-अमेरिका के रिश्तों में कितना बदलाव आएगा? द्विपक्षीय संबंधों के लिहाज से हालात कितने बेहतर होंगे? जानिए ऐसे तमाम सवालों के जवाब
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भारत दौरे पर रूबियो ने कई अहम बैठकों में हिस्सा लिया (फाइल)
- फोटो : ANI
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विस्तार
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो 23-26 मई तक की भारत यात्रा पर हैं। मंगलवार को क्वॉड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेकर अमेरिका लौट जाएंगे। इस दौरान उन्होंने विदेश मंत्री एस जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से भेंट की। भारतीय विशेषज्ञ अमेरिकी विदेश मंत्री की इस यात्रा के निहितार्थ निकालने में जुट गए हैं।
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सबसे बड़ा सवाल यही है कि विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ आपसी, क्षेत्रीय, अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा के बाद दोनों देशों के रिश्ते में कितनी गर्माहट आई है। मार्को रूबियो ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से भेंट की। उन्हें राष्ट्रपति ट्रंप का संदेश और अमेरिका यात्रा का न्यौता दोनों दिया। राष्ट्रपति ट्रंप ने भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को दोस्त बताया। राष्ट्रपति ने कहा कि वह प्रधानमंत्री मोदी के ‘फैन’ हैं। बातें खूब बड़ी-बड़ी हुई हैं, लेकिन जमीन पर क्या हाल है? विदेश मामलों के जानकार वरिष्ठ पत्रकार रंजीत कुमार कहते हैं कि अभी तक तो कहीं से नहीं लगता कि अमेरिकी विदेश मंत्री कोई बराबरी के रिश्ते का भाव लेकर आए हैं। अभी तक उन्होंने कोई ऐसी बात नहीं की कि लगे कुछ हालात बेहतर होंगे।
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क्या रिश्ते को रफू कर पाए रूबियो
विदेश सेवा के अधिकारी एसके शर्मा के मुताबिक उन्हें इस यात्रा से कोई खास उम्मीद नहीं थी। इसे दोनों देशों के बीच में विश्वास बहाली का कदम कहकर ही काम चलाना चाहिए। ऐसा लग रहा है कि भारत और अमेरिका के बीच में आवाजाही के बढ़ रहे अंतर को भरने और अमेरिकी हितों को ध्यान में रखकर मार्को रूबियो ने भारत आने का कार्यक्रम बनाया था। शर्मा कहते हैं कि अमेरिका में रह रहे भारतीय युवाओं पर एच1बी वीजा और ग्रीन कार्ड को लेकर भारी दबाव है। पश्चिम एशिया संकट के बाद भारत की ऊर्जा जरूरतें लगातार चिंता पैदा कर रही हैं। भारत अपनी जरूरत का 85-87 प्रतिशत तक ईधन तेल, गैस आयात करता है। अमेरिका की टैरिफ नीति लगातार भारत का संकट बढ़ा रही है।
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इसके अलावा भारत पाकिस्तान से प्रायोजित आतंकवाद का पीड़ित देश है। हम लगातार इसकी भारी कीमत चुका रहे हैं। एसके शर्मा कहते हैं कि इन कोर इश्यू पर मार्को रूबियो की तरफ से अभी तक कोई सकारात्मक संदेश नहीं मिला। उल्टे उन्होंने भारत में आकर पाकिस्तान को रणनीतिक साझीदार देश कहा। इस मुद्दे पर रूबियो गोल-मोल जवाब दे गए। शर्मा कहते हैं कि भारत को सेमीकंडक्टर और हाई तकनीक की जरूरत है। अमेरिका के साथ कई क्षेत्रों में रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाया जाना है। लेकिन मुझे नहीं लगता की भारत की गंभीर समस्याओं को समाधान हो पाया।
वह तो कह गए वेनेजुएला राष्ट्रपति आएंगे...
रंजीत कुमार कहते हैं कि हमारे विदेश मंत्री एस जयशंकर को ऊर्जा जरूरतों के लिए खुलकर बोलना पड़ा। विदेश मंत्री जयशंकर ने भारत के 140 करोड़ लोगों की जरूरत को सामने रखते हुए कहा कि ऊर्जा सुरक्षा के मामले में भारत सस्ते, भरोसेमंद स्रोतों को प्रथमिकता देता रहेगा। उन्होंने तंज भरे लहजे में कहा कि अमेरिका के विदेश मंत्री ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति के भारत दौरे की जानकारी दी है। इसलिए अभी इस यात्रा से बहुत उम्मीद पालना ठीक नहीं है।
राष्ट्रपति ट्रंप और राष्ट्रपति शी जिनपिंग...
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन से मजबूत बॉडिंग दिखा रहे हैं। पश्चिम एशिया संकट में जिस तरह से रूस और चीन ने ईरान का खुले तौर पर साथ दिया है, उससे अमेरिकी रणनीतिकारों में एक घबराहट है। विदेश मामले के जानकारों का मानना है कि राष्ट्रपति ट्रंप एक रणनीति के तहत बीजिंग आए थे और शी जिनपिंग से मिलकर लौटे। इस यात्रा ने चीन को काफी रणनीतिक ऊंचाई दे दी है। रंजीत कुमार कहते हैं कि एक तरह से अमेरिका के बराबरी का दर्जा। इसको लेकर जापान में बड़ी खलबली थी। चीन के साथ भारत का रिश्ता भी एक संवेदनशील मोड़ से गुजर रहा है। इस स्थिति में प्रशांत क्षेत्र और खासकर हिन्द प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय कारोबार, स्वतंत्र नौवहन से लेकर सभी मुद्दे अमेरिका के लिए अहम हैं। माना जा रहा है कि इसी संदेश को अमेरिका ने मजबूत आधार देने की कोशिश की है।
क्वॉड समूह के विदेश मंत्रियों की बैठक
मंगलवार को दिल्ली में क्वॉड (अमेरिका, भारत, जापान और आस्ट्रेलिया) फोरम के विदेश मंत्रियों की बैठक है। इसमें भाग लेने के लिए आस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री पेनी वोंग, जापान की तोशिमित्शु मोतेगी भारत पहुंच चुकी हैं। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो भारत में ही हैं। वह आगरा से जयपुर गए हैं और कल नई दिल्ली में क्वॉड विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होंगे। विदेश मंत्री एस जयशंकर की मेजबानी में होने वाली बैठक की भारत ने तैयारी कर ली है। इस बैठक में पश्चिम एशिया संकट के बाद ध्वस्त हुई सप्लाई चेन, समुद्रीय सुरक्षा, उत्पन्न चुनौतियां, साइबर सुरक्षा, उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में सहयोग , हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में लोकतांत्रिक मूल्यों और इसकी सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा होनी है। देखना है जाते-जाते विदेश मंत्री रूबियो भारत को कौन सा तोहफा देकर जाते हैं।