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DoPT: केंद्र में पदोन्नति के लिए आरक्षित रिक्तियों को गैर-आरक्षित करने के नियमों में संसोधन, एक महीने करना होग

Wed, 17 Jun 2026 08:36 PM IST
Rahul Kumar डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Rahul Kumar Updated Wed, 17 Jun 2026 08:36 PM IST
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Amendment to rules for de-reserving promotion vacancies at the Centre: A one-month wait required
डीओपीटी - फोटो : अमर उजाला

केंद्र सरकार में पदोन्नति के लिए आरक्षित रिक्तियों को गैर-आरक्षित करने के नियमों में संसोधन किया गया है। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के मुताबिक, पहले इस तरह के मुद्दे पर मंत्रालयों और विभागों को दो सप्ताह में निर्णय लेना पड़ता था। अब इस समय-सीमा को बढ़ाकर एक महीना कर दिया गया है। केंद्र सरकार के मंत्रालयों और विभागों को डीओपीटी एवं संबंधित संवैधानिक आयोग से टिप्पणियां लेने के लिए एक महीने तक इंतजार करना होगा। 

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डीओपीटी ने सभी मंत्रालयों और विभागों से कहा है कि इस मामले में बाकी नियम और शर्तें, 2009 के ओएम के अनुसार रहेंगी। इस संशोधित समय-सीमा को लेकर राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी), एसटी के लिए आरक्षित पदों के संबंध में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (एनसीएसटी) और ओबीसी के लिए आरक्षित पदों के मामले में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (एनसीबीसी) को अवगत करा दिया गया है। उक्त मामले में इन आयोगों से सलाह लेना अनिवार्य है। जिन नियमों में संशोधन किया गया है, वे पदोन्नति कोटे में अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षित रिक्तियों पर लागू होते हैं। 
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डीओपीटी ने समय अवधि में जो संशोधन किया है, उसके लिए राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के साथ परामर्श किया गया है। अब केंद्र सरकार के प्रशासनिक मंत्रालय/विभाग, नियमानुसार आरक्षण हटाने को लेकर निर्णय लेने से पहले डीओपीटी और संबंधित राष्ट्रीय आयोग की टिप्पणियों के लिए कम से कम एक माह की अवधि तक इंतजार करेगा। डीओपीटी ने कहा है कि एक माह के दौरान कोई टिप्पणी प्राप्त होती है, तो संबंधित मंत्रालय/विभाग को अंतिम निर्णय लेने से पहले उन टिप्पणियों पर विचार किया जाना चाहिए। 
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डीओपीटी के मौजूदा निर्देशों के तहत, सीधी भर्ती के मामले में आरक्षित खाली पदों को अनारक्षित करने पर सामान्य रोक है। हालांकि, दुर्लभ और असाधारण मामलों में, जहां जनहित में ग्रुप ए के पद को खाली नहीं छोड़ा जा सकता, प्रशासनिक मंत्रालय को एससी के लिए आरक्षित पदों के मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग, एसटी के लिए आरक्षित पदों के मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग और ओबीसी के लिए आरक्षित पदों के मामले में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग से परामर्श करना आवश्यक है। 

संबंधित आयोगों की राय लेने के बाद, प्रशासनिक मंत्रालय को सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, डीओपीटी और संबंधित प्रशासनिक मंत्रालय के सचिवों वाली एक समिति को विचार एवं सिफारिश के लिए प्रस्ताव भेजना होता है। इन सिफारिशों पर अंत में डीओपीटी के प्रभारी मंत्री विचार करते हैं। मंजूरी मिलने के बाद, ऐसी सीधी भर्ती वाली रिक्तियों को अनारक्षित कर दिया जाता है। 

प्रमोशन की रिक्तियों को अनारक्षित करने के मामले में मंजूरी देने का अधिकार प्रशासनिक मंत्रालयों और विभागों को सौंपा गया है, लेकिन इसके लिए कुछ शर्तें तय की गई हैं। जैसे विचार का दायरा (जोन ऑफ कंसीडरेशन) या विस्तारित दायरे में आरक्षित श्रेणी का कोई उम्मीदवार उपलब्ध न हो। संपर्क अधिकारी ने ऐसे प्रस्ताव पर सहमति दी हो। इसके बाद संबंधित संयुक्त सचिव द्वारा भी उक्त प्रस्ताव को मंज़ूरी मिलना आवश्यक है। 


अगर एक महीने के अंदर डीओपीटी या संबंधित आयोग से कोई टिप्पणी नहीं मिलती है, तो ही संबंधित प्रशासनिक मंत्रालय/विभाग उस प्रमोशन वाली वैकेंसी को 'डी-रिज़र्व' (आरक्षण-मुक्त) करने का फ़ैसला ले सकता है। अगर मंत्रालय/विभाग को एक महीने के अंदर डीओपीटी या संबंधित आयोग से कोई टिप्पणी मिलती है, तो इस मामले में फ़ैसला लेते समय उन टिप्पणियों पर विचार किया जाएगा। सभी मंत्रालयों/विभागों आदि से अनुरोध किया गया है कि वे बदली हुई समय-सीमा की जानकारी सभी संबंधित लोगों तक पहुंचाए।

 

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