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विशेष संपादकीय : राजस्थान से गायब होतीं अरावली की पहाड़ियां

Thu, 25 Oct 2018 11:48 AM IST
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 25 Oct 2018 11:48 AM IST
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Amar ujala special: Disappearing hills of Aravalli
अरावली पर्वतमाला

राजस्थान में अरावली पर्वतमाला की 128 में से तीस से ज्यादा पहाड़ियों के गायब हो जाने को लेकर सर्वोच्च न्यायालय ने राजस्थान सरकार से जिस तरह जवाब तलब किया है, वह पर्यावरण के मोर्चे पर हमारी सरकारों की उदासीनता का एक और क्षुब्ध कर वाला उदाहरण है। लालच का जो तंत्र नदियों को सूखा दे रहा है, वही तंत्र सुनियोजित तरीके से पहाड़ियों को गायब कर रहा है।

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दिल्ली की सीमा से लगी अरावली की पहाड़ियों का बीस फीसदी से अधिक हिस्सा कुछ वर्षो में नहीं, बल्कि पिछले पचास साल में गायब हुआ है, पर इससे राजस्थान की मौजूदा सरकार का दामन पाक-साफ नहीं हो जाता, क्योंकि वह खुद मान रही है कि अवैध खनन का काम अब भी जारी है।
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सूबे के पंद्रह जिलों में अवैध खनन होता है, जिसमें से अलवर, डुंगरपुर और सीकर कुख्यात माने जाते हैं। खनन कंपनियों से राज्य सरकार को सालाना करीब पांच हजार करोड़ की रॉयल्टी मिलती है, लेकिन इससे प्रदूषण के मोर्चे पर दिल्ली को जो नुकसान झेलना पड़ रहा है वह उससे कई गुना अधिक है।
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शीर्ष अदालत ने राजस्थान सरकार को न केवल 48 घंटे के अंदर अवैध खनन रोकने के लिए कहा है, बल्कि उससे इस संबंध में हलफनामा दायर करने के लिए भी कहा है। अरावली में दशकों से जारी अवैध खनन सिर्फ राजस्थान तक सीमित नहीं है बल्कि हरियाणा में भी हालत उतनी ही बदतर है और वहां भी अदालत को समय-समय पर इस मामले में सख्ती बरतते देखा गया है।

अरावली की पहाड़ियां सैकड़ों वर्षों से गंगा के मैदान के ऊपरी हिस्से की आबोहवा तय करती हैं, जिनमें वर्षा, तापमान, भू-जल रिचार्ज से लेकर भू-संरक्षण तक शामिल है। ये पहाड़ियां दिल्ली, हरियाणा  और पश्चिमी उत्तर प्रदेश को धुल, तूफ़ान और बाढ़ से बचाती रही हैं।


लेकिन हाल का एक अध्ययन बताता है कि अरावली में जारी खनन से थार की रेत दिल्ली की ओर लगातार खिसकती जा रही है। राजस्थान से हरियाणा तक एक विशाल इलाके में खनन से जमीन की उर्वरता खत्म हो रही है। इससे हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सूखा और राजस्थान के रेतीले इलाके में बाढ़ की स्थिति बनने लगी है, क्योंकि मानसून का पैटर्न बदलता जा रहा है। प्रदूषण के मोर्चे पर हालांकि, पहले ही बहुत नुकसान हो चुका है पर अरावली में अवैध खनन पर पूरी तरह अंकुश लगाकर अब भी पर्यावरण को कमोबेश बचाया जा सकता है।

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