Amar Ujala Special: डर कैसा डर? बांग्लादेश सीमा पर दिवाली की रात ड्यूटी के लिए आई BSF महिला जवान से खास बातचीत
अंतरराष्ट्रीय सीमा पर एक निर्जन जगह पर बीएसएफ का कंट्रोल रूम है। इसकी कमांड ईश्वरी के हाथ में है। एक दम चौकन्नी, अलर्ट और हर वक्त नजर सीसीटीवी की स्क्रीन पर, कहीं कोई हलचल होती है तो तुरंत पूरे क्षेत्र को अलर्ट करती हैं।
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रात के करीब 11.50 बजे हैं। चारों तरफ जंगलों और खेतों से घिरे, भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा पर एक सुनसान तिराहे पर अचानक बीएसएफ के जवानों की हलचल बढ़ जाती है। दिवाली की रात है, इसलिए पूरी तरह से अंधेरा (कृष्णपक्ष होने के कारण ) है। हल्की-हल्की ठंड है और हल्के कोहरे के कारण थोड़ी दूर से कुछ साफ दिखाई नहीं दे रहा। पास जाकर देखा, तो पता चला कि बीएसएफ की महिला जवान ड्यूटी एक्सचेंज कर रही हैं। इस वक्त, जब सारे देश के लोग दीपावली का त्यौहर मनाकर सोने की तैयारी कर रहे होंगे। तब ये बीएसएफ की महिला जवान, पुरुष जवानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर रात को भारत-बांग्लादेश की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर रात को ड्यूटी एक्सचेंज कर रही हैं। अचनाक मुंह से निकला अरे, डर नहीं लगता, इस बियांबान में। अभी-अभी ड्यूटी संभालने आई, महिला जवान गौतमी ने मेरी ओर देखते हुए कहती हैं, डर, कैसा डर। इस पूरे इलाके को मैं रात के अंधेरे में अकेली डोमिनेट करती हूं। दुश्मनों के छक्के छुड़ाती हूं। यह करने वाली मैं अकेली नहीं हूं, मेरी जैसी और भी महिला जवान हैं। उल्लेखनीय है कि अमर उजाला ने दीपावली की रात सीमा सुरक्षा बलों (बीएसएफ) के जवानों के साथ उत्तर 24 परगना जिले के रनघाट स्थित भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा पर दिवाली मनाई और जवानों से सीमा के हालात और इस निर्भयता के बारे में जानने का प्रयास किया।
देश के विश्वास और भरोसे से मिलती है ताकत
आज दिवाली है, इसलिए बीएसएफ के वरिष्ठ अधिकारियों ने इसके लिए खास तैयारी की है। भारत-बांग्लादेश सीमा पर महिला और पुरुष जवान दीपावली की तैयारी कर रहे हैं। जवानों में काफी जोश है। किसी जावन के चेहरे पर कोई मायूसी नहीं है, खास कर महिला जवानों के चेहरों पर। सभी ने अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पर मोमबत्ती जलाईं और एक दूसरे को बधाई दी। एक सवाल पर महिला जवान सरोज चौधरी बोलीं, उदास क्यों होंगे? देश भी हो हमारा परिवार ही है। घर से भले ही दूर हैं लेकिन देश को हम पर बहुत विश्वास है। हम सीमाओं के रक्षक हैं। वही, विश्वास और भरोसा हम सबको ताकत देता है। हम सीमा के प्रहरी हैं, जहां भी रहते हैं, वही हमारा घर होता है।
यह जान देश के लिए समर्पित करके आया है
रात के करीब 1.15 बजे हैं। अंतरराष्ट्रीय सीमा पर एक निर्जन जगह पर बीएसएफ का कंट्रोल रूम है। इसकी कमांड ईश्वरी के हाथ में है। एक दम चौकन्नी, अलर्ट और हर वक्त नजर सीसीटीवी की स्क्रीन पर, कहीं कोई हलचल होती है तो तुरंत पूरे क्षेत्र को अलर्ट करती हैं। दक्षिण भारत की रहने वाली ईश्वरी कहती हैं, 12वीं पास करने के बाद बीएसएफ में आया है। डर तो हमको छु भी नहीं सकता। इसलिए क्योंकि यह जान देश के लिए समर्पित करके आया है। यही जीवन का लक्ष्य है, कोई दुश्मन हमारे देश की ओर निगाह उठाकर देखने की जुर्रत नहीं करे।
हर घर से एक बेटी बीएसएफ में आए
नमिता कहती हैं, आप भी ज्यादा से ज्यादा संख्या में, खास कर हर घर से एक बेटी को बीएसएफ ज्वाइन करनी चाहिए। क्योंकि यहां बहुत अच्छा है। यहां पर सभी मिलजुल कर काम करते हैं। बेटियां आज क्या नहीं कर रही हैं। उनको फोर्स ज्वाइन करके देश और दुनिया को अपनी ताकत का अहसास कराना चाहिए। हर क्षेत्र में जब बेटियां आगे हैं, तो इसमें क्यों पीछे रहे। देश की रक्षा के लिए बेटियों को ज्यादा से ज्यादा संख्या में आर्म्ड फोर्सेज ज्वाइन करना चाहिए। यहां आने के बाद ही पता चलता है, असली जिंदगी किसे कहते हैं। माता-पिता और पूरे समाज को आप पर गर्व होगा।
वरिष्ठों से मिलती है हिम्मत, रखते हैं पूरा ख्याल
फुलझड़ी जलाकर दिवाली उत्सव मना रही, पल्लवी घोष कहती हैं, हमारे वरिष्ठ ही हमारे अभिभावक हैं। वे हर सुख-दुख में हमारे साथ खड़े रहते हैं। वे हमारी हिम्मत बढ़ाते हैं, हमारा पूरा ख्याल रखते हैं। किसी भी तरह की कोई भी परेशानी नहीं होने देते। हमारा एक छोटा घर है, जहां हम पैदा हुए थे, लेकिन यह हमारा बड़ा घर है, जहां हम अपने जीवन का एक बहुड़ बड़ा हिस्सा गुजारेंगे। बीएसएफ का तो आप्त वाक्य ही है, जीवन पर्यंत कर्तव्य। अपने वरिष्ठों के मार्ग-दर्शन में उसी कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ रहे हैं।
हर हाल में सीमा की सुरक्षा ही लक्ष्य: डीआईजी
दक्षिण बंगाल सीमांत, बीएसएफ के प्रवक्ता डीआईजी एके आर्य कहते हैं, बीएसएफ की महिला जवान, पुरुष जवानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर रात को भी ड्यूटी करती हैं। चौबीसों घंटे चक्र के हिसाब से जिसकी भी ड्यूटी आती है, वे मोर्चा संभालती हैं। बीएसएफ की महिला जवानों को भी उसी तरह की ट्रेिनंग प्रक्रिया से गुजरना होता है, जो पुुरुष जवानों को करना पड़ता है। आंधी हो, तूफान हो, बारिश हो, गर्मी हो रात हो, दिन हो बीएसएफ के हर जवान का एक ही ध्येय है, और वह है हर कीमत पर देश की सीमाओं की रक्षा और सुरक्षा।