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Hindi News ›   India News ›   Amar Ujala Samwad Haryana 19 Year Old Devvrat Mahesh Rekhe 200 year History repeated in Kashi

अमर उजाला संवाद हरियाणा: मिलिए 19 वर्षीय देवव्रत महेश रेखे से, जिन्होंने 200 साल बाद काशी में दोहराया इतिहास

Wed, 17 Dec 2025 05:24 AM IST
कुमार विवेक न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Wed, 17 Dec 2025 05:24 AM IST
सार

Amar Ujala Samvad Haryana: काशी में 200 साल बाद 'दंडक्रम पारायण' कर इतिहास रचने वाले 19 वर्षीय देवव्रत महेश रेखे आज 'अमर उजाला संवाद हरियाणा' के मंच पर होंगे। संवाद के मंच पर आने से पहले जानिए कौन हैं देवव्रत महेश रेखे और उनकी यह उपलब्धि क्यों है इतनी खास।

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Amar Ujala Samwad Haryana 19 Year Old Devvrat Mahesh Rekhe 200 year History repeated in Kashi
देवव्रत महेश रेखे - फोटो : amarujala.com

विस्तार

बिना किसी किताब को देखे, बिना रुके, लगातार 50 दिनों तक हजारों कठिन संस्कृत मंत्रों का शुद्ध उच्चारण करना आज के दौर में असंभव सा लगता है। पर महाराष्ट्र के 19 वर्षीय युवा देवव्रत महेश रेखे ने इसे कर दिखाया है। ऐसा उनसे पहले पिछले 200 वर्षों में किसी ने नहीं किया था। रेखे बुधवार को 'अमर उजाला संवाद हरियाणा' में शामिल होंगे। उनकी इस कठिन 'साधना' ने न केवल काशी के विद्वानों को चौंका दिया, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी उनका मुरीद बना दिया। अब उनकी इस अद्भुत यात्रा और अनुशासन की कहानी संवाद के मंच से गूंजेगी।

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कौन हैं देवव्रत महेश रेखे?

देवव्रत महेश रेखे मूल रूप से महाराष्ट्र के अहिल्या नगर के रहने वाले हैं। महज 19 वर्ष की आयु में उन्होंने वेदों के प्रति वह समर्पण दिखाया है जो बड़े-बड़े विद्वानों के लिए भी दुर्लभ है। देवव्रत वर्तमान में वाराणसी (काशी) के रामघाट स्थित वल्लभराम शालिग्राम सांगवेद विद्यालय के छात्र हैं। देवव्रत एक वैदिक परिवार से आते हैं। उनके पिता वेदब्रह्मश्री महेश चंद्रकांत रेखे स्वयं एक प्रतिष्ठित वैदिक विद्वान हैं और उन्होंने ही देवव्रत को इस कठिन मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित और प्रशिक्षित किया है।

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क्या है 'दंडक्रम पारायण साधना' जिसकी हर तरफ चर्चा?

देवव्रत ने जिस उपलब्धि को हासिल किया है, उसे वैदिक शब्दावली में 'दंडक्रम पारायण' कहा जाता है। यह वेदों के पाठ की सबसे जटिल विधियों में से एक है। यह पाठ शुक्ल यजुर्वेद की माध्यन्दिन शाखा से संबंधित है। इसमें करीब 2,000 मंत्र शामिल हैं। इसके पाठ के नियम भी कठिन हैं। देवव्रत को बिना किसी ग्रंथ को देखे (कंठस्थ), पूरी शुद्धता और लय के साथ इन मंत्रों का उच्चारण करना था, और उन्होंने इसे कर दिखाया। यह अनुष्ठान लगातार 50 दिनों तक चला। उन्होंने 2 अक्तूबर से 30 नवंबर तक बिना किसी बाधा के इस उपलब्धि हो हासिल किया। 30 नवंबर को दंडक्रम पारायण की पूर्णाहुति के बाद उन्हें शृंगेरी शंकराचार्य ने सम्मान स्वरूप सोने का कंगन और 1,01,116 रुपये दिया गया। दंडक्रम पारायणकर्ता अभिनंदन समिति के पदाधिकारियों चल्ला अन्नपूर्णा प्रसाद, चल्ला सुब्बाराव, अनिल किंजवडेकर, चंद्रशेखर द्रविड़ घनपाठी, प्रो. माधव जर्नादन रटाटे व पांडुरंग पुराणिक ने बताया कि नित्य साढ़े तीन से चार घंटे पाठ कर देवव्रत ने इसे पूरा किया।

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देवव्रत महेश रेखे की उपलब्धि क्यों 'ऐतिहासिक'?

देवव्रत की उपलब्धि का सबसे महत्वपूर्ण पहलू इसका इतिहास है। ऐसा माना जाता है कि 'दंडक्रम पारायण' का यह कठिन स्वरूप पिछले 200 वर्षों में किसी ने पूर्ण नहीं किया था। इससे पहले, लगभग दो सदी पूर्व नासिक के वेदमूर्ति नारायण शास्त्री देव ने यह उपलब्धि हासिल की थी। आज के डिजिटल दौर में, जब याददाश्त पर तकनीक हावी है, एक 19 साल के युवा द्वारा हजारों मंत्रों को कंठस्थ करना और उन्हें त्रुटिहीन सुनाना एक चमत्कार जैसा है। देवव्रत की इस सिद्धि ने देश के शीर्ष नेतृत्व का ध्यान अपनी ओर खींचा।

पीएम मोदी और सीएम योगी ने क्या दी प्रतिक्रिया?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर देवव्रत की प्रशंसा करते हुए लिखा, "19 वर्ष के देवव्रत महेश रेखे जी ने जो उपलब्धि हासिल की है, वो जानकर मन प्रफुल्लित हो गया है। उनकी ये सफलता हमारी आने वाली पीढ़ियों की प्रेरणा बनने वाली है... काशी से सांसद होने के नाते मैं विशेष रूप से आनंदित हूं।"

उनकी उपलब्धि पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि शुक्ल यजुर्वेद की माध्यन्दिन शाखा के 'दंडक्रम पारायणम्' का 50 दिनों तक अखंड, शुद्ध और पूर्ण अनुशासन के साथ पाठ करना हमारी प्राचीन गुरू-परंपरा के गौरव का पुनर्जागरण है। उन्होंने इसे भारतीय वैदिक परंपरा की शक्ति और अनुशासन का जीवंत उदाहरण बताया। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि यह महत्वपूर्ण वैदिक अनुष्ठान पवित्र काशी की धरती पर सम्पन्न हुआ। सीएम ने देवव्रत रेखे के परिवार, आचार्यों, संत-मनीषियों और उन सभी संस्थाओं का अभिनंदन भी किया, जिनके सहयोग से यह महान तपस्या सफल हो सकी।



देवव्रत की यह साधना न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि भारतीय संस्कृति और वेद परंपरा का एक उज्ज्वल अध्याय है। अमर उजाला संवाद में उनकी उपस्थिति निश्चित रूप से युवाओं को अपनी जड़ों की ओर लौटने और कठिन परिश्रम करने की प्रेरणा देगी।

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