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Samwad: राजनाथ की दुनिया को दो टूक- PAK को आतंक विरोधी समिति में रखना बिल्ली से दूध की रखवाली करवाने जैसा

Tue, 10 Jun 2025 04:10 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: निर्मल कांत Updated Tue, 10 Jun 2025 04:10 PM IST
सार

देवभूमि के विकास पर मंथन के लिए आज उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में अमर उजाला की ओर से संवाद उत्तराखंड का आयोजन किया गया। इसमें देश की नामी-गिरामी हस्तियां एक मंच पर राजनीति, रक्षा, सिनेमा, खेल और अध्यात्म पर चर्चा करने पहुंचीं। इस कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी शिरकत की। उन्होंने आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान पर जमकर हमले किए। 

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Amar Ujala Samwad 2025: Rajnath Singh In Dehradun Operation Sindoor India Defense Strategy Know what he said
संवाद 2025 के कार्यक्रम में शामिल हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में आज हरिद्वार बाइपास स्थित होटल सेफर्ट सरोवर प्रीमियर में 'संवाद' का आयोजन किया गया। संवाद उत्तराखंड में इस बार कई हस्तियां जुटीं। कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी सिरकत की। इस दौरान उन्होंने पाकिस्तान पर जमकर हमले किए। सिंह ने कहा, हमने एटिट्यूड और एक्शन को बदला है। पहलगाम में आतंकियों ने जिस तरह धर्म पूछकर लोगों को निशाना बनाया, उसने देश को झकझोर दिया। उन्होंने धर्म पूछकर मारा, लेकिन हमने उनका धर्म पूछकर नहीं, उनका कर्म देखकर मारा। रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि पाकिस्तान को (संयुक्त राष्ट्र की) आतंक विरोधी समिति में रखना बिल्ली से दूध की रखवाली करवाने जैसा है। 

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कार्यक्रम में अपने संबोधन की शुरुआत में रक्षा मंत्री ने कहा, सबसे पहले मैं अमर उजाला परिवार का आभार प्रकट करना चाहता हूं कि इस कार्यक्रम में मुझे आमंत्रित किया है। आज आपके बीच होना मेरे लिए बहुत खास भी है, मेरे लिए बहुत आत्मीय अनुभव भी है। आत्मीय इसलिए कि इस कार्यक्रम के बहाने फिर एक बार मुझे इस देवभूमि और तपोभूमि उत्तराखंड में आने का अवसर मिला। जब भी मैं उत्तराखंड आता हूं मुझे एक अपनापन का भाव महसूस होता है। उन्होंने कहा, अमर उजाला नाम सुनते ही मेरे जेहन में कई स्मृतियां तरोताजा हो जाती हैं। 
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उन्होंने कहा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सहित देश के कई हिस्सों में अमर उजाला का इतना असर है कि मोहल्ले में अगर किसी के पास अगर हर तरह की खबरों का भंडार हो तो लोग उसे मोहल्ले का अमर उजाला कहकर पुकारते हैं। यह अमर उजाला की पहुंच और पकड़ का सटीक प्रमाण है।आज भी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के गांवों-कस्बों में सुबह की शुरुआत चाय के साथ अमर उजाला के पन्नों से होती है। आपकी खबरें केवल सूचना मात्र नहीं होती, बल्कि समाज की नब्ज को टटोलने वाली प्रभावी पत्रकारिता से जुड़ी होती हैं। आपने लोगों को जागरूक किया है, लोगों को जोड़ने का काम किया है और कभी-कभी लोगों को झकझोरने का काम किया है। 
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उन्होंने आगे कहा, आज राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा केवल सीमाओं पर ही नहीं है, बल्कि साइबर और सोशल क्षेत्रों में भी बहुत बड़ी चुनौती के रूप में हमारे सामने है। इसलिए पत्रकारिता एक वॉचडॉग बनकर काम कर रही है। पत्रकारिता केवल एक पेशा नहीं है, बल्कि एक राष्ट्रीय कर्तव्य भी है, जो न केवल हमें सूचना देती है, बल्कि हर समय हमें देश की सुरक्षा के प्रति सचेत और सजग भी रखती है और जागरूक भी बनाती है। 

राजनाथ सिंह ने कहा, आज का कार्यक्रम इसलिए भी खास है, क्योंकि यह उत्तराखंड में हो रहा है। उत्तराखंड से मेरा खास जुड़ाव रहा है। जब उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश दो राज्यों का विभाजन हुआ तो उस समय उत्तर प्रदेश का मैं मुख्यमंत्री था। मेरे मुख्यमंत्री रहते इसका विभाजन हुआ था। यह राज्य उस समय भारत के नक्शे पर आया था। तबसे लेकर आज तक मैंने इसे एक नई पहचान बनाते देखा है। कई मुख्यमंत्री हुए। पुष्कर सिंह धामी अब मुख्यमंत्री हैं। उत्तराखंड इन लोगों के नेतृत्व में भारत की आध्यात्मिक यात्रा को सहेजने में आगे रहा है। दुनिया इसे देवभूमि कहकर संबोधित करती है। यह दिव्य और दैवीय पहचान है। चार धामों का एक ही राज्य में होना चमत्कार है और ईश्वर की इस धरती पर महती कृपा है। यह भूमि तो देवभूमि है। पूरे उत्तराखंड में कुछ-कुछ दूरी पर आपको कोई न कोई मंदिर देखने को मिला। जब भाजपा की युवा इकाई में था, तब से यहां आ रहा हूं। किसी भी रास्ते से गुजरिए, कोई न कोई प्राचीन मंदिर आपको दिखेगा। यहां देवता भी आने को लालायित रहते हैं, आप इसी भूमि के निवासी हैं। उत्तराखंड पुण्य भूमि तो है ही, साथी ही यह सामरिक और सैन्य शक्ति का भी स्रोत है। आज के समय में जब देश को कई तरह की चुनौतियां का सामना करना पड़ रहा है, ऐसे में उत्तराखंड जैसे राज्यों की जिम्मेदारी स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है। यह पर्वतीय राज्य जरूर है, इसकी भूमिका सांस्कृतिक-आध्यात्मिक ही नहीं, बल्कि सामरिक रूप से भी है। 

Amar Ujala Samwad 2025: Rajnath Singh In Dehradun Operation Sindoor India Defense Strategy Know what he said
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह - फोटो : अमर उजाला
'हमने उनका धर्म पूछकर नहीं, उनका कर्म देखकर मारा'
उन्होंने कहा, उत्तराखंड हमें न सिर्फ मानसिक शांति की अनुभूति देता है, बल्कि वीरता का भी संदेश देता है। यहां के सपूतों ने देश के लिए सर्वस्व न्योछावर किया है। सेना की दो रेजीमेंट इस राज्य के दो क्षेत्रों पर आधारित हैं। देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ यहीं जन्मे थे। मैंने देश के गृह मंत्री के रूप में भी काम किया है। चाहे आंतरिक सुरक्षा की बात हो या सीमाओं पर सुरक्षा की बात हो, पिछले 11 वर्षों में प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने का काम किया है। हमने एटिट्यूड और एक्शन को बदला है। पहलगाम में आतंकियों ने जिस तरह धर्म पूछकर लोगों को निशाना बनाया, उसने देश को झकझोर दिया। उन्होंने धर्म पूछकर मारा, लेकिन हमने उनका धर्म पूछकर नहीं, उनका कर्म देखकर मारा। यह देश की सामाजिक एकता पर हुआ हमला था। धर्म पूछकर मारने के पीछे उनका उद्देश्य था भारत की सांस्कृतिक एकता को नुकसान पहुंचाना। हमने उनके आतंकी ढांचे को तबाह कर दिया। लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों के मुख्यालयों पर पहली बार किसी ने हमला किया है, तो वह भारत है। यह आतंकियों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई है। 

'मानव सभ्यता का सबसे बड़ा दुश्मन आतंकवाद, इंसानियत पर कलंक'
उन्होंने आगे कहा, आप सभी ने देखा होगा कि जब तक जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 लागू था, तब तक सभी कहते थे कि कश्मीर भारत में तो है, लेकिन वह भारत से इंटिग्रेट नहीं है। अब 370 हटने के बाद वह भारत से पूरी तरह इंटिग्रेट हो गया है। जम्मू-कश्मीर में लाखों पर्यटक आए। जमीनी स्तर पर वहां सुशासन दिख रहा है। जम्मू-कश्मीर को भारत का मस्तक कहा जाता है, जब यह मस्तक चमकने लगा तो पड़ोसी को चमक बर्दाश्त नहीं हुई और उसने आतंकी वारदात को अंजाम दिया। आतंकियों को तो हमने जवाब दे दिया, लेकिन इस तरह की घटना भविष्य में न हो, यह भारतीय सुरक्षा से जुड़ा अहम मुद्दा है। अब जनता के स्तर पर भी सतर्क होने का समय आ गया है। आतंकवाद मानवता का सबसे बड़ा अभिशाप है। मानवीय सभ्यता के सबसे अहम मूल्यों का यह दुश्मन है। आतंकवाद हमारे लोकतंत्र और सह-अस्तित्व के समक्ष बड़ा खतरा है। यह विकृत मानसिकता है। मानवता पर कलंक है। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई मानवता के मूलभूत मूल्यों की रक्षा की लड़ाई है। मानवता के सामने जितनी भी भयावह बीमारियां आईं, वह देर-सवेर खत्म हुई। आतंकवाद भी महामारी है, उसे मरना ही है। लेकिन इसे अपनी मौत मरने को नहीं छोड़ा जा सकता। यह चुनौती देता रहेगा। इसलिए आतंकवाद की समस्या का अब स्थायी समाधान बहुत आवश्यक है।

Amar Ujala Samwad 2025: Rajnath Singh In Dehradun Operation Sindoor India Defense Strategy Know what he said
राजनाथ सिंह - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
'आतंकवादी किसी भी देश का स्वतंत्रता सेनानी नहीं हो सकता' 
रक्षा मंत्री ने कहा, इतिहास ने यह बार-बार साबित किया है कि आतंकवाद का कितना भी बड़ा लक्ष्य हो, वह सफल नहीं हो सकता। यह सोचना भी कदापि उचित नहीं है कि कोई आतंकवादी किसी देश के लिए स्वतंत्रता सेनानी हो सकता है। 2016 में इस्लामाबाद में दक्षेस सम्मेलन में मैंने यही बात मजबूती से रखी थी। आतंकवाद की कोख से क्रांति नहीं, बर्बादी और नफरत ही पैदा होती है। हमने हमेशा देखा है कि पाकिस्तान जैसे देश आतंकवाद को समर्थन देते आए हैं। भारत की पहचान लोकतंत्र की जननी के रूप में, जबकि पाकिस्तान की पहचान आतंकवाद को जन्म देने वाले के रूप में हो रही है।

राजनाथ की दुनिया को दो टूक- पाकिस्तान को आतंक विरोधी समिति में रखना बिल्ली से दूध की रखवाली करवाने जैसा 
उन्होंने आगे कहा, हम आतंकियों को नहीं, बल्कि आतंकी ढांचे को भी पूरी तरह से खत्म करें, यह जरूरी है। पूरी दुनिया में पाकिस्तान को बेनकाब करना जरूरी हो गया है। यह बात पूरी दुनिया के सामने आ रही है कि पाकिस्तान को फंडिंग का मतलब है कि आतंकवाद को फंडिंग। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को पाकिस्तान को मिलने वाली विदेशी आर्थिक मदद को बंद करना होगा। आतंकवाद को खाद-पानी नहीं मिलना चाहिए। इसमें संयुक्त राष्ट्र की भूमिका अहम है, लेकिन उसके निर्णयों पर सवालिया निशान लग रहे हैं। पाकिस्तान को आतंकवाद विरोधी समिति में उपाध्यक्ष बनाया गया है। यह बिल्ली से दूध की रखवाली करवाने वाली बात है। इससे बड़ी दुर्भाग्य की बात क्या हो सकती है। यह वही पाकिस्तान है, जिसकी जमीन का इस्तेमाल वैश्विक आतंकवाद के लिए होता रहा है। यहां हाफिज सईद और मसूद अजहर जैसे आतंकी खुले आम घूमते हैं और जहर उगलते हैं। उसे आप वाइस चेयरमैन बनाते हैं। आतंकी के जनाजे में पाकिस्तानी फौज के अफसर फातिहा पढ़ते नजर आते हैं, यह क्रूर मजाक से कम नहीं है।

'पाकिस्तान के पास स्पष्ट दिशा नही, धंधा बन चुका आतंकवाद'
रक्षा मंत्री ने कहा, कोई भी इंसान अपनी जड़ों को उजाड़ना नहीं चाहता। पाकिस्तान के पास स्पष्ट दिशा नहीं है, इसलिए वहां आतंकवाद धंधा बन चुका है। हमेशा किसी न किसी बाहरी शक्ति के दबाव में वह आता रहा है। पाकिस्तान की पीठ पर आज एक नहीं, कई बैताल बैठे हैं जो उसे प्रगति की राह पर नहीं जाने दे रहे। भारत चाहता है कि आतंकवाद पाकिस्तान से नहीं, बल्कि पूरी दुनिया से खत्म हो। पाकिस्तान को हमारी सलाह है कि अगर आपसे आतंकवाद के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही है तो हम आपकी मदद करने को भी तैयार हैं। भारत की सेनाएं सरहर के इस पार और उस पार कार्रवाई करने में सक्षम हैं। ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान ने भी यह देख लिया। पाकिस्तान जिद्दी बच्चे की तरह यह मानता नहीं। दुनिया पाकिस्तान पर कूटनीतिक, रणनीतिक और आर्थिक दबाव बनाए।

Amar Ujala Samwad 2025: Rajnath Singh In Dehradun Operation Sindoor India Defense Strategy Know what he said
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह - फोटो : अमर उजाला
'हम रक्षा क्षेत्र में बन रहे आत्मनिर्भर, ऑपरेशन सिंदूर में हुआ स्वदेशी हथियारों का इस्तेमाल'
राजनाथ सिंह ने आगे कहा, भारत आज सिर्फ सीमाओं की रक्षा नहीं कर रहा, बल्कि ऐसी व्यवस्था खड़ी कर रहा है जो हमें सामरिक, आर्थिक और तकनीकी रूप से मजबूत बना रही है। पहले हम रक्षा उपकरणों के लिए विदेशों पर निर्भर रहे थे। आज हम गौरव से कह सकते हैं कि हम आत्मनिर्भर बन रहे हैं। ऑपरेशन सिंदूर में इस्तेमाल हुए बहुत से हथियार इस धरती पर भारतवासियों के हाथों से बने हैं। भारत के रक्षा क्षेत्र को मजबूती देना सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में रहा है। रक्षा निर्माण के क्षेत्र में हमारे पास इंडिजनाइज्ड लिस्ट है। ऐसी चीजों की पहचान कर ली गई हैं, जो विदेशों में बनती हैं। इन चीजों को अब किसी भी सूरत में आयात नहीं करेंगे, इन्हें भारत में ही बनाएंगे। रक्षा क्षेत्र के हमारे सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में भी लाइन रिप्लेसमेंट यूनिट्स में 5000 से ज्यादा चीजें भी भारत में ही बनेंगी। जब हम मेक इन इंडिया की तरफ बढ़ रहे हैं तो हमने स्वदेशी कंपनियों के हितों को भी ध्यान में रखा। सामान खरीदने के हमारे कुल बजट में से 75 फीसदी सामान हम स्वदेशी कंपनियों से ही खरीदेंगे। रियल टाइम डिफेंस एक्सपो हमने दुनिया को ऑपरेशन सिंदूर में दिखा दिया।

'वह दिन दूर नहीं, जब पूरा कश्मीर एक होगा'
रक्षा मंत्री ने कहा, पाकिस्तान के लाख चाहने के बावजूद वह कश्मीर में विकास का पहिया नहीं रोक पाया। हम वहां रेल परियोजनाओं को साकार होते देख रहे हैं। हाल ही में प्रधानमंत्री ने ऐसी एक परियोजना का लोकार्पण किया। जैसे ही यह सपना साकार हुआ है, वैसे ही यह दिन भी दूर नहीं कि जब  पूरा कश्मीर एक होगा और आप लोग अपनी आंखों से देखेंगे, मुझे पक्का विश्वास है। अब यह कैसे होगा, इस पर मैं कुछ विचार व्यक्त नहीं होगा। जो खाई कश्मीर में 1947 के बंटवारे ने बनाई थी, उस पर विकास का पुल बनेगा। पीओके हमारे साथ होगा और कहेगा कि मैं भी तो भारत हूं। आज के दौर में जब भी कोई युद्ध या झड़प होती है, तब युद्ध सिर्फ सिर्फ सैनिक नहीं लड़ते, सिर्फ गोलियों-तोपों से लड़ाई नहीं होती। इन्फॉर्मेशन वारफेयर भी होता है। हमने पाकिस्तान के कई फर्जी वीडियो देखे। इससे कुछ लोग दिग्भ्रमित भी हुए। ऑपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ है, यह स्थगित है। सैन्य कार्रवाई भले ही रोक दी गई हो, इन्फॉर्मेशन वॉरफेयर जारी है। हम सोशल सोल्जर बनें, झूठ को पहचानें, अफवाहों को रोकें और जागरूकता फैलाएं। सबसे आगे बने रहने की दौड़ न हो, सबसे सही होने की दौड़ हो। कुछ लोग वेरिफाइड होने की जगह वायरल होने को मानक मान लेते हैं। आपके हाथों में जो स्मार्टफोन है, वह सिर्फ आपका मनोरंजन नहीं करता, वह आपकी जिम्मेदारी भी है।



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ये हस्तियां भी हुईं शामिल
संवाद में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, मशहूर कमेंटेटर व पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह, बॉलीवुड अभिनेता सुनील शेट्टी, परमवीर चक्र विजेता योगेंद्र सिंह यादव, सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर लखन रावत, नीतू बिष्ट व तान्या मित्तल, मोटिवेशनल स्पीकर गौर गोपाल दास, आध्यात्मिक गुरु स्वामी कैलाशानंद गिरी, मिराई एसेट के वाइस चेयरमैन व सीईओ स्वरूप मोहंती, वेंचर कैटलिस्ट डॉ. अपूर्व रंजन शर्मा शामिल हुए। शिशु मृत्यु दर कम करने के लिए देश-विदेश में ख्याति प्राप्त डॉ. अभय बंग भी कार्यक्रम में शामिल हुए। 
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