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Amar Ujala Samvad: जीवन में खुश रहना जरूरी, अमर उजाला संवाद में बोले आध्यात्मिक गुरु नित्यानंद चरण दास
Mon, 02 Sep 2024 10:12 PM IST
बशु जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुरुग्राम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुरुग्राम
Published by: बशु जैन
Updated Mon, 02 Sep 2024 10:12 PM IST
सार
अमर उजाला संवाद हरियाणा के मंच पर आध्यात्मिक गुरु नित्यानंद चरण दास पहुंचे। उन्होंने हरे रामा-हरे कृष्णा से अपने संबोधन की शुरुआत की। कामयाबी की राह विषय पर उन्होंने अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि बीते 20 साल में सफलता की परिभाषा बदल गई है। सफलता के लिए जीवन में खुश रहना जरूरी है।
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नित्यानंद चरण दास
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
अमर उजाला संवाद हरियाणा के मंच पर आध्यात्मिक गुरु नित्यानंद चरण दास पहुंचे। उन्होंने हरे रामा-हरे कृष्णा से अपने संबोधन की शुरुआत की। कामयाबी की राह विषय पर उन्होंने अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि बीते 20 साल में सफलता की परिभाषा बदल गई है। किस चीज को हम कामयाबी और सफलता मानते हैं। सबकी सफलता की परिभाषा अलग है। पहले सफलता चरित्र से मानी जाती थी। अब सफलता की परिभाषा पर्सनिलटी से मानी जाती है। आप कैसे दिखते हैं, कैसा पहनते हैं, चाहें आपने किसी को धोखा ही क्यों न दिया हाे। कैसे आप बाहरी तरीके से सफलता अर्जित करते हैं।
कुछ साल पहले विनम्र, दया, करुणा, आत्मविश्वास को सफलता माना जाता था। हम जब फोन खरीदते हैं तो उसका मैन्युअल दिया जाता है। इससे हम गैजेट्स के बारे में पूरी जानकारी मिलती है। ऐसे ही मनुष्य को भी शास्त्र रूपी मैन्युअल दिए गए हैं। इनके अनुसार सफलता की परिभाषा है कि लाइफ इज प्रिपरेशन, डेथ इन एग्जामिनेशन। मनुष्य जीवन की सफलता का अर्थ है अंते: नारायण स्मृति। मतलब हम ऐसे जीवन जिएं कि हमें अंत में भगवान का स्मरण हो पाए। अगर वह हुआ तो मानिए मनुष्य जीवन सफल हुआ है।
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कुछ साल पहले विनम्र, दया, करुणा, आत्मविश्वास को सफलता माना जाता था। हम जब फोन खरीदते हैं तो उसका मैन्युअल दिया जाता है। इससे हम गैजेट्स के बारे में पूरी जानकारी मिलती है। ऐसे ही मनुष्य को भी शास्त्र रूपी मैन्युअल दिए गए हैं। इनके अनुसार सफलता की परिभाषा है कि लाइफ इज प्रिपरेशन, डेथ इन एग्जामिनेशन। मनुष्य जीवन की सफलता का अर्थ है अंते: नारायण स्मृति। मतलब हम ऐसे जीवन जिएं कि हमें अंत में भगवान का स्मरण हो पाए। अगर वह हुआ तो मानिए मनुष्य जीवन सफल हुआ है।
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नित्यानंद चरण दास
- फोटो : अमर उजाला
आध्यात्मिक गुरु नित्यानंद चरण दास ने कहा कि मनुष्य के पास ही यह सुविधा है कि जितने हम कष्ट भोगते हैं, सुख के लिए प्रयास करते हैं, उससे कैसे बचा जाए। हम सबका जीवन में लक्ष्य क्या है कि सुखी रह सकें। पूरे विश्व में दस लाख से ज्यादा लोग हर साल आत्महत्या करते हैं। इनकी संख्या आतंकवादी हमलों में मरने वालों से ज्यादा है। जो लोग खुद को मार रहे हैं, उनकी संख्या उनसे ज्यादा है, जिन्हें दूसरे मार रहे हैं। आत्महत्या या युद्ध की खबर प्रमुखता से पढ़ी जाती है, लेकिन मानसिक रोग की वजह से आत्महत्या की बात कोई नहीं कर रहा। अमेरिका में 85 फीसदी लोगों को कोई न कोई मानसिक रोग है।
अगर हम विदेश सभ्यता अपनाएंगे तो उसके साथ दूसरा पहलू भी आएगा, उसकी बुराइयां भी आएंगी। वहां तो डॉग साइकेट्रिस्ट भी होते हैं। कुत्ते वहां ठीक थे, लेकिन इंसानों के साथ रहकर उनकी भी हालत खराब हो गई। पश्चिम के लोग भारत का रुख कर रहे हैं। इतनी उपलब्धि के बाद भी वो खुश नहीं हैं। तो कुछ तो गलत कर रहे होंगे वो। अन्ते नारायण स्मृति...।
उन्होंने कहा कि हम जो भी कुछ करें खुश तो रह पाएं। जीवन में खुश रहना जरूरी है। गीता में भगवान कृष्ण कहते हैं कि हम शरीर नहीं आत्मा हैं। हम खुशी चाहते हैं, लेकिन हम क्यों नहीं इसे पा रहे हैं। क्योंकि हम शरीर के लिए सब कुछ कर रहे हैं, लेकिन आत्मा के लिए कुछ नहीं कर रहे हैं। आत्मा का तत्व अध्यात्म है।
अगर हम विदेश सभ्यता अपनाएंगे तो उसके साथ दूसरा पहलू भी आएगा, उसकी बुराइयां भी आएंगी। वहां तो डॉग साइकेट्रिस्ट भी होते हैं। कुत्ते वहां ठीक थे, लेकिन इंसानों के साथ रहकर उनकी भी हालत खराब हो गई। पश्चिम के लोग भारत का रुख कर रहे हैं। इतनी उपलब्धि के बाद भी वो खुश नहीं हैं। तो कुछ तो गलत कर रहे होंगे वो। अन्ते नारायण स्मृति...।
उन्होंने कहा कि हम जो भी कुछ करें खुश तो रह पाएं। जीवन में खुश रहना जरूरी है। गीता में भगवान कृष्ण कहते हैं कि हम शरीर नहीं आत्मा हैं। हम खुशी चाहते हैं, लेकिन हम क्यों नहीं इसे पा रहे हैं। क्योंकि हम शरीर के लिए सब कुछ कर रहे हैं, लेकिन आत्मा के लिए कुछ नहीं कर रहे हैं। आत्मा का तत्व अध्यात्म है।
सफलता के पांच प्वाइंट
आध्यात्मिक गुरु नित्यानंद चरण दास ने कहा कि मृत्यु के बाद व्यक्ति वहां जाता है, अंत समय में जैसै उसके विचार होते हैं। हम अपने प्राकृतिक वातावरण से दूर हैं, इसलिए परेशान हैं। प्राकृतिक वातावरण ही अध्यात्म है। हम रोज कुछ समय निकालकर भगवान का स्मरण करें। सत्संग करें। सत्संग से विवेक मिलता है।
उन्होंने कहा कि आज के दौर में लोग आत्मा पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। हम सफलता के नाम पर बहुत कुछ कर रहे हैं, लेकिन अध्यात्म के लिए कुछ नहीं कर रहे हैं। अगर अध्यात्म रहेगा तो खुश रहेंगे। गीता में सफलता के पांच प्वाइंट है। पहला व्यक्ति, दूसरा स्थान, तीसरा प्रयास, चौथा भाग्य और पांचवां भगवान पर भरोसा। अगर भाग्य हमारे पक्ष में नहीं है, लेकिन भगवान पर भरोसा है तो हम लक्ष्य पा सकेंगे। अगर भगवान पर भरोसा होगा तो हमें भाग्य से ज्यादा मिलेगा। इसके लिए हम प्रयास करें और भगवान को समय दें। तभी हर कार्य की सफलता मानी जाएगी।