पोल: पाठकों ने माना, सोशल मीडिया के जरिये चुनावों को किया जा सकता है प्रभावित
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केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कैंब्रिज एनालिटिका से कांग्रेस के संबंधों को लेकर पार्टी को आड़े हाथ लिया था। बृहस्पतिवार को नई दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था कि पिछले साल अक्तूबर और नवंबर में कांग्रेस द्वारा इस कंपनी की सेवाएं लेने के संबंध में मीडिया में खूब चर्चा हुई लेकिन कांग्रेस चुप्पी साधे रही। अब पांच महीने बाद मामला खुलने पर इससे भाग रही है। कांग्रेस इस संबंध को झूठला नहीं सकती क्योंकि इसके सबूत मौजूद हैं। रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस पर सोशल मीडिया के जरिए 2019 के चुनावों को प्रभावित करने के गंभीर आरोप लगाए थे।
इसके तुरंत बाद कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने उनके आरोपों पर जवाब दिया। रणदीप सुरजेवाला ने कहा था कि बीजेपी झूठी खबर बनाने वाली फैक्ट्री है जिसने एक और झूठ पैदा किया है। उन्होंने कहा कि फर्जी बयान, प्रेस कॉन्फ्रेंस और एजेंडे से बीजेपी का चरित्र पता लगता है। कांग्रेस प्रवक्ता ने फेसबुक लीक मामले पर आगे कहा था कि कांग्रेस और पार्टी अध्यक्ष ने कैंब्रिज एनालिटका नाम की किसी कंपनी को नियुक्त नहीं किया। यह फर्जी एजेंडा फैलाया जा रहा है और रविशंकर प्रसाद सफेद झूठ बोल रहे हैं। उन्होंने कहा था कि ब्रिटिश एजेंसी कैम्ब्रिज एनालिटिका की क्लाइंट कांग्रेस नहीं बल्कि बीजेपी है। सुरजेवाला ने एजेंसी की वेबसाइट से मिली जानकारियों के आधार पर यह भी दावा किया है कि 2010 के बिहार चुनाव में बीजेपी ने इस एजेंसी की सेवाएं ली थीं। उस समय बीजेपी और जेडीयू के साथ गठबंधन था।
वहीं फेसबुक सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए गए एक इंटरव्यू में चुनाव को प्रभावित करने में फेसबुक के दुरुपयोग को स्वीकार किया। उन्होंने चर्चा के दौरान कहा कि पहली बार इस एआई टूल का इस्तेमाल 2017 में फ्रांस के चुनाव में किया गया था। इस नए टूल के जरिए हमने 30 हजार फर्जी एकाउंटों का पता लगाया है, जो संभवत: रूसी स्रोतों से जुड़े हुए हैं।
इसी विषय पर अमर उजाला डॉट कॉम ने ऑनलाइन पोल में अपने पाठकों से सवाल पूछा था 'क्या सोशल मीडिया के जरिये चुनावों को प्रभावित किया जा सकता है?'
पोल के जवाब में हमें कुल 2,320 वोट मिले। इनमें 85.47 फीसदी (1,983 वोट) पाठकों ने माना कि सोशल मीडिया के जरिये चुनावों को प्रभावित किया जा सकता है, जबकि 14.53 फीसदी (337 वोट) पाठकों ने सवाल के जवाब में असहमति जताते हुए कहा कि सोशल मीडिया के जरिये चुनावों को प्रभावित नहीं किया जा सकता है।