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अमर उजाला पोल: नौकरी में आरक्षण की मांग के लिए जनजीवन अस्त-वयस्त करना सही नहीं
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 10 Aug 2018 08:31 PM IST
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सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण की मांग को लेकर मराठा संगठनों द्वारा आज बुलाए गए महाराष्ट्र बंद के मद्देनजर व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। मराठा संगठनों के विरोध प्रदर्शन के चलते पिछले महीने राज्य के विभिन्न हिस्सों में बड़े पैमाने पर हिंसा और आगजनी हुई थी। ऐसे में जान लीजिए कि मराठा समुदाय की कोटा की मांग कितनी पुरानी है?
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1980 के दशक में, मराठा समुदाय जातिगत कोटा के खिलाफ थे और ‘पिछड़ा’ के रूप में पहचान बनाना नहीं चाहते थे। लेकिन नब्बे के दशक में मराठा समुदायों ने नौकरियों और शिक्षा में कोटा की मांग को समर्थन दिया। पिछले 10 साल में, यह धारणा प्रबल हुई कि एससी/एसटी के अलावा, ओबीसी श्रेणी को भी फायदा हुआ है। मराठा कुनबी उपजाति ओबीसी श्रेणी में शामिल है।
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इस विषय पर अमर उजाला डॉट.कॉम ने पोल कराया और पाठकों से सवाल पूछा कि 'क्या नौकरी में आरक्षण की मांग के लिए जनजीवन अस्त-वयस्त करना सही है?' सवाल के जवाब में पाठकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
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कुल 3851 पाठकों ने पोल में हिस्सा लिया। 21.27 फीसदी (819 वोट) पाठकों ने माना कि नौकरी में आरक्षण की मांग के लिए जनजीवन अस्त-वयस्त करना सही। जबकि 78.73 फीसदी (3032 वोट) पाठकों ने माना कि नौकरी में आरक्षण की मांग के लिए जनजीवन अस्त-वयस्त करना सही नहीं।