{"_id":"58c9d2874f1c1b4f7d32a7e2","slug":"amar-ujala-foundation-s-campaign","type":"story","status":"publish","title_hn":"अमर उजाला पहल, अमित को नई जिंदगी का उजाला मुबारक हो","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
अमर उजाला पहल, अमित को नई जिंदगी का उजाला मुबारक हो
amarujala.com- Presented by: संदीप भट्ट
Updated Thu, 16 Mar 2017 06:40 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला फाउंडेशन का एक और अभियान सफलता के साथ पूरा हो गया है। ये अभियान था किडनी ट्रांसप्लांट करा कर 20 वर्षीय युवा अमित की जिंदगी बचाने का। आर्थिक रूप से कमजोर अमित को ऑपरेशन के लिए साढ़े आठ लाख रुपये की जरूरत थी, जिसमें फाउंडेशन की मदद से सवा सात लाख रुपये की बड़ी मदद उसको मिली है।
अमित का किडनी ट्रांसप्लांट 11 मार्च को दिल्ली के प्रतिष्ठित सर गंगाराम हास्पिटल में डॉ. एच जौहरी, डॉ. सुधीर चड्ढा, डॉ. विपिन त्यागी, डॉ. मृणाल पावा की टीम ने अमित के किडनी ट्रांसप्लांट का सफल ऑपरेशन किया। अमित और उसे किडनी देने वाली उसकी मां अब पूरी तरह स्वस्थ हैं। अस्पताल में एक पखवाड़े तक रुकने के बाद दोनों को छुट्टी दे दी जाएगी। ऑपरेशन से चार दिन पहले ही दोनों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
फरवरी में अमित के पिता ओंकार सिंह और उसकी मां रवींद्री देवी किडनी ट्रांसप्लांट कराने के लिए जरूरी आर्थिक मदद के लिए भटक रहे थे। कलेक्ट्रेट में अमर उजाला संवाददाता से उनकी मुलाकात हुई तो खबर प्रकाशित होने के साथ ही मदद की बात आगे बढ़ी।
विज्ञापन
अमर उजाला फाउंडेशन ने अमित की मदद करने का बीड़ा उठाया। फाउंडेशन ने सबसे पहले 30 हजार रुपये की मदद की। इस मदद के साथ ही आम जनता से मदद की अपील की गई। देखते देखते ही मददगार आगे आए। कुछ ही दिनों में साढ़े तीन लाख रुपये के चेक एकत्र हो गए।
अमित के पिता ओंकार सिंह को उनके ही गांव सूरजमल में 2 मार्च को साढ़े तीन लाख रुपये के चेक दिए गए। इसके बाद एकत्र हुए 3 लाख 12502 रुपये के चेक 15 मार्च बुधवार को दिए गए। बुधवार को ही शाम तक 56 हजार रुपये के चेक और एकत्र हुए हैं। इस तरह से फाउंडेशन ने अमित की मदद के लिए लगभग 7 लाख 25 हजार रुपये एकत्र कर पीड़ित परिजनों की मदद की और अमित की जिंदगी बचाने में अहम भूमिका अदा की।
भर्ती में पता चला किडनी की बीमारी का
अलीगढ़। खैर के गांव सूरजमल निवासी 20 वर्षीय अमित को किडनी खराब होने का पता उस वक्त चला जब फौज की भर्ती में दौड़ के दौरान अचानक उसका बीपी बढ़ गया। फौजी अफसरों ने कहा कि वह अपना मेडिकल ट्रीटमेंट कराए। जांच कराने पर पता चला कि अमित की दोनों किडनी खराब हो गई हैं। कुछ ही दिनों में अमित डायलिसिस पर आ गया। सर गंगाराम हास्पिटल में उसका इलाज शुरू हो गया। वहीं पर अमित की मां और उसकी किडनी का मिलान कराया गया। जिसमें ब्लड ग्रुप सहित हर चीज मिल गई। तय हुआ और उसके बाद ऑपरेशन कर मां की किडनी को बेटे के शरीर में प्रत्यारोपित कर उसकी जिंदगी बचाई गई।
''अमर उजाला फाउंडेशन ने हमारे बेटे अमित की जिंदगी बचाने के लिए बहुत बड़ी मदद की है। ऑपरेशन के लिए साढ़े आठ लाख रुपये की जरूरत थी फाउंडेशन ने सवा सात लाख रुपये की मदद की है। ये बहुत बड़ी मदद है।''
-ओंकार सिंह, अमित के पिता
विज्ञापन
अमित का किडनी ट्रांसप्लांट 11 मार्च को दिल्ली के प्रतिष्ठित सर गंगाराम हास्पिटल में डॉ. एच जौहरी, डॉ. सुधीर चड्ढा, डॉ. विपिन त्यागी, डॉ. मृणाल पावा की टीम ने अमित के किडनी ट्रांसप्लांट का सफल ऑपरेशन किया। अमित और उसे किडनी देने वाली उसकी मां अब पूरी तरह स्वस्थ हैं। अस्पताल में एक पखवाड़े तक रुकने के बाद दोनों को छुट्टी दे दी जाएगी। ऑपरेशन से चार दिन पहले ही दोनों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
विज्ञापन
फरवरी में अमित के पिता ओंकार सिंह और उसकी मां रवींद्री देवी किडनी ट्रांसप्लांट कराने के लिए जरूरी आर्थिक मदद के लिए भटक रहे थे। कलेक्ट्रेट में अमर उजाला संवाददाता से उनकी मुलाकात हुई तो खबर प्रकाशित होने के साथ ही मदद की बात आगे बढ़ी।
विज्ञापन
अमर उजाला फाउंडेशन ने अमित की मदद करने का बीड़ा उठाया। फाउंडेशन ने सबसे पहले 30 हजार रुपये की मदद की। इस मदद के साथ ही आम जनता से मदद की अपील की गई। देखते देखते ही मददगार आगे आए। कुछ ही दिनों में साढ़े तीन लाख रुपये के चेक एकत्र हो गए।
अमित के पिता ओंकार सिंह को उनके ही गांव सूरजमल में 2 मार्च को साढ़े तीन लाख रुपये के चेक दिए गए। इसके बाद एकत्र हुए 3 लाख 12502 रुपये के चेक 15 मार्च बुधवार को दिए गए। बुधवार को ही शाम तक 56 हजार रुपये के चेक और एकत्र हुए हैं। इस तरह से फाउंडेशन ने अमित की मदद के लिए लगभग 7 लाख 25 हजार रुपये एकत्र कर पीड़ित परिजनों की मदद की और अमित की जिंदगी बचाने में अहम भूमिका अदा की।
भर्ती में पता चला किडनी की बीमारी का
अलीगढ़। खैर के गांव सूरजमल निवासी 20 वर्षीय अमित को किडनी खराब होने का पता उस वक्त चला जब फौज की भर्ती में दौड़ के दौरान अचानक उसका बीपी बढ़ गया। फौजी अफसरों ने कहा कि वह अपना मेडिकल ट्रीटमेंट कराए। जांच कराने पर पता चला कि अमित की दोनों किडनी खराब हो गई हैं। कुछ ही दिनों में अमित डायलिसिस पर आ गया। सर गंगाराम हास्पिटल में उसका इलाज शुरू हो गया। वहीं पर अमित की मां और उसकी किडनी का मिलान कराया गया। जिसमें ब्लड ग्रुप सहित हर चीज मिल गई। तय हुआ और उसके बाद ऑपरेशन कर मां की किडनी को बेटे के शरीर में प्रत्यारोपित कर उसकी जिंदगी बचाई गई।
''अमर उजाला फाउंडेशन ने हमारे बेटे अमित की जिंदगी बचाने के लिए बहुत बड़ी मदद की है। ऑपरेशन के लिए साढ़े आठ लाख रुपये की जरूरत थी फाउंडेशन ने सवा सात लाख रुपये की मदद की है। ये बहुत बड़ी मदद है।''
-ओंकार सिंह, अमित के पिता