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वर्मा-अस्थाना के झगड़े से सीबीआई की छवि को पहुंचा काफी नुकसान
Tue, 08 Jan 2019 08:56 PM IST
Avdhesh Kumar
भाषा, नई दिल्ली
भाषा, नई दिल्ली
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Tue, 08 Jan 2019 08:56 PM IST
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Alok Verma, Rakesh Asthana
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सीबीआई के दो शीर्ष अधिकारियों निदेशक आलोक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के बीच अभूतपूर्व झगड़े से राष्ट्रीय जांच एजेंसी की छवि को काफी नुकसान पहुंचा है। दोनों के बीच झगड़ा 2017 में तब शुरू हुआ था जब वर्मा ने कुछ अधिकारियों को एजेंसी में शामिल करने की सिफारिश की जबकि अस्थाना ने इस पर आपत्ति जताई थी।
उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को वर्मा को छुट्टी पर भेजने और उनकी शक्तियां वापस लेने के केंद्र के फैसले को रद्द कर उन्हें पुन: बहाल कर दिया। इसके साथ ही अधिकारियों ने एजेंसी के दो शीर्ष अधिकारियों के बीच के तनावपूर्ण दिनों को याद किया।
दिल्ली पुलिस के पूर्व आयुक्त वर्मा ने 2017 में दिल्ली पुलिस के कुछ अधिकारियों को एजेंसी में शामिल करने की सिफारिश की थी लेकिन 1984 बैच के गुजरात कैडर के अधिकारी अस्थाना ने इस पर आपत्ति जताई। अस्थाना को उस साल अक्टूबर में सीबीआई का विशेष निदेशक बनाया गया था।
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अधिकारियों ने बताया कि दोनों अधिकारियों के बीच तनावपूर्ण संबंधों की शुरुआत यहीं से हुई। दोनों ने एक-दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। अस्थाना को 23 अक्टूबर 2017 को विशेष निदेशक बनाए जाने के साथ ही उनके और वर्मा के बीच दिक्कतें सार्वजनिक रूप से सामने आई।
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उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को वर्मा को छुट्टी पर भेजने और उनकी शक्तियां वापस लेने के केंद्र के फैसले को रद्द कर उन्हें पुन: बहाल कर दिया। इसके साथ ही अधिकारियों ने एजेंसी के दो शीर्ष अधिकारियों के बीच के तनावपूर्ण दिनों को याद किया।
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दिल्ली पुलिस के पूर्व आयुक्त वर्मा ने 2017 में दिल्ली पुलिस के कुछ अधिकारियों को एजेंसी में शामिल करने की सिफारिश की थी लेकिन 1984 बैच के गुजरात कैडर के अधिकारी अस्थाना ने इस पर आपत्ति जताई। अस्थाना को उस साल अक्टूबर में सीबीआई का विशेष निदेशक बनाया गया था।
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अधिकारियों ने बताया कि दोनों अधिकारियों के बीच तनावपूर्ण संबंधों की शुरुआत यहीं से हुई। दोनों ने एक-दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। अस्थाना को 23 अक्टूबर 2017 को विशेष निदेशक बनाए जाने के साथ ही उनके और वर्मा के बीच दिक्कतें सार्वजनिक रूप से सामने आई।
आयोग को अस्थाना की पदोन्नति पर फैसला लेना था
वर्मा ने अपने कार्यकाल के दौरान कई मामले देखे जिनमें से ‘‘कम से कम आधा दर्जन’’ मामलों में अस्थाना की कथित भूमिका थी। उन्होंने केंद्रीय सतर्कता आयोग की बैठक में भी इन मामलों को उठाया। आयोग को अस्थाना की पदोन्नति पर फैसला लेना था। उन्हें विशेष निदेशक के पद पर नियुक्त कर एजेंसी में नंबर दो का दर्जा दिया जाना था।
इन मामलों में गुजरात स्थित स्टर्लिंग बायोटेक से अस्थाना समेत कई अधिकारियों को कथित रुपये देने की जानकारियां शामिल हैं। बैंक डिफॉल्ट के मामलों का सामना कर रही कंपनी से जुड़े ठिकानों पर तलाशी के दौरान बरामद एक डायरी से ये जानकारियां मिलीं। इसके प्रोमोटर्स अब भी फरार हैं।
आयोग ने इस पर संज्ञान लिया लेकिन वर्मा की आपत्तियों को दरकिनार करते हुए सर्वसम्मति से अस्थाना को विशेष निदेशक के पद पर पदोन्नति दे दी। इसके खिलाफ एक याचिका उच्चतम न्यायालय में खारिज कर दी गई।
गत वर्ष जुलाई में सीवीसी ने कई अधिकारियों की पदोन्नति पर फैसला लेने के लिए अस्थाना को बुलाया था क्योंकि वर्मा देश से बाहर थे लेकिन सीबीआई निदेशक ने यह कहते हुए अनुमति देने से इनकार कर दिया कि उनकी गैरमौजूदगी में अस्थाना उनका प्रतिनिधित्व नहीं कर सकते।
इस बीच, विजय माल्या बैंक धोखाधड़ी मामला, अगस्ता वेस्टलैंड घूसखोरी कांड, पूर्व सीबीआई निदेशक से जुड़े मोइन कुरैशी रिश्वत मामले जैसे संवेदनशील मामलों की जांच कर रहे विशेष जांच दल का नेतृत्व कर रहे अस्थाना ने जुलाई में ही सरकार का रुख कर आरोप लगाया कि एक आरोपी सतीश बाबू सना की मदद करने के लिए वर्मा को दो करोड़ रुपये की रिश्वत दी गई। सना मोइन कुरैशी से जुड़े रिश्वत मामले में जांच के घेरे में है।
इन मामलों में गुजरात स्थित स्टर्लिंग बायोटेक से अस्थाना समेत कई अधिकारियों को कथित रुपये देने की जानकारियां शामिल हैं। बैंक डिफॉल्ट के मामलों का सामना कर रही कंपनी से जुड़े ठिकानों पर तलाशी के दौरान बरामद एक डायरी से ये जानकारियां मिलीं। इसके प्रोमोटर्स अब भी फरार हैं।
आयोग ने इस पर संज्ञान लिया लेकिन वर्मा की आपत्तियों को दरकिनार करते हुए सर्वसम्मति से अस्थाना को विशेष निदेशक के पद पर पदोन्नति दे दी। इसके खिलाफ एक याचिका उच्चतम न्यायालय में खारिज कर दी गई।
गत वर्ष जुलाई में सीवीसी ने कई अधिकारियों की पदोन्नति पर फैसला लेने के लिए अस्थाना को बुलाया था क्योंकि वर्मा देश से बाहर थे लेकिन सीबीआई निदेशक ने यह कहते हुए अनुमति देने से इनकार कर दिया कि उनकी गैरमौजूदगी में अस्थाना उनका प्रतिनिधित्व नहीं कर सकते।
इस बीच, विजय माल्या बैंक धोखाधड़ी मामला, अगस्ता वेस्टलैंड घूसखोरी कांड, पूर्व सीबीआई निदेशक से जुड़े मोइन कुरैशी रिश्वत मामले जैसे संवेदनशील मामलों की जांच कर रहे विशेष जांच दल का नेतृत्व कर रहे अस्थाना ने जुलाई में ही सरकार का रुख कर आरोप लगाया कि एक आरोपी सतीश बाबू सना की मदद करने के लिए वर्मा को दो करोड़ रुपये की रिश्वत दी गई। सना मोइन कुरैशी से जुड़े रिश्वत मामले में जांच के घेरे में है।
दोनों भाई अस्थाना को जानते थे और अस्थाना ने दोनों बंधुओं को भुगतान की जानकारियां भी दी
अक्टूबर 2018 में सना ने एक मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान में अस्थाना के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। अपने बयान में उसने आरोप लगाया कि दुबई में दो कारोबारी बंधुओं ने उसकी मदद के बदले में पांच करोड़ रुपये की रिश्वत देने की पेशकश दी थी। उसने दावा किया कि दोनों भाई अस्थाना को जानते थे और अस्थाना ने दोनों बंधुओं को भुगतान की जानकारियां भी दी।
निगरानी के दौरान सीबीआई ने व्हाट्सएप संदेशों, फोन इंटरसेप्ट और बैठकों की जानकारियां का खुलासा किया जिससे कथित तौर पर यह संकेत मिलता है कि अस्थाना इसमें शामिल थे। जब यह सब हो रहा था तो पूर्व मंत्री यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी और कार्यकर्ता वकील प्रशांत भूषण ने आलोक वर्मा से मुलाकात कर राफेल विमान सौदे की जांच की मांग की। अगले दिन सरकार के सूत्रों ने इस बैठक पर नाखुशी जताई।
इस बीच, एजेंसी ने 15 अक्टूबर 2018 को अस्थाना के खिलाफ एक प्राथमिकी दर्ज की और अगले दिन कथित बिचौलिए बंधुओं में से एक मनोज प्रसाद को गिरफ्तार किया। सूचना के आधार पर सीबीआई ने पांच दिन बाद 20 अक्टूबर को सना से जुड़े मामले के जांच अधिकारी देवेंद्र कुमार के अपने मुख्यालय में स्थित कार्यालय में तलाशी ली।
सना के ‘‘बयान को तोड़ मरोड़कर’’ पेश करने के आरोपों पर 22 अक्टूबर को कुमार को गिरफ्तार किया गया। उन्होंने अपने खिलाफ प्राथमिकी रद्द कराने की मांग को लेकर 23 अक्टूबर को दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया। उसी दिन सीवीसी ने एक रिपोर्ट भेजी जिसमें दोनों अधिकारियों वर्मा और अस्थाना की शक्तियां वापस लेने की सिफारिश की गई। इस सिफारिश के आधार पर सरकार ने देर रात उनकी शक्तियां वापस ले ली और उन्हें छुट्टी पर भेज दिया।
निगरानी के दौरान सीबीआई ने व्हाट्सएप संदेशों, फोन इंटरसेप्ट और बैठकों की जानकारियां का खुलासा किया जिससे कथित तौर पर यह संकेत मिलता है कि अस्थाना इसमें शामिल थे। जब यह सब हो रहा था तो पूर्व मंत्री यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी और कार्यकर्ता वकील प्रशांत भूषण ने आलोक वर्मा से मुलाकात कर राफेल विमान सौदे की जांच की मांग की। अगले दिन सरकार के सूत्रों ने इस बैठक पर नाखुशी जताई।
इस बीच, एजेंसी ने 15 अक्टूबर 2018 को अस्थाना के खिलाफ एक प्राथमिकी दर्ज की और अगले दिन कथित बिचौलिए बंधुओं में से एक मनोज प्रसाद को गिरफ्तार किया। सूचना के आधार पर सीबीआई ने पांच दिन बाद 20 अक्टूबर को सना से जुड़े मामले के जांच अधिकारी देवेंद्र कुमार के अपने मुख्यालय में स्थित कार्यालय में तलाशी ली।
सना के ‘‘बयान को तोड़ मरोड़कर’’ पेश करने के आरोपों पर 22 अक्टूबर को कुमार को गिरफ्तार किया गया। उन्होंने अपने खिलाफ प्राथमिकी रद्द कराने की मांग को लेकर 23 अक्टूबर को दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया। उसी दिन सीवीसी ने एक रिपोर्ट भेजी जिसमें दोनों अधिकारियों वर्मा और अस्थाना की शक्तियां वापस लेने की सिफारिश की गई। इस सिफारिश के आधार पर सरकार ने देर रात उनकी शक्तियां वापस ले ली और उन्हें छुट्टी पर भेज दिया।