जीएसटी दरों पर अपनी शर्तों के साथ लगभग सभी राज्य सहमत
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जीएसटी पर बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों के समर्थन में आने से केंद्र सरकार के हौसले बुलंद हैं। अब अधिकतर राज्यों का समर्थन केंद्र के पाले में हैं। लगभग सभी राज्य जीएसटी दरों पर सिद्धांतत: सहमत हैं लेकिन कुछ राज्यों की अपनी भी समस्याएं हैं। इनमें तमिलनाडु प्रमुख है।
सूत्रों के मुताबिक, तमिलनाडु सरकार ने 10 प्रमुख मांगें रखी हैं, जिनमें से 4 को तो पूरा कर लिया गया है। अन्य मांगों में सालाना 9,270 करोड़ रुपयेे के नुकसान की भरपाई प्रमुख है। राज्य सरकार का कहना है कि जीएसटी लागू होने से उन्हें हर साल 9,270 करोड़ रुपये का नुकसान होगा, जिसकी भरपाई की जाए।
मंगलवार को ही जीएसटी पर राज्यों के वित्त मंत्रियों की अधिकार प्राप्त समिति की बैठक हुई थी। इसमें केंद्रीय वित्त मंत्री, अरुण जेटली ने राज्यों को पांच साल तक राजस्व में हुए नुकसान की शत-प्रतिशत भरपाई का आश्वासन दिया था।
इसे अब जीएसटी के लिए तैयार संविधान संशोधन विधेयक के मसौदे में शामिल कर दिया गया है। पहले जो विधेयक बनाया गया था, उसमें तीन साल तक शत-प्रतिशत, चौथे साल 75 फीसदी और पांचवें साल 50 फीसदी क्षतिपूर्ति का प्रावधान था। इसके अलावा अंतरराज्यीय व्यापार पर एक फीसदी अतिरिक्त कर को हटाने की राज्यों को मांग को भी मान लिया गया है।
हालांकि मंगलवार की बैठक में रेवेन्यू न्यूट्रल रेट और जीएसटी रेट की कैपिंग पर सहमति नहीं बन पायी थी। बैठक के बाद केरल के वित्त मंत्री, थॉमस इसाक ने संवाददाताओं को बताया था कि रेवेन्यू न्यूट्रल रेट पर मुख्य आर्थिक सलाहकार, अरविंद सुब्रमण्यन की अगुवाई वाली कमेटी ने जो सिफारिश की है, उसे राज्यों ने नकार दिया।
उनका कहना था कि जीएसटी दर ऐसी हो, जिससे आम आदमी भी परेशान नहीं हो और सरकार का भी राजस्व नहीं घटे। सुब्रमण्यन की अध्यक्षता वाली कमेटी ने कहा है कि जीएसटी की दर 18 फीसदी से नीचे हो। इस पर केंद्रीय वित्त मंत्रालय भी लगभग सहमत है। लेकिन राज्यों का कहना है कि नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी (एनआईपीएफपी) की सिफारिशें उनके लिए ज्यादा मुफीद हैं।
जीएसटी पर वाम नेताओं से आज चर्चा करेंगे जेटली
केंद्र सरकार जीएसटी बिल की राह आसान बनाने में जुटी हुई है। जीएसटी के विरोधी माने जाने वाले वाम दलों के साथ जेटली गुरुवार को मंत्रणा करेंगे। जेटली ने बुधवार को अनौपचारिक तौर पर शरद पवार की पार्टी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेताओं से अनौपचारिक चर्चा की। बताया जा रहा है कि राकांपा का रुख सकारात्मक है।