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चिंताजनक: विकराल होती गर्मी, हर मिनट एक व्यक्ति की जान ले रहा जलवायु संकट; गरीब देशों को 6% आय का नुकसान

Fri, 31 Oct 2025 06:53 AM IST
शिवम गर्ग अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: शिवम गर्ग Updated Fri, 31 Oct 2025 06:53 AM IST
सार

जलवायु परिवर्तन अब वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल बन चुका है। द लैंसेट काउंटडाउन 2025 रिपोर्ट के मुताबिक, बढ़ती गर्मी से हर मिनट एक व्यक्ति की मौत हो रही है और गरीब देशों की आय का छह फीसदी हिस्सा खत्म हो गया है।

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Alarming Climate Crisis: Extreme Heat Killing One Person Every Minute, Poor Nations Losing 6% of Income
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Adobestock

विस्तार

दुनिया अब जलवायु संकट के सबसे खतरनाक दौर से गुजर रही है। द लैंसेट काउंटडाउन ऑन हेल्थ एंड क्लाइमेट चेंज 2025 की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, बढ़ती गर्मी के कारण हर मिनट एक व्यक्ति की मौत हो रही है। 2024 में ही अत्यधिक तापमान से 639 अरब घंटे के श्रम का नुकसान हुआ, जिससे गरीब देशों की राष्ट्रीय आय का लगभग छह फीसदी हिस्सा समाप्त हो गया।विकराल होती यह गर्मी सिर्फ पर्यावरण ही नहीं मानव स्वास्थ्य और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है।

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रिपोर्ट बताती है कि 1990 के दशक के बाद से गर्मी से होने वाली मौतों में 23 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। 2012 से 2021 के बीच हर साल औसतन 5.46 लाख लोग केवल गर्मी के कारण मारे गए। यानी हर एक मिनट में एक जान जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार यह सभी मौतें रोकी जा सकती हैं यदि समय रहते ठोस नीतिगत कदम उठाए जाएं। बीते चार वर्षों में औसतन हर व्यक्ति को साल में 19 दिन खतरनाक गर्मी झेलनी पड़ी, जिनमें से 16 दिन केवल मानवजनित ग्लोबल वार्मिंग के कारण थे। यही कारण है कि अत्यधिक गर्मी से काम करने की क्षमता घट रही है, जिससे गरीब और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं पर सीधा असर पड़ रहा है।
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रिपोर्ट के अनुसार कोयला, तेल और गैस जैसे जीवाश्म ईंधन न केवल धरती को गर्म कर रहे हैं, बल्कि प्रदूषण से हर साल लाखों लोगों की जान ले रहे हैं। वर्ष 2023 में दुनिया भर की सरकारों ने इन ईंधन उद्योगों को 956 अरब डॉलर की सीधी सब्सिडी दी यानी प्रतिदिन करीब 2.5 अरब डॉलर। यह विडंबना है कि 15 देशों ने जीवाश्म ईंधनों पर अपने स्वास्थ्य बजट से भी अधिक धन खर्च किया। इनमें सऊदी अरब, मिस्र, वेनेजुएला और अल्जीरिया प्रमुख हैं।
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जंगल की आग और खाद्य संकट ने बढ़ाई मुश्किलें
2024 में जंगल की आग ने सबसे ज्यादा कोहराम दक्षिणी यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के पश्चिमी तटीय इलाकों में मचाया। रिपोर्ट के अनुसार सबसे भयावह स्थिति ग्रीस, स्पेन और कनाडा में देखी गई, जहां लाखों हेक्टेयर जंगल जलकर राख हो गए और करीब 1.54 लाख लोगों की मौत या गंभीर स्वास्थ्य हानि दर्ज की गई। कनाडा में आग ने अब तक के इतिहास का सबसे बड़ा वन क्षेत्र करीब 1.8 करोड़ हेक्टेयर को तबाह कर दिया, जबकि ग्रीस में लगातार 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान ने आग पर काबू पाना लगभग असंभव बना दिया। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया में सूखे और तेज हवाओं के चलते हजारों लोग अपने घरों से बेघर हुए, जिससे जान-माल दोनों का भारी नुकसान हुआ।साल 2023 में ही 12.3 करोड़ अतिरिक्त लोग खाद्य असुरक्षा से जूझ रहे थे  यह संख्या 1981 से 2010 के औसत से कहीं अधिक है।

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