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अजमेर ब्लास्ट के आरोपी का योगी से कनेक्शन, गोरखनाथ आश्रम में हुई थी मुलाकात
amarujala.com:Presented by- राघवेंद्र मिश्र
Updated Fri, 24 Mar 2017 10:34 AM IST
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सीएम योगी आदित्यनाथ
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11 अक्टूबर 2007 को हुए अजमेर दरगाह ब्लास्ट मामले के आरोपियों और योगी आदित्यनाथ के बीच रिश्ते थे। इस केस के मुख्य दोषी सुनील जोशी (जिसकी अब मौत हो चुकी है) कि इस घटना से करीब एक साल पहले योगी आदित्यनाथ से मुलाकात हुई थी। वह उस समय गोरखपुर से सांसद थे और अब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं। बताते चलें कि अजमेर दरगाह ब्लास्ट में तीन लोगों की मौत हो गई थी और 15 लोग घायल हुए थे।
इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक राजस्थान एटीएस और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की जांच के मुताबिक, यह मीटिंग मार्च-अप्रैल 2006 में आदित्यनाथ के गोरखपुर स्थित घर पर हुई थी। एनआईए ने दावा किया था कि दिसंबर 2007 में मध्यप्रदेश के देवास में जब उसे जोशी का शव मिला था तो उसकी जेब में आदित्यनाथ का फोन नंबर मिला था।
इस केस से हाल ही में दोषमुक्त हुए असीमानंद के सहयोगी भरत मोहनलाल रत्नेश्वर ने एनआईए और जज के सामने बयान दिया था। कोर्ट के रिकॉर्ड के मुताबिक रत्नेश्वर ने कहा, 'मुझे और सुनील जोशी उर्फ मनोज को मार्च 2006 में असीमानंद ने टास्क दिया था। मनोज ने फोन पर मुझे सूचना दी कि असीमानंद ने झारखंड, आगरा, गोरखपुर और नागपुर में कुछ जरूरी काम के लिए जाने को कहा है। मैंन असीमानंद से बात की तो उन्होंने भी इसे कन्फर्म किया।'
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चार्जशीट के मुताबिक, रत्नेश्वर और जोशी इंदौर में मिले और चितरंजन के लिए रवाना हुए। वहां उनकी मुलाकात आरएसएस के जमतारा के जिला प्रचारक देवेंद्र गुप्ता से हुई और वे कार्यालय में ही रुके। वहां दो दिन रुकने के बाद वे आगरा पहुंचे, जहां उनकी मुलाकात आगरा ग्रामीण संघ से जुड़े राजेश्वर सिंह से हुई।
राजेश्वर साल 2015 में आगरा में 200 से ज्यादा मुस्लिमों के धर्मांतरण में मुख्य संदिग्ध के रूप में सामने आए थे। राजेश्वर दोनों को अपनी गाड़ी से गोरखपुर लेकर गए थे। इसके अगले दिन वे गोरखपुर पहुंचे और सांसद आदित्यनाथ से उनके आश्रम में मिले। राजेश्वर ने दोनों को असीमानंद के रिफरेंश पर मिलाया। मनोज ने आदित्यनाथ से अलग से मुलाकात की इच्छा जाहिर की थी, जिसपर उन्होंने शाम का टाइम दिया था।
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इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक राजस्थान एटीएस और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की जांच के मुताबिक, यह मीटिंग मार्च-अप्रैल 2006 में आदित्यनाथ के गोरखपुर स्थित घर पर हुई थी। एनआईए ने दावा किया था कि दिसंबर 2007 में मध्यप्रदेश के देवास में जब उसे जोशी का शव मिला था तो उसकी जेब में आदित्यनाथ का फोन नंबर मिला था।
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इस केस से हाल ही में दोषमुक्त हुए असीमानंद के सहयोगी भरत मोहनलाल रत्नेश्वर ने एनआईए और जज के सामने बयान दिया था। कोर्ट के रिकॉर्ड के मुताबिक रत्नेश्वर ने कहा, 'मुझे और सुनील जोशी उर्फ मनोज को मार्च 2006 में असीमानंद ने टास्क दिया था। मनोज ने फोन पर मुझे सूचना दी कि असीमानंद ने झारखंड, आगरा, गोरखपुर और नागपुर में कुछ जरूरी काम के लिए जाने को कहा है। मैंन असीमानंद से बात की तो उन्होंने भी इसे कन्फर्म किया।'
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चार्जशीट के मुताबिक, रत्नेश्वर और जोशी इंदौर में मिले और चितरंजन के लिए रवाना हुए। वहां उनकी मुलाकात आरएसएस के जमतारा के जिला प्रचारक देवेंद्र गुप्ता से हुई और वे कार्यालय में ही रुके। वहां दो दिन रुकने के बाद वे आगरा पहुंचे, जहां उनकी मुलाकात आगरा ग्रामीण संघ से जुड़े राजेश्वर सिंह से हुई।
राजेश्वर साल 2015 में आगरा में 200 से ज्यादा मुस्लिमों के धर्मांतरण में मुख्य संदिग्ध के रूप में सामने आए थे। राजेश्वर दोनों को अपनी गाड़ी से गोरखपुर लेकर गए थे। इसके अगले दिन वे गोरखपुर पहुंचे और सांसद आदित्यनाथ से उनके आश्रम में मिले। राजेश्वर ने दोनों को असीमानंद के रिफरेंश पर मिलाया। मनोज ने आदित्यनाथ से अलग से मुलाकात की इच्छा जाहिर की थी, जिसपर उन्होंने शाम का टाइम दिया था।
'जोशी ने योगी से की थी गुप्त बात'
सीएम योगी आदित्यनाथ
रत्नेश्वर ने अपने बयान में कहा है, 'हम आश्रम के गेस्ट हाउस में रुके थे और रात नौ बजे हम दोनों योगी आदित्यनाथ से उनके ड्राइंग रूप में मिलने पहुंचे। वहां मैं योगी से कुछ दूरी बनाकर था, लेकिन मनोज उनके बहुत करीब पहुंचकर कुछ बहुत ही गुप्त बात कर रहा था। इसके बाद हम वलसाड़ और इंदौर लौट आए। हमने असीमानंद को इस बारे में जानकारी दे दी थी।'
राजस्थान एटीएस ने इस केस में लोकेश शर्मा और देवेंद्र गुप्ता को गिरफ्तार सहति कुछ लोगों को गिरफ्तार किया और चार्जशीट 22 अक्टूबर 2010 को जमा किया। साल 2011 में यह केस एनआईए के पास चला गया।
राजस्थान एटीएस ने इस केस में लोकेश शर्मा और देवेंद्र गुप्ता को गिरफ्तार सहति कुछ लोगों को गिरफ्तार किया और चार्जशीट 22 अक्टूबर 2010 को जमा किया। साल 2011 में यह केस एनआईए के पास चला गया।