नया संसद भवन: NCP के बहिष्कार के बीच अजित पवार ने किया समर्थन, बोले- बढ़ती आबादी की वजह से यह देश की जरूरत
महाराष्ट्र के पूर्व उप मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की आबादी 135 करोड़ से अधिक हो चुकी है। बढ़ती आबादी के कारण उनका प्रतिनिधित्व करने वाले प्रतिनिधियों की संख्या भी बढ़ेगी। इसलिए मुझे लगता है कि देश को नए संसद भवन की जरूरत थी।
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राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता अजित पवार के सुर एक बार फिर बदले-बदले से नजर आ रहे हैं। एक ओर जहां एनसीपी ने तमाम विपक्षी पार्टियों की तरह देश के नए संसद भवन का बहिष्कार किया तो वहीं पार्टी के कद्दावर नेता ने संसद का समर्थन किया। सोमवार को उन्होंने कहा कि देश की बढ़ती जनसंख्या के कारण अब इसकी आवश्यकता महसूस हुई है।
पढ़िए, अजित पवार ने क्या कहा
महाराष्ट्र के पूर्व उप मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की आबादी 135 करोड़ से अधिक हो चुकी है। बढ़ती आबादी के कारण उनका प्रतिनिधित्व करने वाले प्रतिनिधियों की संख्या भी बढ़ेगी। इसलिए मुझे लगता है कि देश को नए संसद भवन की जरूरत थी। नए भवन में सभी नेताओं को ईमानदारी से काम करना चाहिए। हमें सुनिश्चित करना होगा कि काम संविधान के अनुसार किया जाए। जनता की परेशानियों को हमें नए भवन में हल करना है। उन्होंने कहा कि कोविड काल के दौरान भी नई संसद का निर्माण तय समय में किया गया।
शरद पवार ने सरकार पर साधा निशाना
अजित पवार के बयान से उलट एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार के विचार थे। शरद पवार ने रविवार को कहा था कि सुबह मैंने लोकार्पण कार्यक्रम देखा। मुझे बहुत खुशी मिली कि मैं वहां नहीं गया। कार्यक्रम में जो कुछ भी हुआ, वह देखकर मैं काफी चिंतित हूं। भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के आधुनिक भारत की कल्पना और जो आज नई दिल्ली में हुआ दोनों में काफी अंतर है। देश में आज जो भी हो रहा है, उससे मुझे लग रहा है कि हम कहीं न कहीं अपने देश को पीछे धकेल रहे हैं। वहीं, अजित पवार की चचेरी बहन और शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले ने भी उद्घाटन कार्यक्रम को अधूरा आयोजन कहा है।
21 पार्टियों ने किया विरोध
बता दें, रविवार को नए संसद भवन के उद्घाटन कार्यक्रम का 21 विपक्षी पार्टियों ने विरोध किया था। इन्हीं 21 पार्टियों में से एक पार्टी एनसीपी भी थी। विरोध का कारण बताते हुए उन्होंने कहा था कि राष्ट्रपति संसद का मुखिया होता है तो उद्घाटन भी उनके हाथों से होना चाहिए। उन्होंने विरोध जताते हुए कहा कि राष्ट्रपति को कार्यक्रम में बुलाया ही नहीं गया। केंद्र सरकार ने राष्ट्र, देश और आदिवासियों का अपमान किया है।