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वायु प्रदूषण: सेहत पर ही नहीं दिमाग और गणित क्षमता पर भी पड़ता है असर

Tue, 28 Aug 2018 11:18 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 28 Aug 2018 11:18 AM IST
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Air pollution not only harms the heart and lungs, but it can hit maths skill as well as brain too
वायु प्रदूषण

वायु प्रदूषण केवल आपके फेफड़ों और दिल पर बुरा असर नहीं डालता बल्कि इससे आपके दिमाग पर भी असर पड़ता है। यह कहना है एक शोध का है। शोध के अनुसार वायु प्रदूषण का बुजुर्गों पर इतना बुरा प्रभाव पड़ता है कि उन्हें मुंह से शब्द निकालने के लिए संघर्ष करना पड़ता है और वह आसान सी गणित को भी हल नहीं कर पाते हैं। 

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येल एंड पेकिंग यूनिवर्सिटी ने संयुक्त तौर पर यह शोध किया है जिसके अनुसार यदि कोई शख्स लंबे समय तक वायु प्रदूषण की चपेट में रहता है तो उसके संज्ञान या अनुभूति करने की क्षमता बुरी तरह से प्रभावित होती है। यह शोध प्रतिष्ठित जर्नल प्रोसिडिंग्स ऑफ नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस में छपा है। 
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वाशिंगटन बेस्ड इंटरनेशनल फूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट की एक रिलीज का कहना है कि शोध में पता चला है कि जो लोग लंबे समय तक वायु प्रदूषण की चपेट में रहते हैं उनकी बोलने और गणित यानी हिसाब लगाने की क्षमता बहुत अधिक घट जाती है। यह प्रतिकूल प्रभाव महिलाओं की तुलना में पुरुषों पर ज्यादा देखा गया है, खासतौर से बुजुर्गों में। इस शोध में 32,000 चीनीयों का 2010 से 2014 के बीच में सर्वेक्षण किया गया। उनपर वायु प्रदूषण के अल्प और दीर्घकाल की गणना की गई।
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शोध के मुख्य लेखक में से एक जियाबो झांग ने कहा कि वायु प्रदूषण की वजह से गणना की बजाए लोगों के बोलने की क्षमता ज्यादा प्रभावित होती है। खासतौर पर पुरुषों में यह समस्या उम्र के साथ-साथ बढ़ती जाती है। यह उन लोगों में ज्यादा होती है जो कम पढ़े-लिखे होते हैं। चीन का यह शोध भारत के मामले में सही साबित हो सकता है। 

हमारे देश में साल 2015 में 25 लाख लोगों की वायु प्रदूषण की वजह से हुई समस्याओं के कारण मौत हो गई थी। ग्रीनपीस इंडिया के वरिष्ठ प्रचारक सुनील दहिया ने कहा कि चीन में वायु प्रदूषण का जो प्रभाव दिख रहा है वह भारत में भी तुलना के योग्य है।


दहिया ने कहा, 'विकास की जो गति और स्थिति है वह चीन और भारत दोनों ही देशों में एक जैसी है और यही कारण है कि दोनों देशों में प्रदूषण का स्तर भी एक जैसा ही है। प्रदूषण के असर की जटिलता हर देश के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है लेकिन इसका हमारी सेहत पर पड़ने वाला प्रभाव एक जैसा ही होगा।' 

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