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Urination Case: सुप्रीम कोर्ट पहुंची पीड़िता, फ्लाइट में दुर्व्यवहार से निपटने के लिए गाइडलाइन बनाने की मांग

Mon, 20 Mar 2023 01:41 PM IST
हिमांशु मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु मिश्रा Updated Mon, 20 Mar 2023 01:41 PM IST
सार

याचिका में पीड़िता ने दावा किया है कि इस घटना के बाद केबिन क्रू ने उसी सीट पर बैठने के लिए कहा जो गीली थी और जहां से पेशाब की गंध आ रही थी। ये भी आरोप लगाया कि उन्हें उस वक्त बताया गया कि पायलट इन-कमांड ने याचिकाकर्ता के लिए एक नई सीट के उपयोग को मंजूरी नहीं दी क्योंकि उस सीट पर पायलट सो रहा था। 

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Air India Urination Case: Victim Moves Supreme Court Seeking Guidelines To Deal In-Flight Passenger Misconduct
एयर इंडिया - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

एयर इंडिया की फ्लाइट में युवक ने जिस 72 साल की महिला पर पेशाब किया था, उसने अब सुप्रीम कोर्ट का रूख कर लिया है। पीड़िता ने कोर्ट से डीजीसीए और एयरलाइन कंपनियों को हवाई यात्रा के दौरान यात्रियों से होने वाले दुर्व्यवहार से निपटने के लिए गाइडलाइन बनाने का आदेश देने की मांग की है।  पीड़िता ने ये भी दावा किया कि जिस युवक ने उनके ऊपर पेशाब किया था, उसके साथ समझौता करने का दबाव बनाया गया था। इस मामले में DGCA ने अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई। 
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याचिका में और क्या कहा गया? 
याचिका में पीड़िता ने दावा किया है कि इस घटना के बाद केबिन क्रू ने उसी सीट पर बैठने के लिए कहा जो गीली थी और जहां से पेशाब की गंध आ रही थी। ये भी आरोप लगाया कि उन्हें उस वक्त बताया गया कि पायलट इन-कमांड ने याचिकाकर्ता के लिए एक नई सीट के उपयोग को मंजूरी नहीं दी क्योंकि उस सीट पर पायलट सो रहा था। 
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याचिका में एयरक्राफ्ट रूल्स 1937 के रूल 22 और 29 का हवाला दिया गया है। इसमें विमान में सवार किसी भी व्यक्ति द्वारा किए जाने वाले कृत्यों को प्रदान करता है, जिसमें हमला, किसी यात्री की संपत्ति को नुकसान पहुंचाना या शराब का सेवन करना शामिल है, जो अन्य यात्रियों को खतरे में डाल सकता है। ऐसे मामलों से बहुत मजबूती से निपटा जाना चाहिए। 
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याचिकाकर्ता का कहना है कि ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए डीजीसीए और विमान कंपनियों को स्पष्ट गाइडलाइन बनानी चाहिए। ऐसी घटनाओं की विधिवत रूप से विभिन्न अधिकारियों को रिपोर्ट की जाए। FIR दर्ज की जाए और अपराध को स्तर 1, स्तर 2 या स्तर 3 के रूप में वर्गीकृत कर दंड और जुर्माना दिया जा सकता है। समझौते का इसमें कोई भी प्रावधान नहीं होना चाहिए। 
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