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एआई क्रांति: 'चीन के पास डीपसीक, अमेरिका के पास चैट-जीपीटी; भारत कहां खड़ा है?' संसद में राघव चड्ढा का सवाल

Tue, 25 Mar 2025 02:13 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Tue, 25 Mar 2025 02:13 PM IST
सार

राघव चड्ढा ने सरकार कुछ अहम सुझाव दिए। इसमें देश में स्वदेशी एआई चिप्स और सुपरकंप्यूटिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर का निर्माण करने, चिप मैन्युफैक्चरिंग को प्रोत्साहन देने और समर्पित AI कंप्यूटिंग सिस्टम विकसित करने जैसे सुझाव शामिल हैं। इसके अलावा उन्होंने स्वतंत्र AI मॉडल विकसित करने की बात कही, ताकि भारत की डेटा सुरक्षा और रणनीतिक संप्रभुता बनी रहे।

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AI revolution: 'China has DeepSeek, America has Chat-GPT; where does India stand?' Raghav Chadha Asked
राघव चड्ढा - फोटो : ANI

विस्तार

राज्यसभा में शून्य काल के दौरान सांसद राघव चड्ढा ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में भारत की स्थिति को लेकर चिंता जताई। उन्होंने देश को वैश्विक स्तर पर एआई हब बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि अगर भारत को 21वीं सदी की महाशक्ति बनना है, तो हमें एआई क्रांति का नेतृत्व करना होगा। उन्होंने कहा, 'अमेरिका के पास चैट-जपीटी, जेमिनी, और ग्रूक जैसे एआई मॉडल हैं। चीन के पास डीपसीक और बायडू हैं। इन देशों ने 5 साल पहले शुरुआत कर दी थी। सवाल ये है कि भारत कहां खड़ा है?

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'भारत के पास टैलेंट है, मेहनती लोग हैं, पर निवेश नहीं'
चड्ढा ने बताया कि 2010 से 2022 के बीच दुनिया में जितने AI पेटेंट फाइल हुए, उनमें से 60% अमेरिका ने, 20% चीन ने और सिर्फ 0.5% भारत ने किए। उन्होंने कहा, 'भारत के पास सबसे अधिक टैलेंट है, सबसे मेहनती लोग हैं। दुनिया की 15% AI वर्कफोर्स भारत से है और हम तीसरे नंबर पर हैं AI स्किल पेनिट्रेशन में। इसके बावजूद भारत की AI मिशन की वैल्यू सिर्फ 1 बिलियन डॉलर है, जबकि अमेरिका का 500 बिलियन डॉलर और चीन का 137 बिलियन डॉलर है।'
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उन्होंने चिंता जताई कि हाल ही में ChatGPT के फाउंडर ने कहा कि भारत के AI भविष्य को लेकर वे पूरी तरह निराश हैं। चड्ढा ने संसद में सवाल पूछा, 'क्या हम उन्हें सही साबित करेंगे या फिर उन्हें गलत साबित करके AI की दुनिया में भारत को अग्रणी बनाएंगे?'
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'AI सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं, ये सुरक्षा और आर्थिक स्वतंत्रता का मुद्दा'
राघव चड्ढा ने कहा कि AI अब केवल तकनीकी मुद्दा नहीं है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा, डेटा संप्रभुता, और आर्थिक स्वतंत्रता से जुड़ा हुआ मामला है। इसलिए भारत को स्वदेशी AI मॉडल विकसित करने होंगे ताकि हम विदेशी तकनीक पर निर्भर न रहें।


‘मेक इन इंडिया’ को बनाएं राष्ट्रीय आंदोलन
उन्होंने दोहराया कि ‘मेक इन इंडिया’ को सिर्फ फैक्ट्रियों तक सीमित नहीं रखा जा सकता। अब वक्त है कि इसे ‘Make AI in India’ के रूप में विस्तार दिया जाए और इसे एक राष्ट्रीय आंदोलन की तरह आगे बढ़ाया जाए। 140 करोड़ भारतीय पूछ रहे हैं—क्या हम AI के सिर्फ उपभोक्ता बनेंगे या निर्माता बनकर दुनिया को दिशा दिखाएंगे? ये भारत का AI मोमेंट है। अब नहीं जागे, तो बहुत देर हो जाएगी। चड्ढा ने अंत में सरकार से मांग की कि वह तुरंत एक राष्ट्रीय एआई रणनीति बनाए, जिसमें स्पष्ट समयसीमा, निवेश योजना और क्रियान्वयन की रूपरेखा हो, ताकि भारत इस वैश्विक दौड़ में पीछे न रह जाए।

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