अगस्ता वेस्टलैंड : रक्षा मंत्री से पहले मिशेल को मिल जाती थी फाइल्स की सूचना ?
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अगस्ता वेस्टलैंड मामले में गिरफ्तार किए गए ब्रिटिश नागरिक क्रिश्चियन मिशेल ने पूरी यूपीए कैबिनेट को अपने इशारों पर चलाने की कोशिश की थी। जिससे कि वह एंग्लो-इटली कंपनी अगस्ता वेस्टलैंड (अब लियोनार्डो) से वीवीआईपी चॉपर डील को अपनी मंजूरी दे सकें। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार सीबीआई को एक फैक्स संदेश मिला है जिसे कथित तौर पर अगस्ता वेस्टलैंड के उस समय अंतरराष्ट्रीय व्यवसाय के उपाध्यक्ष रहे गियाकोमो सपोनारो ने जनवरी 2010 को भेजा था। उसमें क्रिश्चियन मिशेल ने दावा किया था कि उसे तत्कालीन वित्त सचिव की मंशा का पता चल गया है जो रूस की लॉबी के प्रति सहानुभूति रखता है।
मिशेल ने दावा किया कि उसे पूरी यूपीए कैबिनेट को अपने पक्ष में करना होगा ताकि भारतीय वायुसेना के लिए अमेरिका से खरीदे जाने वाले सिकोरस्की एस-92 हेलिकॉप्टर और रूस के एमआई-172 के सौदे को पीछे छोड़ा जा सके। वायुसेना ने अपने वीआईपी स्कवाड्रन के लिए 12 चॉपर का आर्डर दिया है। यह फैक्स सीबीआई को इटली से मिला है। इससे पता चलता है कि मिशेल कथित तौर पर वित्त मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय में फाइलें कहां-कहां जा रही हैं इसकी पूरी जानकारी रखता था। उसे यह जानकारी तत्कालीन रक्षामंत्री एके एंटनी से पहले मिल जाती थीं। उसने अगस्ता के अपने मालिकों को बताया कि उसने 'बहुत ऊंची पहुंच' के जरिए कई तरह की बाधाओं को पार करने के बाद यह सौदा कराया है।
मिशेल ने सपोनारो को आत्मविश्वास से सूचित किया कि अमेरिका और रूस के दवाब और वित्त सचिव के कीमत को लेकर आरक्षण के बावजूद कैबिनेट उनके पक्ष में इस हफ्ते के अंत तक अपना फैसला दे देगी। सुरक्षा की कैबिनेट समिति जिसका नेतृत्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह कर रहे थे उन्होंने अगस्ता वेस्टलैंड के 12 वीवीआईपी चॉपर हेलिकॉप्टर के प्रस्ताव को 18 जनवरी, 2010 में मंजूरी दे दी थी। सीबीआई अधिकारियों को शक है कि मिशेल ने अपने मुंबई स्थित दफ्तर से कैबिनेट के अंतिम निर्णय से पहले यह फैक्स भेज दिया था।
मिशेल के अनुसार रूसी लॉबी का तत्कालीन वित्त सचिव के साथ बहुत मजबूत रिश्ता था। मिशेल का दावा है कि वित्त सचिव के दफ्तर ने वित्त मंत्रालय को नकारात्मक संदेश भेजे थे ताकि वह इस सौदे का समर्थन न करें। बिचौलिए पर भारतीय राजनेताओं, नौकरशाहों और वायुसेना के अधिकारियों को घूस देने का आरोप है। सोपानारो से बातचीत में मिशेल ने दावा किया कि जब रक्षा मंत्रालय को वित्त सचिव का नोट फाइल पर मिला तो उन्होंने निर्णय लिया कि यह बहुत आगे जाएगा।
मिशेल ने सोपानारो को बताया कि वित्त सचिव ने इस बारे में अपने मंत्री से बात नहीं की और वह फाइल को कैबिनेट समिति के पास जाने से रोकना चाहते थे। मिशेल ने सोपानारो को बताया था कि उसे आगे होने वाली सभी बैठकों और फैसलों की जानकारी थी और कहा कि इस बारे में वित्त मंत्रालय की सौदे पर आपत्तियों को 'शुक्रवार' को रक्षा मंत्री के पास भेज दिया जाएगा जो उसके बाद वित्त मंत्री से इस मामले को सुलझाने के लिए मिलेंगे।