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दिल्ली में बैठकर कृषि क्षेत्र का विकास संभव नहीं: शरद पवार
Wed, 30 Dec 2020 02:19 AM IST
Jeet Kumar
एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली।
Published by: Jeet Kumar
Updated Wed, 30 Dec 2020 02:19 AM IST
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शरद पवार
- फोटो : ANI
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एनसीपी प्रमुख व पूर्व केंद्रीय कृषिमंत्री शरद पवार ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, कृषि के मुद्दे को दिल्ली में बैठकर नहीं निपटाया जा सकता। दूर गांवों में तपती धूप में पसीना बहाते किसान के हित और कृषि क्षेत्र का विकास राज्यों की मदद के बिना संभव नहीं हैं।
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इन्हें दिल्ली में बैठी सरकार अपने हिसाब से नहीं चला सकती। पवार ने एनडीए सरकार पर तीनों नए कानूनों में कृषि सुधार के मूल आधार को धराशायी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, हमारी निगाह किसानों और सरकार की बातचीत पर टिकी है। अगर यह बेनतीजा रही तो विपक्ष कड़े कदम उठाएगा।
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पवार ने एक साक्षात्कार में कहा, देश को लंबे समय से कृषि सुधार कानूनों की जरूरत है। कृषिमंत्री रहने के दौरान हम 2004 में इस दिशा में कानून लाना चाहते थे। मौजूदा केंद्र सरकार जो तीन कानून लाई है वे उन प्रस्तावित सुधार कानूनों से उलट हैं जो मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने तैयार किया था।
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पवार ने कहा, हमने अध्ययन किया था, किसानों से सीधे जुड़ने वाली हर राज्य सरकार से इसके लिए सुझाव मांगे, उनकी समस्याओं और चिंताओं को सुना, उन पर मंथन किया। विशेषज्ञों से राय ली और कई दौर की वार्ताओं और अनेक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए कानून बनाए, हालांकि उन्हें लागू नहीं कर सके। जबकि मौजूदा सरकार के कानूनों में एमएसपी जैसे अहम मुद्दों समेत अन्नदाता की तमाम चिंताओं का जवाब नहीं है।
राज्यों से चर्चा किए बिना सिर्फ मनमानी की गई
पवार ने कहा, असल में यह सिर्फ केंद्र में अपनी मनमानी से तैयार किए गए कानून हैं। इनमें राज्यों से कोई चर्चा भी नहीं की गई। यही कारण है कि कई राज्य और उनके किसान इसके खिलाफ हैं। राज्यों की अनदेखी करना केंद्र को भारी पड़ेगा।
पवार ने केंद्र पर किसानों की बातें न सुनने का आरोप लगाते हुए कहा, सरकार ने किसान संगठनों से बातचीत के लिए जिन मंत्रियों का चयन किया वही गलत है। किसानों की समस्याओं पर बात करने के लिए ऐसे लोगों को भेजना चाहिए था जिन्हें कृषि क्षेत्र की अच्छी समझ हो। जबकि सरकार ने जिन्हें जिम्मेदारी सौंपी वे कृषि को न तो समझते हैं और न ही उन्हें इसका ज्ञान है, फिर कैसे वे किसानों की समस्या समझेंगे।
बातचीत बेनतीजा रही तो विपक्ष उठाएगा कड़े कदम
पवार ने कहा, अब तक आंदोलन राजनीति से दूर रहा है, अगर बुधवार को बातचीत बेनतीजा रही तो विपक्ष कड़े कदम उठाएगा। सर्द रातों में दिल्ली की सड़कों पर आंदोलन कर रहे किसानों की बात गंभीरता से सुनने के बजाय सरकार राजनीति का आरोप लगाती रही।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि विपक्ष किसानों की आड़ में हित साध रहा है। जबकि असल में ऐसा नहीं था। यह किसानों का आंदोलन था और रहेगा। किसानों ने किसी नेता को मंच पर चढ़ने नहीं दिया। पवार ने आगाह किया कि सरकार को किसानों को गंभीरता से लेना चाहिए और उनकी शंकाओं को दूर करना होगा।