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Crop: बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से 2.49 लाख हेक्टेयर में रबी फसलों को नुकसान, गेहूं सबसे ज्यादा प्रभावित
Sat, 11 Apr 2026 05:22 AM IST
Nitin Gautam
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: Nitin Gautam
Updated Sat, 11 Apr 2026 05:22 AM IST
सार
बेमौसम बरसात ने किसानों को काफी नुकसान पहुंचाया है। बारिश के चलते 2.49 लाख हेक्टेयर से ज्यादा रबी की फसल बर्बाद हो चुकी है। सरकार ने नुकसान के आकलन के निर्देश दिए हैं।
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शिवराज सिंह चौहान
- फोटो : ANI
विस्तार
बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से 8 अप्रैल तक 2.49 लाख हेक्टेयर में खड़ी रबी फसलों को नुकसान पहुंचा है। इसमें गेहूं की खेती सबसे अधिक प्रभावित हुई है। आम और लीची जैसी बागवानी फसलों को भी नुकसान हुआ है। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को कहा, मोदी सरकार इस संकट में किसानों के साथ मजबूती से खड़ी है। 5 अप्रैल को अधिकारियों को प्रभावित राज्यों में नुकसान की समीक्षा करने और प्रदेश सरकारों के साथ समन्वय करने का निर्देश दिया था। तीन विभागों की ओर से इस नुकसान की समीक्षा की जा रही है। राज्य सरकारों से भी तुरंत नुकसान का आकलन करने को कहा गया है। इसके अलावा, प्रभावित क्षेत्रों के कृषि मंत्रियों से भी बातचीत की गई है।
संकट के बीच उर्वरकों की सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित कर रहा केंद्र
मध्यप्रदेश के रायसेन जिले में उन्नत कृषि महोत्सव शुरू होने से पूर्व चौहान ने कहा, सरकार वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव से बचने के लिए उर्वरकों की सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित कर रही है। सरकार चाहती है कि किसान को उपज का उचित मूल्य मिले, उर्वरकों की उपलब्धता बनी रहे और किसान पर वैश्विक संकट का बोझ न्यूनतम रहे।
गेहूं-धान के पर्याप्त भंडार
केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा, गेहूं और धान के मामले में हमारे भंडार भरे हुए हैं, लेकिन दलहन एवं तिलहन के मोर्चे पर आयात पर निर्भरता बनी हुई है। भारत दालों का सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता देश होते हुए भी अभी पूरी तरह से आत्मनिर्भर नहीं है, इसलिए अब नीति का जोर दलहन-तिलहन के क्षेत्र और उत्पादकता बढ़ाने पर है, ताकि देश इन फसलों में भी आत्मनिर्भर बन सके।
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कालाबाजारी पर रोक, किसानों तक सीधे पहुंचेगी सब्सिडी
खाद की कालाबजारी रोकने को हरियाणा और मध्यप्रदेश में एग्रीस्टैक नामक पायलट परियोजना चलाई जा रही है। इसके तहत किसानों की डिजिटल पहचान बनाई जा रही है। इससे खाद, बीज एवं सरकारी सब्सिडी सीधे पात्र किसानों तक पहुंचेगी और बिचौलियों की भूमिका कम होगी।
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संकट के बीच उर्वरकों की सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित कर रहा केंद्र
मध्यप्रदेश के रायसेन जिले में उन्नत कृषि महोत्सव शुरू होने से पूर्व चौहान ने कहा, सरकार वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव से बचने के लिए उर्वरकों की सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित कर रही है। सरकार चाहती है कि किसान को उपज का उचित मूल्य मिले, उर्वरकों की उपलब्धता बनी रहे और किसान पर वैश्विक संकट का बोझ न्यूनतम रहे।
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गेहूं-धान के पर्याप्त भंडार
केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा, गेहूं और धान के मामले में हमारे भंडार भरे हुए हैं, लेकिन दलहन एवं तिलहन के मोर्चे पर आयात पर निर्भरता बनी हुई है। भारत दालों का सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता देश होते हुए भी अभी पूरी तरह से आत्मनिर्भर नहीं है, इसलिए अब नीति का जोर दलहन-तिलहन के क्षेत्र और उत्पादकता बढ़ाने पर है, ताकि देश इन फसलों में भी आत्मनिर्भर बन सके।
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कालाबाजारी पर रोक, किसानों तक सीधे पहुंचेगी सब्सिडी
खाद की कालाबजारी रोकने को हरियाणा और मध्यप्रदेश में एग्रीस्टैक नामक पायलट परियोजना चलाई जा रही है। इसके तहत किसानों की डिजिटल पहचान बनाई जा रही है। इससे खाद, बीज एवं सरकारी सब्सिडी सीधे पात्र किसानों तक पहुंचेगी और बिचौलियों की भूमिका कम होगी।