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खेती कॉर्पोरेट क्षेत्र को देने के लिए लोकतंत्र की हत्या कर रही है सरकारः कांग्रेस
Mon, 21 Sep 2020 01:01 AM IST
संजीव कुमार झा
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Mon, 21 Sep 2020 01:01 AM IST
सार
- अहमद पटेल, बाजवा, सिंघवी और गोहिल ने खोला मोर्चा
- प्रेसवार्ता में लगाया केंद्र सरकार पर मनमाने तरीके से काम करने का आरोप
- राज्यसभा में किसानों से संबंधित विधेयक पारित कराने के तरीके को असंवैधानिक करार दिया
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अहमद पटेल(फाइल फोटो)
- फोटो : पीटीआई
विस्तार
केंद्र सरकार ने देश की खेती को कॉर्पोरेट क्षेत्र के हवाले करने की मंशा से किसानों से संबंधित विधेयक को पारित कराया है। सरकार ने विधेयक पारित कराने में न केवल जल्दबाजी की, बल्कि असंवैधानिक तरीका भी अपनाया। यह कहना है कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल, अभिषेक मनु सिंघवी, प्रताप सिंह बाजवा और शक्ति सिंह गोहिल का।
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किसानों से जुड़ा विधेयक पारित होने के बाद कांग्रेस पार्टी के इन सभी नेताओं ने केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला। अहमद पटेल और अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि सरकार के इस मनमाने तरीके को लेकर ही कांग्रेस अविश्वास प्रस्ताव लेकर आई है।
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प्रधानमंत्री के बयान में सच्चाई नहीं
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि प्रधानमंत्री न्यूनतम समर्थन मूल्य को लेकर जो कह रहे हैं, उसमें कोई सच्चाई नहीं है। यह कानून किसानों के खिलाफ है और इससे देश के किसानों को भारी नुकसान होगा। सरकार इसी तरह भूमि अधिग्रहण विधेयक को भी लेकर संसद में आई थी, लेकिन विपक्ष के भारी विरोध के कारण उसे वापस लेना पड़ा था।
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अहमद पटेल ने इसे देश का काला कानून बताया। कांग्रेस के नेताओं ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के नेता इस कानून को लेकर देश को गुमराह कर रहे हैं। भाजपा के नेता जो बात कह रहे हैं, उससे जुड़े सवाल पर केंद्र सरकार कोई जवाब नहीं दे पा रही है।
अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि मत विभाजन की मांग करना संसद के सदस्यों का अधिकार है। लेकिन विपक्षी सदस्यों ने मत विभाजन की मांग की तो इसे खारिज कर दिया गया और क्रूरता से कानून को पारित करा लिया गया। ऐसा करना देश के संघीय ढांचे का अपमान है। यह धोखा है और विधेयक गलत तरीके से पारित हुआ है।
प्रताप सिंह बाजवा ने कानून लाने के समय पर बड़ा सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि एक तरफ देश लद्दाख में चीनी सैनिकों की घुसपैठ से जूझ रहा है। गलवां घाटी जैसी हिंसक झड़प हो रही है। दूसरी तरफ कोविड-19 की महामारी जैसा संकट है। ऐसे समय में केंद्र सरकार इस तरह का कानून लेकर आ रही है। बाजवा का कहना है कि केंद्र सरकार इस कानून को अगले साल भी ला सकती थी, लेकिन अपने कॉर्पोरेट घराने वाले मित्रों को लाभ पहुंचाने की उसे काफी हड़बड़ी है।