बैंकों में हड़ताल से 200 करोड़ का कारोबार ठप, एटीएम हुए खाली
यूएफबीयू के आह्वान पर बैंकिंग उद्योग के सभी नौ अधिकारी, कर्मचारी संगठनों के राष्ट्रव्यापी हड़ताल में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की शाखाओं में ताले लटके रहे। हड़ताल से लगभग 200 करोड़ रुपये का लेन-देन ठप रहा। बैंक कर्मी केंद्र सरकार के आर्थिक सुधारों और श्रम कानूनों में बदलाव का विरोध कर रहे थे। बैंकों के कर्मचारी-अधिकारी पंजाब नेशनल बैंक की संगम प्लेस शाखा में एकत्र होकर जमकर नारेबाजी की और सरकार के प्रति विरोध प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन में जुटे कर्मचारियों-अधिकारियों को संबोधित करते हुए यूएफबीयू के जिला समन्वयक शशिकांत श्रीवास्तव ने बैंकों का विलय और निजीकरण को किसी भी हालत में स्वीकार नहीं करने का एलान किया। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा देश के बैंकों को पूंजीपतियों और विदेशी हाथों में सौंपने की है। सभा मं एसपी दीक्षित, डीकेमालवीय, एसपी शर्मा, दिनेश कुमार और एसबी राय ने बैंक कर्मचारियों को लंबी लड़ाई के लिए तैयार रहने को कहा।
बढ़ता एनपीए औद्योगिक घरानों की देन
पीएनबी अधिकारी संगठन के सर्किल प्रेसीडेंट अश्विनी तिवारी ने कहा कि बैंकों का बढ़ता एनपीए मुट्ठीभर औद्योगिक घरानों की देन है। सरकार उनके खिलाफ न तो स्वयं कड़े कदम उठाना चाहती है और न ही बैंकों को स्वायत्तता प्रदान कर रही है कि वे अपने खराब ऋणों की वसूली कर सकें, इसकी जिम्मेदारी बैंको पर थोपी जा रही है।
पीएनबी के जनरल सेक्रेटरी सुनील सहगल ने आर-पार की लड़ाई के लिए तैयार रहने को कहा। सेंट्रल बैंक अधिकारी संगठन के सहायक महामंत्री राजेश तिवारी ने सरकार के आर्थिक सुधारों पर सवालिया निशान खड़ा किया। सभा में अमर नाथ, एके कपिला, अवधेश पांडेय, नीरज वर्मा, क्षितिज कुमार पांडेय, राकेश कुमार, अमित सिन्हा सहित सार्वजनिक क्षेत्र के सभी बैंकों के कर्मचारी-अधिकारी मौजूद रहे।
नौ अगस्त को संसद मार्च
पीएनबी अधिकारी संगठन के सर्किल प्रेसीडेंट अश्विनी तिवारी ने बताया कि आंदोलन के अगले चरण में ऑल इंडिया बैंक आफिसर कनफडरेशन की ओर से नौ अगस्त को नई दिल्ली में संसद मार्च निकाला जाएगा। इसमें वित्तमंत्री को ज्ञापन दिया जाएगा।