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कश्मीर में पाबंदियों में मिलेगी थोड़ी राहत, लेकिन बनी रहेगी सुरक्षा बलों की तैनाती

Mon, 16 Sep 2019 06:37 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 16 Sep 2019 06:37 PM IST
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after revoke of article 370 Centre may give some relaxation in Restrictions in jammu kashmir
श्रीनगर में गृहमंत्री के दौरे के चलते बढ़ी सुरक्षा - फोटो : बासित जरगर

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अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद जम्मू कश्मीर की मौजूदा स्थिति को लेकर सोमवार को गृह मंत्रालय में हुई अहम बैठक में कई फैसले लिए गए हैं। गृहमंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, कैबिनेट सचिव राजीव गौबा, गृह सचिव एके भल्ला, आईबी प्रमुख अरविंद कुमार और कश्मीर मामलों के सयुंक्त सचिव एवं दूसरे कई अधिकारियों की मौजूदगी में तय हुआ है कि कश्मीर से अतिरिक्त सुरक्षा बलों की वापसी अभी संभव नहीं है। सूत्र बताते हैं कि घाटी से कुछ बंदिशों को कम किया जाएगा, मगर नेताओं पर नजर बनी रहेगी।

240 आतंकी घुसपैठ की फिराक में

सोमवार को हुई बैठक के बाद जो संकेत मिल रहे हैं उससे साफ है कि राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि, अलगाववादी नेता और दूसरे नागरिक संगठनों के पदाधिकारी अभी नजरबंद रहेंगे। जिस तरह से पाकिस्तान आए दिन एलओसी पर युद्ध विराम नीति का उल्लंघन कर रहा है, उसके मद्देनजर अभी कश्मीर घाटी में सभी बंदिशें हटाना ठीक नहीं हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार पहले ही कह चुके हैं कि पाकिस्तानी सीमा में ट्रेनिंग ले रहे करीब 240 आतंकी घुसपैठ के लिए मौके की तलाश में हैं। इसके अलावा कश्मीर घाटी में भी करीब 32 आतंकियों के होने की पुख्ता रिपोर्ट्स हैं।

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बंदिशें हटाने के नतीजे खतरनाक

सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय गृह मंत्रालय एवं जांच एजेंसियां अभी कश्मीर में बंदिशों को पूरी तरह खत्म करने के पक्ष में नहीं हैं। हालांकि जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने बाजार, स्कूल-कालेजों और सरकारी दफ्तरों को खोल रखा है। अस्पतालों में भी रोजाना ओपीडी लग रही है। बीएसएनएल का मोबाइल नेटवर्क भी कई इलाकों में पूरी तरह चालू कर दिया गया है। रोजमर्रा के जीवन में काम आने वाली वस्तुओं की आपूर्ति नियमित तौर पर हो रही है। बैठक में आईबी की तरफ से बताया गया है कि घाटी के दूसरे इलाकों में बंदिशों को कम किया जा सकता है, लेकिन उन्हें पूरी तरह हटाना अभी सुरक्षित नहीं है। मोबाइल नेटवर्क में जब भी पूरी तरह से ढील दी गई तो उसके नतीजे अच्छे नहीं मिले।

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स्लीपर सेल की तलाश

पाकिस्तानी सीमा में बैठे आतंकी संगठनों के मैसेज और हालात बिगाड़ने वाले दूसरे संदेश पकड़े गए हैं। इस बात की पूरी आशंका है कि यदि घाटी में सभी बंदिशें हटाई जाती हैं और नजरबंद किए गए नेताओं को छोड़ा जाता है, तो वहां हालात बिगड़ सकते हैं। दूसरा, पाकिस्तान की ओर से आतंकियों को भारतीय सीमा में घुसपैठ कराने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है। घाटी में मौजूद आतंकियों का सफाया अभी तक नहीं हो सका है। इसके अलावा घाटी में बड़ी संख्या में मौजूद आतंकियों के मददगार स्लीपर सेल की तलाश अभी जारी है।

नजरबंदियों को छोड़ना घातक

बैठक में जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक के सलाहकारों की भेजी गई रिपोर्ट पर भी चर्चा की गई। इसमें कहा गया था कि घाटी का माहौल अब ठीक हो रहा है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वहां से सुरक्षा बलों को हटा लिया जाए। राजनीतिक दलों के नेता, अलगाववादी और दूसरे संगठनों के पदाधिकारी जो अभी नजरबंद हैं, इनके बारे में खुफिया रिपोर्ट यह है कि इन्हें अभी रिहा किया जाता है, तो ये लोग जनता के बीच जाकर शांति व्यवस्था बिगाड़ देंगे।

इन पाबंदियों में दी जा सकती है ढील

बैठक में फैसला लिया गया कि सभी मार्गों पर यातायात की सुचारू आवाजाही सुनिश्चित की जाएगी। मौजूदा स्थिति में बहुत से ऐसे मार्ग हैं, जहां पर सामान्य वाहनों के लिए प्रतिबंध लगा है या उन्हें गहन चेकिंग प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, ऐसे मार्गों पर अब थोड़ी राहत दी जा सकती है। हालांकि चेक पोस्ट बरकरार रहेंगी। स्कूल कालेजों, खेल परिसर और सामुदायिक केंद्रों के आसपास तैनात सुरक्षा बलों की संख्या में कमी लाई जाएगी। घाटी में कई बाजारों पर अभी तक बंदिशें लागू हैं, उन्हें हटाया जा रहा है।



थानों में बंद युवाओं को पार्षद या सरपंच की लिखित गवाही के बाद छोड़ने पर विचार किया जाएगा। घाटी में कुछ समय के लिए मोबाइल नेटवर्क की रेंज बढ़ाई जाएगी। यानी जहां 2जी नेटवर्क है, वहां उसे 4जी तक बढ़ाया जा सकता है। हालांकि इस पर कई तरह की बंदिशें रहेंगी। इलाके के अनुसार यह जांचा जाएगा कि मोबाइल नेटवर्क बढ़ाने के बाद, खासतौर पर युवाओं के फोन पर कैसे संदेश आ जा रहे हैं।

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