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NSA डोभाल और चीनी दूत की मुलाकात सफल, मिल बैठ कर सीमा विवाद हल करने पर सहमत भारत-चीन
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sat, 23 Dec 2017 07:35 AM IST
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भारत और चीन ने परस्पर मूलभूत हितों की पूर्ति के लिए सीमा विवाद के जल्द निपटारे पर सहमति जताई है। दोनों देशों में सीमा विवाद सुलझाने के लिए शुक्रवार को 20वें दौर की बातचीत हुई। इसमें विवाद वाली जगहों पर टकराव टालने, शांति कायम करने के तरीकों पर चर्चा की गई।
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दोनों ने डोकलाम विवाद की छाया से निकलते हुए विश्वास बहाली के उपायों पर विचार रखे। सीमा संबंधी मुद्दे पर दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधियों राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन के स्टेट काउंसलर यांग जिएची की बैठक के बाद विदेश मंत्रालय ने इसे ‘सकारात्मक’ बताया।
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डोकलाम गतिरोध के बाद हुई इस पहली बैठक में आपसी मतभेदों का परस्पर स्वीकार्य हल तलाशने के दौरान एक-दूसरे की चिंता, संवेदनशीलता और आकांक्षाओं को सम्मान देने की बात कही गई। हालांकि विदेश मंत्रालय के बयान में यह स्पष्ट नहीं है कि इस दौरान डोकलाम मुद्दे पर चर्चा हुई या नहीं। उधर, बीजिंग में चीनी विदेश मंत्रालय का प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने इसी तरह के सवाल के जवाब में कहा, यह तंत्र दोनों देशों के बीच सीमा मुद्दों पर बातचीत के लिए न केवल उच्चस्तरीय माध्यम है बल्कि यह भारत और चीन के बीच सामरिक संवाद का भी महत्वपूर्ण मंच है।
भारतीय विदेश मंत्रालय के बयान के मुताबिक, दोनों देश इस बात पर सहमत हैं कि सीमा विवाद के अंतिम हल के लिए सीमा क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता बनाए रखनी होगी। इस संबंध में विशेष प्रतिनिधियों के बीच विश्वास बहाली के उपायों को लेकर कई विचारों का आदान-प्रदान हुआ है।
वार्ता काफी सकारात्मक रही और यह दोनों देशों के बीच करीबी विकास साझेदारी की पूर्ण संभावना पर केंद्रित रही। विशेष प्रतिनिधियों ने पूर्व की वार्ताओं की विस्तार से समीक्षा की और दोनों देशों के हित में सीमा संबंधी मामलों का जल्द से जल्द समाधान निकालने पर सहमति जताई। दोनों प्रतिनिधियों ने भारत और चीन के बीच सीमा विवाद का जल्द से जल्द निष्पक्ष, उचित और परस्पर स्वीकार्य हल निकालने की प्रतिबद्धता दोहराई।
16 जून से 28 अगस्त तक चला था डोकलाम गतिरोध
भारत और चीन के बीच डोकलाम गतिरोध तब शुरू हुआ जब भूटान के दावे वाले वाले क्षेत्र में चीनी सैनिकों ने निर्माण गतिविधियां चलाने की कोशिश की। भारतीय सेना ने भूटान के साथ हुए समझौते के अनुसार इसमें हस्तक्षेप किया और चीनी गतिविधियां रोक दीं। दरअसल, यह इलाका उस जगह के पास है, जिसे ‘चिकन नेक’ कहा जाता है और जो भारत को पूर्वोत्तर के राज्यों से जोड़ता है। 73 दिन चले इस गतिरोध के बाद दोनों सेनाएं 28 अगस्त को पीछे हटने पर सहमत हो गई थीं।