डीके को थी CM बनने की ख्वाहिश! हाईकमान को खुश करने में पड़ गए IT के छापे
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गुजरात के 44 विधायकों की बंगलूरू में अपने रिसॉर्ट में मेहमाननवाजी कर रहे कर्नाटक के ऊर्जा मंत्री डीके शिवकुमार के ठिकानों पर इनकम टैक्स लगातार छापेमारी कर रहा है। विभाग को अबतक इस छापेमारी में करोड़ों का कैश और बेनामी संपत्ति का पता चला है।
आपको जानकर हैरत होगी कि डीके शिवकुमार ने खुद आगे बढ़कर गुजरात के कांग्रेसी विधायकों को अपने रिसॉर्ट में ठहराने का जिम्मा उठाया था। इस तरह से वो पार्टी आलाकमान को खुश करना चाहते थे। उनकी नजर कर्नाटक के सीएम पद पर थी, जिसके लिए अपनी दावेदारी को मजबूत करने की गरज से उन्होंने यह काम किया था।
गौरतलब है कि उनका नाम राज्य कांग्रेस मुखिया पद के लिए भी चला था, लेकिन दागदार छवि होने की वजह से उन्हें यह जिम्मेदारी नहीं दी गई थी। इस बीच गुजरात में राज्यसभा चुनाव की तैयारी शुरू हुई और सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल को पार्टी का प्रत्याशी बनाया गया। तभी पार्टी के 6 विधायकों ने इस्तीफा देकर भाजपा का दामन थाम लिया था। इससे सहमी पार्टी ने बाकी विधायकों को टूट से बचाने के लिए महफूज जगह पर भेजने का फैसला लिया।
यहां से कर्नाटक के ऊर्जा मंत्री डीके शिवकुमार पिक्चर में आए। उन्होंने सभी विधायकों को ठहराने और उन्हें सुरक्षा देने का बीड़ा उठाया। लेकिन उनकी दागदार छवि यहां आड़े आई और उन पर इनकम टैक्स विभाग की छापेमारी हो गई।
मामले की जांच कर सकता है प्रवर्तन निदेशालय
आईटी ने शिवकुमार से संबधित ठिकानों पर की गई छापेमारी में अबतक करोड़ों की बेनामी संपत्ति और कैश को कब्जे में लिया है। शिवकुमार के भाई डीके सुरेश का कहना है कि हमारे 70 ठिकानों पर छापेमारी में मिली संपत्ति और कैश शिवकुमार और उनके परिवार का नहीं है।
इस पूरी कार्रवाई को डीके सुरेश ने राजनीति साजिश करार देते हुए कहा कि 'हमें सीनियर लीडर्स का इस मुद्दे पर पूरा साथ मिल रहा है और उन्होंने हमें भरोसा दिलाया कि वह हमारे साथ हैं और यह गहरी राजनीतिक साजिश है।'
बता दें कि दिल्ली के सफदरजंग इलाके में शिवकुमार से जुड़ी संपत्तियों पर आयकर विभाग की छापेमारी आज भी जारी है।
बता दें कि बुधवार को शिवकुमार के 39 ठिकानों पर छापेमारी की गई थी जिसमें 10 करोड़ कैश बरामद किया गया था। शिवकुमार गुजरात के 44 विधायकों की बेंगलूर में अपने रिसॉर्ट में मेहमाननवाजी कर रहे हैं।
आईटी विभाग की लगातार जारी छापेमारी के बीच अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) इस पूरे मामले में जांच शुरू कर सकता है। ईडी जांच की स्थिति में डी के शिवकुमार की मुश्किलें बढ़ सकती है।