देश में चीनी सामान के बहिष्कार की अपील, जानें दो दशकों में भारत का चीन से कितना बढ़ा कारोबार?
- भारत में 30 में से 18 यूनिकॉर्न में चीन की बड़ी हिस्सेदारी
- कुल निर्यात का 0.8 फीसदी चीन को भेजता है भारत
- 80 फीसदी दवाइयों का कच्चा माल चीन से आता है
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विस्तार
लद्दाख सीमा पर भारत और चीन के बीच तनाव को लेकर दोनों देशों के बीच उच्च सैन्य अधिकारियों ने बातचीत की है। लेकिन इसी बीच देश के कई हिस्सों से चीनी सामान के बहिष्कार की आवाज़ें तेज हो गई हैं। इस समय भारत में सोशल मीडिया पर चीन विरोधी माहौल छाया हुआ है।
जानकारों का मानना है कि इस समय भारत को जो दो महत्वपूर्ण काम करने हैं, उसमें चीन पर आर्थिक दबाव डालना और खुद को आत्मनिर्भर बनाने के लक्ष्य पर आगे बढ़ना है। हाल ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मन की बात के प्रसारण में आत्मनिर्भर भारत बनने की बात कही थी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश में बनने वाली वस्तुओं को बढ़ावा दिया जाए और दूसरे देशों से आयात पर निर्भरता कम की जाए।
जैसे-जैसे भारत और चीन के बीच व्यापार बढ़ता गया, वैसे ही चीन की भारत में हिस्सेदारी भी बढ़ती गई। साल 2001-2002 में दोनों देशों के बीच आपसी व्यापार महज तीन अरब डॉलर का था जो 2018-19 में बढ़कर 87 अरब डॉलर पर पहुंच गया। आयात-निर्यात के गणित को समझें तो भारत ने चीन से करीब 70 अरब डॉलर का आयात किया, वहीं चीन को करीब 17 अरब डॉलर का निर्यात किया।
जानकार कहते हैं कि चीन को किए जाने वाले निर्यात की तुलना में भारत चार गुना आयात करता है, इतना ही नहीं सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि देश के कुल विदेश व्यापाक घाटे का करीब एक तिहाई व्यापार घाटा चीन से संबंधित है। आइए जानते हैं कि दोनों देशों के कारोबार की स्थिति क्या है व क्या हैं विकल्प?
भारत पर चीन की किन वस्तुओं का है कब्जा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कह चुके हैं कि देश में बनी मिट्टी की मूर्तियों और दीयों का इस्तेमाल ज्यादा से ज्यादा किया जाए, तभी गरीबों को रोजगार आसानी से मिलेगा। ऐसा कहा जाता है कि चीन का रिसर्च और डेवलपमेंट काफी मजबूत है। चीन हमारे देश के त्योहारों पर बिकने वाले सामानों का पहले ही विश्लेषण कर लेता है और वही सामान सस्ते दाम पर भारत में बिक्री के लिए भेजता है।
इन सामानों की मांग भी ज्यादा रहती है और ये तुलनात्मक सस्ते भी होते हैं। चीन एक ही वस्तु अलग-अलग क्वालिटी की बनाते हैं, जिनकी कीमत भी गुणवत्ता के हिसाब से अलग-अलग रहती है। हमारे बड़े-बड़े त्यौहार जैसे राखी, दिवाली और गणेशोत्सव के दौरान देश में हजारों करोड़ के सामान से लेकर मूर्तियां तक चीन से आती हैं।
इससे भारत का स्वदेशी व्यापार चौपट हो रहा है, इसलिए अब चीनी वस्तुओं के बहिष्कार की मुहिम जरूर चल रही है, लेकिन चीनी वस्तुओं पर से निर्भरता कम करना इतना आसान भी नहीं है। इसमें समय लग सकता है और इन वस्तुओं के विकल्प ढूंढना भी जरूरी है।
चीनी आयात पर कैसे लग सकती है रोक
डब्ल्यूटीओ नि्यमों की वजह से भारत, चीन के सामान पर प्रत्यक्ष नियंत्रण तो नहीं लगा सकता लेकिन भारत सरकार चीनी सामान पर एंटी डंपिंग ड्यूटी जरूर लगा सकती है। यह एक प्रकार का शुल्क है जिससे चीनी वस्तुओं की कीमतें बढ़ जाएंगी और भारतीय उत्पादक उनका मुकाबला कर सकेंगे।
चीन से निकल रहीं निर्माण व उत्पादन कंपनियां
हाल ही में जर्मनी की फुटवियर निर्माता कंपनी कासा एवर्ज जीएमबीएच के निदेशक मंडल ने घोषणा की है कि वह अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट चीन से निकालकर आगरा में स्थापित करेगी। यह मैन्युफैक्चरिंग यूनिट करीब 110 करोड़ रुपए के निवेश से शुरू की जाएगी।
इसके अलावा लावा इंटरनेशनल ने भी चीन में चल रहे अपने व्यापार को भारत में स्थानांतरित करने का एलान कर दिया है। कई देश इन कंपनियाें को अपने देश में लाने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास कर रहे हैं। कई वैश्विक संगठनों की ओर से प्रकाशित रिपोर्ट्स में कहा गया है कि कई देशों की एक हजार से ज्यादा दिग्गज कंपनियां चीन से अपना निवेश समेटने के बाद उत्पादन बंदकर भारत आकर मैन्युफैक्चरिंग करना चाहती हैं।
कब-कब हुआ चीनी वस्तुओं का बहिष्कार
2016 में सर्जिकल स्ट्राइक
अक्टूबर 2016 में सर्जिकल स्ट्राइक के बाद चीन ने पाकिस्तान का साथ दिया था। इससे चीन के खिलाफ देशभर में रोष फैला था, जिसके बाद जनता ने चीनी माल के बहिष्कार का एलान किया था। तब दशहरा-दिवाली के समय भारतीय बाजारों में चीनी सामान की बिक्री में 40 प्रतिशत तक की कमी आई थी।
2017 में डोकलाम
जुलाई 2017 में डोकलाम में चीनी सेना के सामने भारतीय सेना को खड़ा कर दिया गया था, जिसके बाद चीन ने युद्ध की धमकी दी थी। इस एलान के बाद देश की जनका नाराज हो गई थी और चीनी सामान के बहिष्कार का जोरदार परिदृश्य दिखाई दिया था। सर्जिकल स्ट्राइक और डोकलाम दोनों घटनाक्रमों के बाद भारतीय बाजारों में चीनी उपभोक्ता सामान की बिक्री में 25 फीसदी की कमी आई थी।
एलएसी पर तनाव
मई की शुरुआत से ही एलएसी पर तनाव के बीच सोशल मीडिया पर चीनी माल के बहिष्कार की मांग उठी है। लद्दाख के इंजीनियर और एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख के संस्थापक सोनम वांग्चुक ने चीनी वस्तुओं का यूज न करने के आशय के कई वीडियो जारी किए, जो धड़ल्ले से वायरल हुए।