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स्मृति शेष: पीएसएलवी में प्रो. रोद्दम नरसिम्हा की अहम भूमिका रही, वैज्ञानिक सतीश धवन के साथ भी काम करने का मिला था मौका

Wed, 16 Dec 2020 06:20 AM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Wed, 16 Dec 2020 06:20 AM IST
सार

  • अमेरिकी फ्लूड डायनामिसिस्ट लिप्मैन की निगरानी में पूरी की डॉक्टरेट।
  • सिंगल सीटर एयरक्राफ्ट को देख एक झटके में तय कर लिया था लक्ष्य।

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Aerospace scientist Roddam Narasimha played an important role in PSLV
Prof. Narsimha - फोटो : social media

विस्तार

देश के विख्यात वैज्ञानिक प्रो. रोद्दम नरसिम्हा सिर्फ एयरोस्पेस वैज्ञानिक नहीं थे। वो फ्लूड डायनेमेसिस्ट विशेषज्ञ भी थे जो वायुमंडल में तेल और गैस के बहाव के गणित को भी बखूबी समझते थे। हवा में तेल और गैस के बहाव के साथ एयरक्राफ्ट में पाइपलाइन के जरिए तेल के बहाव की गति क्या है इसके भी जानकार थे।

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प्रो. नरसिम्हा 1962 से 1999 तक भारतीय विज्ञान संस्थान बंगलूरू के एयरोस्पेस इंजीनियरिंग पढ़ाते थे। 1984 से 1993 तक नेशनल एयरोस्पेस लैबोरेट्रीज के निदेशक थे। इसके बाद वर्ष 2000 से 2014 तक बंगलूरू में स्थित जवाहरलाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च के इंजीनियरिंग मैकेनिक्स यूनिट के चेयरमैन भी रह चुके थे। वर्ष 2013 में इन्हें दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से नवाजा गया था।
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प्रो. रोद्दम अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए जीवन में निरंतर आगे बढ़ते रहे। वर्ष 1961 में इन्होंने कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में डॉक्टरेट की पढ़ाई के लिए दाखिला लिया। यहां इन्होंने अमेरिकी फ्लूड डायनामिसिस्ट प्रो. हंस वॉल्फगैंग लिप्मैन की निगरानी में अपना काम किया। इन्हीं के साथ अलग-अलग स्थिति में तेल और गैस के बहाव की बारीकियों को समझा और देश के लिए काम किया।
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एक झटके में तय कर लिया लक्ष्य
बंगलूरू के विश्वेश्वर्या कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से इन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। इस दौरान इन्हें टाटा इंस्टीट्यूट जिसे अब भारतीय विज्ञान संस्थान के नाम से जाना जाता है वहां जाने का मौका मिला। वहां इन्होंने एयरोनॉटिकल विभाग में सिंगल सीटर एयरक्राफ्ट स्पिटफायर देखा और उसी वक्त अपना लक्ष्य तय कर लिया।

स्नातक बाद रेलवे की नौकरी की दबाव
वर्ष 1953 में जब इन्होंने स्नातक की पढ़ाई पूरी की तो परिवार चाहता था कि वह रेलवे में नौकरी करें। इन्होंने सब अनसुना कर दिया। अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारतीय विज्ञान संस्थान में दाखिला लिया और 1955 में इंजीनियरिंग में मास्टर्स की डिग्री पूरी की। इनको वैज्ञानिक सतीश धवन ने पढ़ाया था। बाद में उनके साथ काम भी किया।

कलाम के साथ मिलकर लिखी किताब
प्रो. नरसिम्हा ने देश के पूर्व राष्ट्रपति और वैज्ञानिक डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के साथ मिलकर ‘डेवलपमेंट्स इन फ्लूड मैकेनिक्स एंड स्पेस टेकभनोलॉजी’ शीर्षक से किताब भी लिखी थी। भारत रत्न से सम्मानित वैज्ञानिक डॉ. सीएन राव के अच्छे दोस्त थे। देश के प्रख्यात रॉकेट वैज्ञानिक सतीश धवन के साथ काम कर इन्होंने बहुत कुछ सीखा था।


गांव का नाम इनके नाम से जुड़ गया
प्रो. नरसिम्हा का जन्म आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले के रोद्दम गांव में 20 जुलाई 1933 को हुआ था। इनके पिता आरएल नरसिम्हा बंगलूरू के सेंट्रल कॉलेज में फिजिक्स के प्रोफेसर थे। इसके अलावा कन्नड भाषा में विज्ञान के लेखक थे और उनकी रुचि भौतिकी और खगोल विज्ञान में थी, लेकिन ये पिता से कुछ अलग करना चाहते थे।

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