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जांच का अधिकार: वकील एमएल शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की जनहित याचिका
Mon, 24 Dec 2018 12:18 PM IST
Sneha Baluni
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Sneha Baluni
Updated Mon, 24 Dec 2018 12:18 PM IST
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Supreme Court
- फोटो : ANI
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक आदेश जारी करते हुए देश की 10 सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों को कंप्यूटरों के डाटा को जांचने का अधिकार दिया है। जिसपर जारी रार थमने का नाम नहीं ले रही है। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरा था। शुक्रवार को पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने कहा था, 'मैंने मामला नहीं पढ़ा है लेकिन यदि कोई कंप्यूटरों की निगरानी करेगा तो यह ऑरवेलियन स्थिति (एक ऐसी परिस्थिति जिसे जॉर्ज ऑरवेल ने स्वतंत्र समाज के लिए विनाशकारक कहा था) होगी।'
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अब यह मामला देश की सर्वोच्च अदालत पहुंच गया है। वकील मनोहर लाल शर्मा ने न्यायालय में 10 सुरक्षा एजेंसियों को निगरानी करने की अनुमति देने के संबंध में केंद्रीय गृह मंत्रालय की अधिसूचना के खिलाफ जनहित याचिका दाखिल की है। शर्मा की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने कहा, 'इस मामले में कोई तात्कालिकता की कोई जरुरत नहीं है।' कुछ समय पहले उच्चतम न्यायालय ने वकील शर्मा पर फालतू जनहित याचिका दायर करने की वजह से 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया था।
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क्या है केंद्र सरकार का आदेश
आदेश के अनुसार देश की सभी सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों को लोगों के निजी कंप्यूटरों में मौजूद डाटा पर नजर रखने और जांचने का अधिकार दे दिया गया है। सरकार के मुताबिक सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69 के तहत यदि एजेंसियों को किसी भी संस्थान या व्यक्ति पर देशविरोधी गतिविधियों में शामिल होने का संदेह होता है तो वे उनके कंप्यूटरों में मौजूद सामग्रियों को जांच सकती हैं और उन पर कार्रवाई कर सकती हैं। अगली स्लाइड में जानें कौन-कौन सी एजेंसियां रखेंगी नजर।
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किन एजेंसियों के पास है अधिकार
जो एजेंसियां कंप्यूटरों की जांच कर सकती हैं उनके नाम हैं- इंटेलिजेंस ब्यूरो, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, प्रवर्तन निदेशालय, सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज, डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस, सीबीआई, एनआईए, कैबिनेट सचिवालय (रॉ), डायरेक्टोरेट ऑफ सिग्नल इंटेलिजेंस और दिल्ली पुलिस कमिश्नर।
आदेश के संबंध में केंद्र सरकार आईबी, रॉ, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, ईडी, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड, राजस्व खुफिया निदेशालय, सीबीआई, दिल्ली पुलिस के आयुक्त, एनआईए और जम्मू-कश्मीर, पूर्वोत्तर तथा असम के सिगनल इंटेलीजेंस निदेशालय को आदेश जारी कर चुकी है।
Supreme Court Registrar denies early hearing in the PIL against the MHA notification allowing 10 agencies to conduct surveillance, saying “there is no urgency in the case”.
— ANI (@ANI) December 24, 2018