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तीर्थस्थलों से जुड़े घाटों को गोद ले कर संवारने पर भरी हामी
हिमांशु मिश्र, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sat, 13 Jan 2018 03:28 AM IST
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गंगा में फैली गंदगी
- फोटो : अमर उजाला
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अरसे से बेहाल मोक्षदायिनी गंगा की सेवा कर उद्योगपति पुण्य कमाएंगे। देश के शीर्ष 5 उद्योगपतियों ने देश भर में अलग-अलग घाटों के सौंदर्यीकरण, रखरखाव और इन्हें अध्यात्मिक-दार्शनिक स्वरूप देने की जिम्मेदारी लेने पर हामी भरी है। इनमें हिंदुआ बंधु, एचसीएल ग्रुप के मुखिया शिव नाडर, वेदांता के अनिल अग्रवाल, जहाज कारोबारी रवि मल्होत्रा और इंडोरोमा ग्रुप शामिल हैं। गंगा पुनरुद्घार मंत्री नितिन गडकरी से कई स्तर पर बातचीत कर घाटों की दशा सुधारने का खाका भी तैयार कर लिया गया है।
सूत्रों के मुताबिक इन उद्योगपतियों ने जिन इलाकों केगंगा घाटों को गोद ले कर स्थिति में बदलाव लाने पर हामी भरी है उन इलाकों से उनका खास लगाव रहा है। मसलन मूलत: कानपुर के रहने वाले मल्होत्रा ने कानपुर के गंगा घाटों को गोद लेने में सहमति दी है तो बिहार के रहने वाले अनिल अग्रवाल ने पटना को चुना है। इसी प्रकार काशी से खास लगाव रखने वाले नाडर ने वाणसी के सभी घाटों को गोद लेने पर हामी भरी है। उत्तराखंड के धार्मिक स्थलों के प्रति आस्था रखने के लिए जाने जाने वाले हिंदुआ बंधु ने हरिद्वार और ऋषिकेश की जिम्मेदारी ली है।
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ganga
गडकरी के हुई चर्चा में इन उद्योगपतियों ने घाटों के सौंदर्यीकरण, नए घाट बनाने, 15 साल तक इनका रखरखाव करने के अलावा घाट के आसपास के मंदिरों के भी सौंदर्यीकरण पर भी सहमति दी है। इस दौरान इसकी डिजाइन के साथ साथ इसके निर्माण की भी जिम्मेदारी गोद लेने वाले उद्योगपति लेंगे। इन उद्योगपतियों को प्रधानमंत्री की इस इच्छा से भी अवगत कराया गया है कि सौंदर्यीकरण का कार्य अगले साल मार्च महीने तक पूरा हो जाए।
दरअसल वर्ष 2014 के चुनाव प्रचार में गंगा को अविरल और निर्मल बनाने का वादा करने वाले प्रधानमंत्री की यह महत्वाकांक्षी योजना है। बीते दिनों कैग की रिपोर्ट में इस मद में दी गई राशि खर्च न होने पर सरकार को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। हालांकि रिपोर्ट से पहले ही कामकाज से असंतुष्ट पीएम ने इस मंत्रालय की जिम्मेदारी उमा भारती से ले कर नितिन गडकरी को दे दी थी।
दरअसल वर्ष 2014 के चुनाव प्रचार में गंगा को अविरल और निर्मल बनाने का वादा करने वाले प्रधानमंत्री की यह महत्वाकांक्षी योजना है। बीते दिनों कैग की रिपोर्ट में इस मद में दी गई राशि खर्च न होने पर सरकार को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। हालांकि रिपोर्ट से पहले ही कामकाज से असंतुष्ट पीएम ने इस मंत्रालय की जिम्मेदारी उमा भारती से ले कर नितिन गडकरी को दे दी थी।