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ED: यूपी और हरियाणा में 11 जगहों पर ईडी के छापे, सरकारी खजाने को 27 करोड़ का नुकसान; ऐसे लगाई चपत
Tue, 25 Aug 2026 06:33 PM IST
राहुल कुमार
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: राहुल कुमार
Updated Tue, 25 Aug 2026 06:33 PM IST
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ED
- फोटो : ED
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के लखनऊ जोनल ऑफिस ने सोमवार को उत्तर प्रदेश और हरियाणा में 11 जगहों पर छापे मारे हैं। यह कार्रवाई नकली 'इनपुट टैक्स क्रेडिट' के जरिए सरकारी खजाने को 27 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान पहुंचाने की जांच से संबंधित है। इस मामले में बिना किसी असल सामान या सर्विस की सप्लाई के नकली 'इनपुट टैक्स क्रेडिट' (आईटीसी) लेने और उसे आगे पास किया गया था।
धोखाधड़ी से इनपुट टैक्स क्रेडिट लिया
ईडी ने यह जांच उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा भारतीय दंड संहिता 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की है। ये धाराएं पीएमएलए, 2002 के तहत 'शेड्यूल्ड ऑफेंस' (सूचीबद्ध अपराध) के तहत आती हैं। शिकायत करने वाली एजेंसी का कहना है कि आरोपी कंपनी और उसके डायरेक्टरों ने बिना किसी असल सप्लाई या सामान की प्राप्ति के, नकली इनवॉइस और जाली ई-वे बिल के आधार पर धोखाधड़ी से इनपुट टैक्स क्रेडिट लिया। इसके बाद उसे आगे पास कर दिया गया।
कई खातों के जरिए घुमाया गया पैसा
इससे सरकारी खजाने को 27.02 करोड़ रुपये का गलत नुकसान हुआ। यह भी बताया गया कि कंपनी ने नकली इनपुट टैक्स क्रेडिट पाने और सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने के इरादे से पहले से योजना बनाकर जाली बिल्टी (ट्रांसपोर्ट रसीदें) तैयार की थीं। जांच से पता चला है कि वित्तीय वर्ष 2018-19 के दौरान, उक्त कंपनी ने अस्तित्वहीन और फर्जी कंपनियों की एक चेन के ज़रिए लगभग 10.28 करोड़ रुपये का नकली इनपुट टैक्स क्रेडिट लिया। उसे आगे भी पास कर दिया गया। साथ ही, लाभार्थी फर्मों से मिले फंड को उसी दिन ऐसी ही फर्जी कंपनियों में ट्रांसफर कर दिया गया, जिसे कई खातों के जाल के जरिए घुमाया गया। आखिर में कैश के रूप में उस राशि को निकाल लिया गया।
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दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस बरामद
ईडी ने तलाशी के दौरान मिले दस्तावेज़ों का विश्लेषण किया। लाभार्थियों समेत मुख्य लोगों के बयान दर्ज किए गए। इससे पता चला कि फ़र्ज़ी आईटीसी का नेटवर्क ऐसी कई अन्य यूनिट्स तक फैला हुआ है। इसके अलावा, 3.80 करोड़ रुपये की बेहिसाब नकदी के साथ-साथ आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल उपकरण भी बरामद किए गए हैं।
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धोखाधड़ी से इनपुट टैक्स क्रेडिट लिया
ईडी ने यह जांच उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा भारतीय दंड संहिता 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की है। ये धाराएं पीएमएलए, 2002 के तहत 'शेड्यूल्ड ऑफेंस' (सूचीबद्ध अपराध) के तहत आती हैं। शिकायत करने वाली एजेंसी का कहना है कि आरोपी कंपनी और उसके डायरेक्टरों ने बिना किसी असल सप्लाई या सामान की प्राप्ति के, नकली इनवॉइस और जाली ई-वे बिल के आधार पर धोखाधड़ी से इनपुट टैक्स क्रेडिट लिया। इसके बाद उसे आगे पास कर दिया गया।
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कई खातों के जरिए घुमाया गया पैसा
इससे सरकारी खजाने को 27.02 करोड़ रुपये का गलत नुकसान हुआ। यह भी बताया गया कि कंपनी ने नकली इनपुट टैक्स क्रेडिट पाने और सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने के इरादे से पहले से योजना बनाकर जाली बिल्टी (ट्रांसपोर्ट रसीदें) तैयार की थीं। जांच से पता चला है कि वित्तीय वर्ष 2018-19 के दौरान, उक्त कंपनी ने अस्तित्वहीन और फर्जी कंपनियों की एक चेन के ज़रिए लगभग 10.28 करोड़ रुपये का नकली इनपुट टैक्स क्रेडिट लिया। उसे आगे भी पास कर दिया गया। साथ ही, लाभार्थी फर्मों से मिले फंड को उसी दिन ऐसी ही फर्जी कंपनियों में ट्रांसफर कर दिया गया, जिसे कई खातों के जाल के जरिए घुमाया गया। आखिर में कैश के रूप में उस राशि को निकाल लिया गया।
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दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस बरामद
ईडी ने तलाशी के दौरान मिले दस्तावेज़ों का विश्लेषण किया। लाभार्थियों समेत मुख्य लोगों के बयान दर्ज किए गए। इससे पता चला कि फ़र्ज़ी आईटीसी का नेटवर्क ऐसी कई अन्य यूनिट्स तक फैला हुआ है। इसके अलावा, 3.80 करोड़ रुपये की बेहिसाब नकदी के साथ-साथ आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल उपकरण भी बरामद किए गए हैं।