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महाराष्ट्र में प्रस्तावित रिफाइनरी में हिस्सेदारी लेगी एडीएनओसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 25 Jun 2018 04:48 PM IST
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अबु धाबी नेशनल आयल कंपनी (एडीएनओसी) ने महाराष्ट्र में प्रस्तावित 44 अरब डालर की रिफाइनरी में हिस्सेदारी के लिए आज शुरुआती समझौता किया। इस तरह से सऊदी अराम्को के साथ एडीएनओसी भी परियोजना में शामिल हो गई है जो इस परियोजना के जरिए भारत के ऊर्जा क्षेत्र में कदम रखने की सोच रही है।
अराम्को व एडीएनओसी की इस प्रस्तावित रिफाइनरी परियोजना में 50% हिस्सेदारी होगी। बाकी आधी हिस्सेदारी में सार्वजनिक क्षेत्र की आईओसी, बीपीसीएल व एचपीसीएल का हिस्सा होगा। 44 अरबर डालर के निवेश से छह करोड़ टन सालाना क्षमता की यह रिफानरी व इसके साथ 1.8 करोड़ टन का पेट्रोकेमिकल परिसर स्थापित किया जा रहा है।
सऊदी अराम्को के सीईओ एवं अध्यक्ष अमीन एच नसीर ने यहां संवाददाताओं से कहा कि दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ते तेल उपभोक्ता देश के साथ सऊदी अरब व यूएई का ‘रणनीतिक निवेश अपने चरम पर’ पहुंच गया है।
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अराम्को ने शुरू में 50% हिस्सेदारी के लिए अप्रैल में समझौता किया और कहा कि वह एक और हिस्सेदार बाद में शामिल करेगी। उन्होंने कहा कि अराम्को इस परियोजना में केवल तेल परिशोधन ही नहीं करना चाहती बल्कि वह पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री व विपणन भी करना चाहेगी।
उन्होंने कहा कि 50% हिस्सेदारी एडीएनओसी व अराम्को के पास रहेगी हालांकि प्रत्येक कंपनी कितना हिस्सा रखेगी इस पर चर्चा चल रही है। पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस अवसर पर सऊदी अरब को ‘ भारत को कच्चे तेल का विश्वसनीय व भरोसमंद आपूर्तिकर्ता करार दिया। उन्होंने उसे भारत की ऊर्जा सुरक्षा में महत्वपूर्ण कारक बताया।
उल्लेखनीय है कि सऊदी अरब 2016-17 तक भारत को तेल का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता रहा है। बीते वित्त वर्ष में हालांकि वह इस लिहाज से वह इराक से पिछड़ गया।
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अराम्को व एडीएनओसी की इस प्रस्तावित रिफाइनरी परियोजना में 50% हिस्सेदारी होगी। बाकी आधी हिस्सेदारी में सार्वजनिक क्षेत्र की आईओसी, बीपीसीएल व एचपीसीएल का हिस्सा होगा। 44 अरबर डालर के निवेश से छह करोड़ टन सालाना क्षमता की यह रिफानरी व इसके साथ 1.8 करोड़ टन का पेट्रोकेमिकल परिसर स्थापित किया जा रहा है।
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सऊदी अराम्को के सीईओ एवं अध्यक्ष अमीन एच नसीर ने यहां संवाददाताओं से कहा कि दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ते तेल उपभोक्ता देश के साथ सऊदी अरब व यूएई का ‘रणनीतिक निवेश अपने चरम पर’ पहुंच गया है।
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अराम्को ने शुरू में 50% हिस्सेदारी के लिए अप्रैल में समझौता किया और कहा कि वह एक और हिस्सेदार बाद में शामिल करेगी। उन्होंने कहा कि अराम्को इस परियोजना में केवल तेल परिशोधन ही नहीं करना चाहती बल्कि वह पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री व विपणन भी करना चाहेगी।
उन्होंने कहा कि 50% हिस्सेदारी एडीएनओसी व अराम्को के पास रहेगी हालांकि प्रत्येक कंपनी कितना हिस्सा रखेगी इस पर चर्चा चल रही है। पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस अवसर पर सऊदी अरब को ‘ भारत को कच्चे तेल का विश्वसनीय व भरोसमंद आपूर्तिकर्ता करार दिया। उन्होंने उसे भारत की ऊर्जा सुरक्षा में महत्वपूर्ण कारक बताया।
उल्लेखनीय है कि सऊदी अरब 2016-17 तक भारत को तेल का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता रहा है। बीते वित्त वर्ष में हालांकि वह इस लिहाज से वह इराक से पिछड़ गया।