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पद्म श्री मंजम्मा जोगती: कहा- ट्रांसजेंडर होने के कारण मेरे परिवार ने त्याग दिया था, इसके बाद मैंने आत्महत्या की कोशिश की

Thu, 11 Nov 2021 03:28 AM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Thu, 11 Nov 2021 03:28 AM IST
सार

एक ट्रांसजेंडर लोक नृत्यांगना मंजम्मा जोगती को कला में उनके योगदान के लिए मंगलवार को पद्म श्री पुरस्कार मिला। आइए जानते हैं मजम्मा के संघर्ष की कहानी...

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adma Shri Manjamma Jogati says Shunned by my family for being transgender I attempted suicide
राष्ट्रपति ने पद्म श्री पुरस्कार से मंजम्मा जोगती को किया सम्मानित। - फोटो : PTI

विस्तार

ट्रांसजेंडर लोक नृत्यांगना मंजम्मा जोगती को मंगलवार को राष्ट्रपति ने पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया। पुरस्कार लेते वक्त मंजम्मा ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का अनोखे अंदाज में अभिवादन किया। इसे देखकर दरबार हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। मंजम्मा के जीवन का सफर काफी मुश्किलों भरा रहा है लेकिन मंजम्मा टूटी नहीं, लड़ती रहीं। आइए जानते हैं मजम्मा के संघर्ष की कहानी...

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भीख मांगी, गैंगरेप का भी शिकार हुईं
मंजम्मा जोगती जब पंद्रह वर्ष की थीं, तब उनके परिवार ने उन्हें ट्रांसजेंडर होने के कारण त्याग दिया था। उन्होंने उसे कभी घर वापस नहीं आने दिया क्योंकि वह 'फिट' नहीं थी। परित्यक्त और अपमानित होने के बाद वह जीवित रहने के लिए सड़कों पर भीख मांगने लगीं।
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मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, घर से निकलने के बाद उनके पास खाने और रहने का कोई ठिकाना नहीं था। मंजम्मा भीख मांगकर गुजारा करने लगीं। उसी दौरान छह लोगों ने उनके साथ दुष्कर्म किया। जो पैसे उन्होंने भीख मांगकर जुटाए थे, वे भी लूट लिए। उनका कई बार यौन उत्पीड़न किया गया और एक दिन उन्होंने जहर पीकर आत्महत्या करने का प्रयास किया। वह बच गईं लेकिन उनके 20 भाई-बहनों सहित उसके परिवार का कोई भी सदस्य उस अस्पताल में नहीं आया, जहां उन्हें भर्ती कराया गया था। आज, वह भारत के चौथे सबसे बड़े नागरिक पुरस्कार, पद्म श्री से सम्मानित हैं। 
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मंजम्मा जोगती ने अपने जीवन को कैसे बदल दिया?
इंडिया टुडे के साथ एक विशेष साक्षात्कार में, मंजम्मा जोगती ने कन्नड़ में कहा कि उन्होंने जीवित रहने के लिए एक लोक नृत्य, जोगती नृत्य करना सीखा। वह इसमें इतनी अच्छी हो गईं कि कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने उन्हें प्रदर्शन कला के लिए एक सरकारी निकाय, कर्नाटक जनपद अकादमी का अध्यक्ष नियुक्त किया। वह इस अकादमी का नेतृत्व करने वाली पहली ट्रांसजेंडर अध्यक्ष हैं। अब तक इस पद पर सिर्फ पुरुष ही चुने जाते थे। यह अकादमी साल 1979 में बनी थी। इस संस्था का काम राज्य में लोक कला को आगे बढ़ाना है। साल 2006 में मंजम्मा जोगती को कर्नाटक जनपद अकादमी अवॉर्ड दिया गया। फिर साल 2010 में कर्नाटक राज्योत्सव सम्मान मिला।

भावनात्मक साक्षात्कार के दौरान, मंजम्मा जोगती ने कहा कि, वह अपने पुरस्कार के माध्यम से सरकार को ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकारों को पहचानने और उन्हें नौकरी और शिक्षा प्रदान करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि "उन्हें अनदेखा न करें या उन्हें कोने में न रखें। परिवारों को मेरे जैसे बच्चों को स्वीकार करना चाहिए।"


सौभाग्य की अग्रदूत के रूप में जानी जाने वाली मंजम्मा जोगती ने मंगलवार को पद्म पुरस्कार समारोह के दौरान एक अनोखे भाव के साथ राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद को शुभकामनाएं दीं। इस बारे में पूछे जाने पर, उन्होंने हिंदी में कहा, “मैंने राष्ट्रपति से कहा कि वह दो दिनों से इस समारोह का आयोजन कर रहे हैं। मैं 'नजर' (बुरी नजर) को हटा दूंगी जो शायद डाली गई हो।” "उन्होंने धन्यवाद कहा"।

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