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तीसरे चरण में फेल हुई सांसद आदर्श ग्राम योजना, कई कैबिनेट मंत्रियों ने गोद नहीं लिए गांव

Fri, 08 Jun 2018 10:52 AM IST
हरेन्द्र/नई दिल्ली
हरेन्द्र/नई दिल्ली Updated Fri, 08 Jun 2018 10:52 AM IST
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Adarsh Gram Yojana Failed, many cabinet ministers did not adopt village
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की महत्वाकांक्षी सांसद आदर्श ग्राम योजना 4 साल पूरे होते-होते खटाई में पड़ती नजर आ रही है। मोदी कैबिनेट में शामिल कई वरिष्ठ मंत्रियों ने ही प्रधानमंत्री की इस बहुप्रचारित योजना में कोई दिलचस्पी ही नहीं दिखाई। वहीं दोनों सदनों के 78 फीसदी सांसदों ने इस स्कीम के तहत कोई गांव ही गोद नहीं लिया। 
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कई वरिष्ठ मंत्रियों ने की अनदेखी
विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर सरकार की तरफ से जारी की गई स्टेटस ऑफ इनवायरमेंट रिपोर्ट 2018 के मुताबिक मोदी कैबिनेट में शामिल 10 से ज्यादा वरिष्ठ मंत्रियों ने सांसद आदर्श ग्राम योजना की अनदेखी करते हुए कोई गांव ही गोद नहीं लिया। 
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रिपोर्ट के मुताबिक नितिन गडकरी, सदानंद गौड़ा, सुरेश प्रभू, अनंत गीते, प्रकाश जावड़ेकर, अरुण जेटली, रविशंकर प्रसाद, अनंत कुमार, स्मृति ईरानी, थावरचंद गहलौत, धर्मेन्द्र प्रधान और चौधरी बीरेन्द्र सिंह समेत 23 राज्य मंत्रियों ने तीसरे चरण में गोद लेने के लिए किसी गांव की पहचान ही नहीं की।
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तीसरे चरण में कम हुई दिलचस्पी
वहीं, तीन साल पहले लॉन्च की गई सांसद आदर्श ग्राम योजना अब अपने तीसरे चरण में है। पहले चरण में दोनों सदनों के 786 सांसदों में से 703 सांसदों ने गांव गोद लिए, वहीं दूसरे चरण में यह संख्या गिर कर 466 सांसदों तक पहुंच गई।

यूपी में मात्र 48 ने गांव लिए गोद
ऱिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि 13 राज्यों के लोकसभा सांसदों और 16 राज्यों से चुने गए राज्यसभा सांसदों ने सांसद आदर्श ग्राम योजना में कोई दिलचस्पी ही नहीं दिखाई। रिपोर्ट में बताया गया है कि उत्तर प्रदेश के दोनों सदनों के 108 सांसदों में से 60 सांसदों ने गोद लेने के लिए किसा गांव का चुनाव ही नहीं किया, वहीं महाराष्ट्र में यह आंकड़ा 88 फीसदी तक रहा। वहीं, तमिलनाडू में 39 में से 31 सांसदों ने गांव गोद लेने में कोई रूचि नहीं दिखाई, तो पश्चिमी बंगाल में 42 में से 40 सांसदों ने इस योजना से दूरी बना कर रखी। 

बिहार भी हुआ फेल
रिपोर्ट में बताया गया है कि उच्च सदन के 12 नामांकित सांसदों में से 10 सांसदों ने अभी तक गोद लेने के लिए किसी गांव को गोद लेने की जहमत ही नहीं उठाई। वहीं बिहार से आने वाले 14 राज्यसभा सांसद भी प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना की अनदेखी करते दिखे।
 
11 अक्टूबर 2014 को पीएम मोदी ने की थी पहल 
प्रधानमंत्री मोदी ने 11 अक्टूबर 2014 को इसकी शुरूआत की थी, इस योजना के तहत लोकसभा और राज्यसभा के सांसदों को तीन चरणों में तीन-तीन गांवों को गोद लिया जाना था। प्रधानमंत्री मोदी ने इस योजना की शुरुआत करते हुए कहा था कि इससे अच्छी राजनीति के दरवाजे खुलेंगे। इस योजना के तहत हर सांसद अपने इलाके में कोई भी गांव चुन सकता है, लेकिन इनमें उनका अपना गांव या ससुराल का गांव नहीं होगा। सांसद आदर्श योजना की तीन विशेषताएं होनी चाहिए थीं- यह मांग पर आधारित हो, समाज द्वारा प्रेरित हो और इसमें जनता की भागीदारी हो

पीएम ने तीन गांव, राहुल-सोनिया ने भी गांव लिए गोद
प्रधानमंत्री के आह्वान पर शीर्ष कांग्रेसी नेताओं सोनिया गांधी ने रायबरेली के उडवा गांव और राहुल गांधी ने अमेठी के डीह गांवों को गोद लेने में पहल की। वहीं इस योजना के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी के जयापुर गांव, नागेपुर गांव और काकड़िया गांव को गोद लिया था। 

2024 तक 8 गांवों का विकास
इस योजना में 2016 तक प्रत्येक सांसद को एक-एक गांव को गोद लेकर उसे विकसित करना था। 2019 तक दो और गांवों और 2024 तक आठ गांवों का विकास किया जाना था। प्रधानमंत्री ने राज्य सरकारों से भी अपील की थी कि वे विधायकों को इस योजना के लिए प्रोत्साहित करें, तो हर निर्वाचन क्षेत्र में 5 से 6 और गांव विकसित हो सकते हैं।


फंडिग न होने से हुई फेल
रिपोर्ट के मुताबिक सांसदों और कैबिनेट मंत्रियों के इस योजना से मुंह मोड़ने की वजह योजना के लिए बजट में किसी प्रकार के फंडिंग के इंतजामों को न होना माना गया। सांसदों को बताया गया था कि देश में चल रही मौजूदा योजनाओं- इंदिरा आवास योजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, मनरेगा, बैकवर्ड रीजंस ग्रांट फंड, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, सांसद निधि, ग्राम पंचायत की कमाई, केंद्र और राज्य वित्त आयोग निधि और कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सबिलिटी के ही पैसे का इस्तेमाल किया जाए। 
 
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