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Research: हर साल 16 करोड़ लोग नहीं करा पाते सर्जरी, कम-मध्यम आय वाले देशों में सस्ता ऑपरेशन अब भी एक बड़ा सपना
Sun, 20 Jul 2025 07:16 AM IST
दीपक कुमार शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दीपक कुमार शर्मा
Updated Sun, 20 Jul 2025 07:16 AM IST
सार
लैंसेट जर्नल में छपे ताजा शोध के मुताबिक हर साल 16 करोड़ मरीज जीवन रक्षक सर्जरी से वंचित रह जाते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में ऐसे लोग शामिल हैं जिनकी जान बच सकती थी। कम और मध्यम आय वाले देशों में सस्ती, सुरक्षित और समय पर सर्जरी की उपलब्धता अब भी एक बड़ा सपना है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार
दुनिया में मध्य और गरीब वर्ग के करोड़ों लोग ऐसे भी हैं जो जरूरत पड़ने पर भी जरूरी सर्जरी नहीं करा पाते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि उनके पास न तो पर्याप्त संसाधन हैं और न ही ऐसी व्यवस्था है जो समय पर जीवन रक्षक उपचार मुहैया करा सके।
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दुनियाभर में स्वास्थ्य सेवाओं की असमानता एक बार फिर उजागर हुई है। लैंसेट जर्नल में छपे ताजा शोध के मुताबिक हर साल 16 करोड़ मरीज जीवन रक्षक सर्जरी से वंचित रह जाते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में ऐसे लोग शामिल हैं जिनकी जान बच सकती थी। कम और मध्यम आय वाले देशों में सस्ती, सुरक्षित और समय पर सर्जरी की उपलब्धता अब भी एक बड़ा सपना है। ऐसे देशों में केवल 26% ही अपनी आबादी को दो घंटे के भीतर जरूरी सर्जरी उपलब्ध कराने की दिशा में बढ़ रहे हैं, जबकि प्रति लाख जनसंख्या पर 5,000 सर्जरी का वैश्विक मानक आज भी कोई देश नहीं छू पाया है। अध्ययन के मुताबिक, यह सिर्फ पहुंच का संकट नहीं है, बल्कि सर्जरी के बाद की गुणवत्ता भी चिंताजनक है।
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कई तरह के कैंसर जटिल सर्जरी से ठीक हो सकते हैं
रिपोर्ट में यह भी अनुमान लगाया गया है कि यदि केवल स्तन, पेट, कोलन और रेक्टल कैंसर जैसी जटिल सर्जरी को प्राथमिकता दी जाए तो निम्न-मध्यम आय वाले देशों में 8,84,000 लोग दोबारा काम पर लौट सकते हैं।