फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   According to Amartya Sen loan waiver policy is not as silly as you might think

किसानों का कर्ज माफ करने की नीति उतनी गलत नहीं है जितनी सोची जा रही है: अमर्त्य सेन

Mon, 07 Jan 2019 02:15 PM IST
Shilpa Thakur न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू Published by: Shilpa Thakur Updated Mon, 07 Jan 2019 02:15 PM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
According to Amartya Sen loan waiver policy is not as silly as you might think
farmer

कांग्रेस पार्टी ने हाल ही में तीन राज्यों में मिली जीत के बाद किसानों को बड़ी राहत दी। पार्टी ने किसानों की मांग पूरी करते हुए उनका ऋण माफ कर दिया। इस बात का विपक्षी पार्टी ने विरोध भी किया और कहा कि कर्ज माफ करना ही किसानों की समस्या का हल नहीं है। लेकिन अब प्रख्यात अर्थशास्त्री और नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन ने कर्ज माफी की इस नीति का बचाव किया है।


loader

अमर्त्या सेन का कहना है कि किसान कर्ज माफी की नीति उतनी गलत या मूर्खतापूर्म नीति नहीं है जितनी लोग समझते हैं। उन्होंने मिंट को दिए इंटरव्यू में कहा कि वह इस बात से सहमत नहीं है कि ये नीति पूरी तरह गलत है। उन्होंने कहा, "किसानों की परेशानी कई परेशानियों में से एक है। इस पर हम साल 1920 से ही चर्चा कर रहे हैं। मैं लोगों की इस बात से बिल्कुल सहमत नहीं हूं कि कर्जमाफी पूरी तरह से गलत चीज है। यह निश्चित तौर पर प्रोत्साहन समस्या है।"  

उनसे जब ये सवाल पूछा गया कि चीन-भारत की तुलना हर समय चलती रहती है। लेकिन दो क्षेत्र ऐसे हैं जहां साफ तौर पर देखा जा सकता है कि दोनों देशों के बीच कोई तुलना नहीं है। यह दो क्षेत्र हैं शिक्षा और स्वास्थ्य। तो आप इसपर क्या कहेंगे? 

उन्होंने इस सवाल के जवाब में कहा कि भारत में गरीब होते हैं और चीन में भी गरीब होते हैं। लेकिन जो समस्याएं भारत के गरीबों को झेलनी पड़ती हैं वो चीन के गरीबों को नहीं झेलनी पड़ती। जैसे चीन में प्राथमिक शिक्षा और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा गरीबों के लिए उपलब्ध होती है। लेकिन भारत में ऐसा नहीं होता। यहां एक गरीब को दो वक्त की रोटी ही मुश्किल से मिल पाती है। और कई बच्चे तो ऐसे भी हैं जो गरीबी के चलते प्राथमिक शिक्षा भी प्राप्त नहीं कर पाते।

सेन का कहना है, "मेरे घर से कुछ दूरी पर धान के खेतों के अलावा कुछ नहीं था, जो आदिवासियों के छोटे प्लॉट थे। वह जगह अब घरों से भर चुकी है क्योंकि किसान कर्ज में डूब गए और उन्हें अपनी जमीन बेचनी पड़ी। इससे बड़ी सीख ये मिलती है कि किसानों को बहुत अधिक कर्ज के कारण अपनी जमीनें बेचनी पड़ीं। ऋण माफी उतनी मूर्खतापूर्ण नीति नहीं है जितनी आप सोच सकते हैं। जो लोग इस समस्या को झेल रहे हैं उन्हें और भी कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है।"

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed