एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर: निर्देशक से जुड़ी कंपनी ने ब्रिटेन में कर राहत पाने के लिए की धोखाधड़ी
- कंपनी ने कुछ घरेलू कंपनियों के साथ मिलकर ब्रिटिश फिल्म संस्थान के साथ हेराफेरी लेनदेन किया है।
- हेराफेरी ट्रांजेक्शन इसलिए की गई ताकि ब्रिटिश फिल्म संस्थान को धोखा देकर कर में छूट प्राप्त की जा सके।
- डीजीजीएसटीआई ने विजय गुट्टे को 2 अगस्त को गिरफ्तार किया था और वह फिलहाल जमानत पर बाहर हैं।
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वीआरजी डिजिटल कॉर्पोरेशन प्राइवेट लिमिटेड यह वो कंपनी है जो विजय रत्नाकर गुट्टे से जुड़ी हुई है। वह द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर के निर्देशक हैं जिसने इन दिनों राजनीति में भूचाल ला दिया है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार कंपनी के खिलाफ दाखिल अदालती मुकदमें में न केवल वह भारतीय टैक्स कानून के उल्लंघन का आरोप झेल रही है बल्कि उन्होंने कथित तौर पर कुछ घरेलू कंपनियों के साथ मिलकर ब्रिटिश फिल्म संस्थान के साथ हेराफेरी लेनदेन किया है। इसके अलावा उन्होंने ब्रिटेन में कर में छूट का दावा भी किया था।
ब्रिटिश फिल्म संस्थान ब्रिटिश के रूप में किसी फिल्म के प्रमाणन की प्रमुख एजेंसी है। यूके क्रिएटिव इंडस्ट्री टैक्स रिलीफ, ब्रिटिश सरकार के अतंर्गत उन फिल्मों को कर में 25 प्रतिशत की छूट देती है जो ब्रिटेश फिल्म के तौर पर चुनी जाती है। इसके अंतर्गत चुने जाने के लिए प्रोडक्शन कंपनियों को यूके कॉर्पोरेशन टैक्स नेट के अंदर होना चाहिए और फिल्म बनाने में आने वाले खर्च का कम से कम 10 प्रतिशत ब्रिटेन में खर्च करना पड़ता है।
यूके में किए गए वास्तविक खर्च या कुल फिल्म निर्माण खर्चों में से 80 प्रतिशत पर कर राहत उपलब्ध है। माल एवं सेवा कर खुफिया महानिदेशालय (डीजीजीएसटीआई) द्वारा एक स्थानीय अदालत में दायर रिमांड आवेदन में कहा गया है कि वीआरजी डिजिटल कॉर्पोरेशन, बॉम्बे कास्टिंग टैलेंट मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड (बीसीटीएमपीएल), बोहरा ब्रोस ग्रुप समूह और हॉरिजन आउटसोर्स सॉल्यूशंस ने बीसीटीएमपीएल द्वारा द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर में निवेश किए गए पैसे की अधिक मात्रा दिखाने के लिए हेराफेरी लेनदेन किया।
बोहरा ब्रोस फिल्म के एक प्रोड्यूसर हैं। रिमांड आवेदन के अनुसार ट्रांजेक्शन इसलिए किया गया ताकि ब्रिटिश फिल्म संस्थान को धोखा देकर कर में छूट प्राप्त की जा सके। विजय गुट्टे, चीनी के कारोबारी रत्नाकर गुट्टे के बेटे हैं। वह नवंबर 2018 तक वीआरजी डिजिटल के बोर्ड सदस्य थे। डीजीजीएसटीआई ने उन्हें 2 अगस्त को गिरफ्तार किया था और वह फिलहाल जमानत पर बाहर हैं। हालांकि गुट्टे का कहना है कि कर में राहत का दावा असली दस्तावेज जमा करके किया गया था और प्रोड्यूसर्स ने सभी आवश्यक प्रक्रिया का पालन किया था।
भारत की बात करें तो वीआरजी डिजिटल कॉर्पोरेशन पर नकली चालान बनाने का आरोप है जिसमें 34 करोड़ की जीएसटी शामिल है। यह चालान होरिजन आउटसोर्स सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड ने एनिमेशन और मैनपावर सेवाओं के लिए प्राप्त किए थे। होरिजन कंपनी 170 करोड़ रुपये की जीएसटी धोखाधड़ी करने पर डीजीजीएसटीआई के रडार पर है। वीआरजी पर सरकार से गलत तरीके से 28 करोड़ रुपये का कैश रिफंड लेने का भी आरोप है।