जलवायु परिवर्तन: हर साल लगभग 81 अरब डॉलर का समुद्री व्यापार खतरे में, मौसमी आपदाओं से बंदरगाहों को भारी नुकसान
अध्ययन के मुताबिक, बंदरगाहों को मौसमी बदलाव के अनुकूल करना होगा। इसकी भविष्य में तत्काल व सख्त जरूरत पड़ेगी। इसे एक वैश्विक सार्वजनिक भलाई के रूप में देखा जा सकता है जिसके चलते बहुत जरूरी जलवायु वित्त को जारी करने में मदद मिलनी चाहिए।
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जलवायु परिवर्तन के कारण दुनिया भर के बंदरगाहों को हर साल अरबों डॉलर का नुकसान हो रहा है। विश्व का 80% व्यापार बंदरगाहों के जरिये होता है। कई बंदरगाहों को आपदाओं की वजह से व्यवधानों का सामना करना पड़ता है, आर्थिक नुकसान भी होता है। ऑक्सफोर्ड के एनवायर्नमेंटल चेंज इंस्टीट्यूट के नए शोध में चेतावनी देते हुए कहा गया है कि 122 अरब डॉलर से ज्यादा की आर्थिक गतिविधि और 81 अरब डॉलर का अंतरराष्ट्रीय व्यापार जलवायु घटनाओं के प्रभाव से खतरे में है। उत्तरी यूरोप, पश्चिमी अमेरिका, दक्षिणी ऑस्ट्रेलिया, मध्य पूर्व और पश्चिम अफ्रीका के कुछ हिस्सों में विशेष रूप से पूर्वी एशियाई बंदरगाहों पर निर्भरता के कारण ऐसे प्रभावों के पड़ने की आशंका जताई गई है।
मौसमी बदलाव के अनुकूल करने होंगे बंदरगाह
अध्ययन के मुताबिक, बंदरगाहों को मौसमी बदलाव के अनुकूल करना होगा। इसकी भविष्य में तत्काल व सख्त जरूरत पड़ेगी। इसे एक वैश्विक सार्वजनिक भलाई के रूप में देखा जा सकता है जिसके चलते बहुत जरूरी जलवायु वित्त को जारी करने में मदद मिलनी चाहिए। तूफान, बाढ़ व अन्य जलवायु हालात से बंदरगाहों को होने वाले नुकसान से हर साल करीब 8 अरब डॉलर का नुकसान होता है।
वैज्ञानिकों ने चेताया, दुनिया भर में आएगी तबाही, पहले भी यही हुआ
अगर हमारी पृथ्वी इसी तरह गर्म होती रही, तो दुनिया में जल्द ही तबाही आएगी। इसके कारण जलवायु परिवर्तन की एक महत्वपूर्ण प्रणाली ध्वस्त हो सकती है। यह दुनिया के मौसम के लिए विनाशकारी होगा। हाल ही में ‘नेचर जर्नल’ में प्रकाशित एक नए अध्ययन में यह दावा किया गया है। अटलांटिक मेरिडियनल ओवरटर्निंग करंट, जिसका गल्फ स्ट्रीम एक हिस्सा है, सदी के मध्य या 2025 की शुरुआत में ढह सकता है। वुड्स होल ओशनोग्राफिक इंस्टीट्यूशन के अध्यक्ष पीटर डी मेनोकल ने कहा, चाहे वह अमेरिका, चीन, भारत या रूस में क्यों न हो। पृथ्वी पर मौजूद हर व्यक्ति इससे प्रभावित होगा।