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करीब 13 हजार करोड़ का परिचालन लाभ होने पर भी पीएनबी का घाटा बरकरार
Wed, 29 May 2019 05:04 AM IST
Avdhesh Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Wed, 29 May 2019 05:04 AM IST
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NPA
घोटाले का शिकार बने सार्वजनिक क्षेत्र के दूसरे बड़े बैंक पीएनबी को वित्त वर्ष 2018-19 में 9,975 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। हालांकि, इस दौरान बैंक ने 12,995 करोड़ का परिचालन लाभ अर्जित किया, लेकिन भारी फंसे कर्ज (एनपीए) के कारण उसे 22,971 करोड़ की प्रोविजनिंग करनी पड़ी। पीएनबी के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुनील मेहता ने कहा, यही कारण रहा कि बैंक को कुल मिलाकर घाटा हुआ है।
हालांकि, इस साल बेहतर प्रबंधन के जरिये घाटे को सीमित किया गया है। इससे एक साल पहले बैंक को 12,283 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। बैंक के अनुसार, आलोच्य अवधि में बैलेंस शीट में बड़ा सुधार आया है। 2018-19 में घरेलू कारोबार में 11.1 फीसदी, घरेलू अग्रिम कारोबार में 14.1 फीसदी, वैश्विक जमा में 5.3 फीसदी और चालू तथा बचत खाते जमा में 8.3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इस दौरान ब्याज आय में भी 6.9 फीसदी जबकि परिचालन लाभ में 26.2 फीसदी का इजाफा हुआ है। गौरतलब है कि एक साल पहले बड़े घोटाले की वजह से बैंक को 13,417 करोड़ रुपये की चपत लगी थी और उसका घाटा काफी बढ़ गया था।
चौथी तिमाही में कम हुआ एनपीए
बीते वित्त वर्ष की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) में बैंक का घाटा 4,750 करोड़ रुपये तक सीमित रहा है, जो एक साल पहले की समान अवधि में 13,417 करोड़ रुपये था। फंसे कर्ज या एनपीए की बात करें तो मार्च 2019 के अंत तक बैंक का सकल एनपीए घटकर 15.50 फीसदी पर आ गया है, जो बड़ा सुधार माना जा रहा है। बैंक का एनपीए मार्च 2018 में 18.38 फीसदी था। वहीं, शुद्ध एनपीए इस दौरान 6.56 फीसदी रहा, जो एक वर्ष पहले 11.24 फीसदी पर था।
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हालांकि, इस साल बेहतर प्रबंधन के जरिये घाटे को सीमित किया गया है। इससे एक साल पहले बैंक को 12,283 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। बैंक के अनुसार, आलोच्य अवधि में बैलेंस शीट में बड़ा सुधार आया है। 2018-19 में घरेलू कारोबार में 11.1 फीसदी, घरेलू अग्रिम कारोबार में 14.1 फीसदी, वैश्विक जमा में 5.3 फीसदी और चालू तथा बचत खाते जमा में 8.3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इस दौरान ब्याज आय में भी 6.9 फीसदी जबकि परिचालन लाभ में 26.2 फीसदी का इजाफा हुआ है। गौरतलब है कि एक साल पहले बड़े घोटाले की वजह से बैंक को 13,417 करोड़ रुपये की चपत लगी थी और उसका घाटा काफी बढ़ गया था।
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चौथी तिमाही में कम हुआ एनपीए
बीते वित्त वर्ष की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) में बैंक का घाटा 4,750 करोड़ रुपये तक सीमित रहा है, जो एक साल पहले की समान अवधि में 13,417 करोड़ रुपये था। फंसे कर्ज या एनपीए की बात करें तो मार्च 2019 के अंत तक बैंक का सकल एनपीए घटकर 15.50 फीसदी पर आ गया है, जो बड़ा सुधार माना जा रहा है। बैंक का एनपीए मार्च 2018 में 18.38 फीसदी था। वहीं, शुद्ध एनपीए इस दौरान 6.56 फीसदी रहा, जो एक वर्ष पहले 11.24 फीसदी पर था।
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