2185 में से 44 पेड़ छोड़ने के बाद बोली मुंबई मेट्रो, कोर्ट का करेंगे सम्मान, अब और नहीं काटेंगे
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मुंबई की आरे कॉलोनी में पेड़ काटे जाने के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को रोक जरूर लगाई। मगर लगता है कि यह आदेश आने में थोड़ी देर हो गई। मुंबई मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने सोमवार को बताया कि उसे 2185 पेड़ काटने की अनुमति मिली थी और वह 2141 पेड़ काट चुका है। यानी कि अब मात्र 44 और पेड़ों को काटा जाना बाकी था।
सुप्रीम कोर्ट की रोक पर मुंबई मेट्रो ने कहा कि शीर्ष अदालत के आदेश का सम्मान करते हुए पेड़ों की कटाई रोक दी गई है। मुंबई मेट्रो के प्रवक्ता ने कहा कि अब भविष्य में और पेड़ नहीं काटे जाएंगे। हालांकि काटे गए पेड़ों को हटाकर जगह साफ व अन्य निर्माण कार्य जारी रहेंगे। प्रवक्ता ने कहा, 'हम सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सम्मान करते हैं और अब आरे मिल्क कॉलोनी में कार शेड साइट के आसपास कोई पेड़ नहीं काटा जाएगा।'
MMRC: Following the decision of High Court on 4 Oct upholding permission of Tree Authority the felling of 2,185 trees was undertaken on Oct 4&5, 2019 and as on date 2,141 trees have been felled.These will be cleared from site&subsequent construction activities will be carried out https://t.co/FnwCAcC2Al
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) October 7, 2019
इससे पहले मुंबई के आरे कॉलोनी में मेट्रो शेड के निर्माण के लिए पेड़ काटे जाने के मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस अशोक भूषण की विशेष पीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पेड़ों की कटाई पर तत्काल रोक लगा दी। इसके साथ ही पर्यावरण एवं वन मंत्रालय को भी पक्षकार बनाने को कहा है। मामले में अगली सुनवाई 21 अक्तूबर को होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तार किए गए सभी प्रदर्शनकारियों को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से यह सुनिश्चित करने को कहा कि सभी प्रदर्शनकारी बिना देरी के रिहा किए जाएं। वहीं, सुनवाई के बाद वकील संजय हेगड़े ने मीडिया को कोर्ट में चली सुनवाई के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया, सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट में कहा है कि मेट्रो को जितने पेड़ काटने थे, उतने काट लिए गए हैं।
जस्टिस अरुण मिश्रा ने महाराष्ट सरकार से पूछा कि आरे का जंगल इको सेंसिटिव जोन है या फिर नो डेवलपमेंट जोन? कोर्ट ने इस संबंध में दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा है। कोर्ट ने कहा कि पेड़ नहीं काटे जाने चाहिए थे।
Supreme Court hearing #AareyForest case: Justice Arun Mishra asks 'tell us whether it(#AareyForest) was an eco-sensitive zone or not. It was a no development zone not an eco-sensitive zone. This is what we get, show us the documents' https://t.co/QEaW3Sgh8r
— ANI (@ANI) October 7, 2019
मालूम हो कि पेड़ काटने का विरोध कर रहे कानून के छात्रों ने रविवार को चीफ जस्टिस रंजन गोगोई को पत्र लिखा था, जिसे कोर्ट ने जनहित याचिका मानते हुए सुनवाई शुरू की। वरिष्ठ वकील तुषार मेहता ने कोर्ट में महाराष्ट्र सरकार का पक्ष रखा, जबकि वरिष्ठ वकील मनिंदर सिंह मुंबई मेट्रो की तरफ से कोर्ट में मौजूद रहे। याचिकाकर्ताओं की तरफ से वकील संजय हेगड़े ने कोर्ट में दलील पेश की।
इससे पहले, हाईकोर्ट ने पेड़ों की कटाई पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट के अवकाश अधिकारी की ओर से सूचना दी गई है कि लॉ छात्र ऋषभ रंजन की ओर से छह अक्तूबर को यह पत्र लिखा गया था। जिसमें बताया गया कि मुंबई के आरे के जंगल में पेड़ काटे जा रहे हैं। पत्र को जनहित याचिका के तौर पर रजिस्टर्ड कर लिया गया है और सोमवार को सुबह 10 बजे सुप्रीम कोर्ट मामले की सुनवाई करेगा।
पत्र में कहा गया कि मुंबई प्रशासन द्वारा शहर के फेफड़े कहे जाने वाले इन पेड़ों को काटा जा रहा है। इतना ही नहीं शांतिपूर्ण तरीके से इसका विरोध करने वाले हमारे दोस्तों को भी जेल में डाल दिया गया। हमारे पास उपयुक्त याचिका दायर करने के लिए समय नहीं था, लिहाजा सुप्रीम कोर्ट अपने न्यायिक क्षेत्राधिकार का प्रयोग कर इसमें तत्काल हस्तक्षेप करे।
मुंबई में पेड़ों की कटाई का विरोध तेज होता देख रविवार को पुलिस ने आरे कॉलोनी पहुंचने का प्रयास कर रहे वंचित बहुजन आघाडी (वीबीए) के नेता प्रकाश अंबेडकर को हिरासत में ले लिया था। अंबेडकर पेड़ों की कटाई का विरोध कर रहे लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के समर्थन में आरे कॉलोनी जाने का प्रयास कर रहे थे। पुलिस ने उन्हें बीच में हिरासत में ले लिया।
मालूम हो कि कार शेड के निर्माण के लिए मेट्रो प्रबंधन ने पेड़ों की कटाई शुरू की थी, जिसका मुंबई समेत बड़े पैमाने पर विरोध हो रहा है। शनिवार को पुलिस ने पेड़ों की कटाई का विरोध कर रहे करीब 29 सामाजिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया था। इसी क्रम में अंबेडकर रविवार को गोरेगांव स्थित आरे कॉलोनी पहुंचे तो उन्हें हिरासत में ले लिया गया था। हालांकि, कुछ देर बाद पुलिस ने उन्हें छोड़ दिया था।
इस बीच, रविवार को भी पेड़ों की कटाई जारी रही। इस दौरान विरोध प्रदर्शन को देखते हुए आरे कॉलोनी के पांच प्रवेश द्वारों पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस ने पूरे इलाके में शनिवार से धारा 144 लागू की थी, जो रविवार को भी जारी रही। पुलिस ने कहा कि हालात जल्द ही सामान्य हो जाएंगे।
अतिरिक्त सत्र अदालत ने पेड़ कटाई का विरोध करने पर पिछले दो दिनों में गिरफ्तार हुए 29 प्रदर्शनकारियों को सशर्त जमानत दे दी है। इन पर सरकारी काम में बाधा डालने और ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मियों पर हमला करने आरोप है। जज एचसी शिंदे ने प्रदर्शनकारियों को 7-7 हजार के निजी मुचलके पर जमानत दी। इस पूरे मामले पर अब अगली सुनवाई 21 अक्तूबर को होगी।