AAP: क्या खतरे में पड़ सकती है आम आदमी पार्टी की मान्यता, भाजपा क्यों कर रही ये मांग
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
विस्तार
दिल्ली में शराब घोटाले पर आम आदमी पार्टी और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति तेज हो चुकी है। भाजपा ने आरोप लगाया है कि शराब घोटाले के असली मास्टर माइंड अरविंद केजरीवाल हैं, इसलिए उन्हें गिरफ्तार किया जाना चाहिए। पार्टी ने शराब घोटाले में कथित संलिप्तता के आधार पर अरविंद केजरीवाल से मनीष सिसोदिया और संजय सिंह को पार्टी से बाहर करने की मांग भी की है। भाजपा नेता सुधांशु त्रिवेदी ने आरोप लगाया है कि शराब घोटाले में पूरी आम आदमी पार्टी शामिल हैं। उन्होंने राजनीति में प्रयोग की बात को देश के लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताया। भाजपा ने इससे भी आगे बढ़कर आम आदमी पार्टी की मान्यता रद्द करने की मांग तक कर दी है। उसका आरोप है कि आम आदमी पार्टी ने भ्रष्टाचार के द्वारा कमाए गए धन से पंजाब और गोवा में चुनाव लड़ा। यह कदाचार है और इस आधार पर पार्टी की मान्यता रद्द की जानी चाहिए।
वहीं, आम आदमी पार्टी ने इस पूरे मामले को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है। पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि शराब घोटाले जैसी कोई चीज कभी हुई ही नहीं है। उनके अनुसार एक भी पैसे का कोई लेनदेन नहीं किया गया है। चूंकि, भाजपा आम आदमी पार्टी के बढ़ते कद को स्वीकार नहीं कर पा रही है, लिहाजा उसे बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।
केजरीवाल ने दोबारा जोर देकर कहा कि मनीष सिसोदिया और संजय सिंह कट्टर ईमानदार व्यक्ति हैं। उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया है। उन्होंने कहा कि इस तरह का काम करके उनको डिगाने की कोशिश की जा रही है। आम आदमी पार्टी उनके निशाने पर है, लेकिन पार्टी लगातार आगे बढ़ेगी और अपना ज्यादा विस्तार करेगी। आम आदमी पार्टी राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनावों में भी अपनी शक्ति आजमाने की कोशिश कर रही है।
खत्म हो आम आदमी पार्टी की मान्यता- भाजपा
दिल्ली भाजपा की सचिव सारिका जैन ने अमर उजाला से कहा कि अब यह स्पष्ट हो गया है कि अरविंद केजरीवाल ने शराब घोटाले से हजारों करोड़ रुपये की अवैध कमाई की। इस कमाई को पंजाब और गोवा विधानसभा के चुनावों में गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया और मतदाताओं को अवैध प्रलोभन देकर उन्हें प्रभावित करने का काम किया गया। भारत का संविधान इसकी अनुमति नहीं देता और यह चुनावी कदाचार के अंतर्गत आता है।
सारिका जैन ने कहा कि वे सर्वोच्च न्यायालय और राष्ट्रीय चुनाव आयोग से यह मांग करती हैं कि भ्रष्टाचार से कमाए गए अवैध धन का दुरुपयोग कर मतदाताओं को गलत तरीके से प्रभावित करने के मामले में स्वतः संज्ञान लें और आम आदमी पार्टी की मान्यता रद्द करें। ऐसा करना देश में लोकतंत्र को बचाने में न केवल अपेक्षित है, बल्कि आवश्यक भी है। उन्होंने कहा कि यह दूसरी पार्टियों के लिए भी एक सीख होगी, जो गलत तरीके से चुनावी लाभ हासिल करने की कोशिश करती हैं।
'पार्टी पदाधिकारी और प्रभारियों पर हो सकती है आपराधिक कार्रवाई'
सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ वकील अश्विनी उपाध्याय ने कहा कि राजनीतिक दल चुनाव आयोग में पंजीकृत होते हैं और उन्हें चलाने के लिए पार्टी के संविधान के अलावा चुनाव आयोग की एक नियमावली का पालन करना पड़ता है। चूंकि, राजनीतिक दल पैसों की लेनदेन करने के लिए स्थापित एक कंपनी नहीं होते हैं, लिहाजा उन्हें इस आधार पर रद्द नहीं किया जा सकता।
लेकिन जिन पार्टी पदाधिकारियों की देखरेख में पैसों का अवैध लेनदेन हुआ है, यदि पैसों का अवैध लेनदेन साबित हो जाता है, तो उन पर आपराधिक कार्रवाई की जा सकती है। इस मामले में ऐसे लोगों को सजा भी हो सकती है। लेकिन इसके पहले पैसों की लेनदेन के साथ-साथ इसके गलत चुनावी उपयोग में खर्च किए जाने के पूरे मामले को साबित करना होगा जो आसान नहीं होता है।