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संसद के शीतकालीन सत्र में दिखेंगे सत्ता पक्ष और विपक्ष के जहरबुझे बाण

Sat, 16 Nov 2019 10:15 PM IST
Trainee Trainee शशिधर पाठक, अमर उजाला
शशिधर पाठक, अमर उजाला Published by: Trainee Trainee Updated Sat, 16 Nov 2019 10:15 PM IST
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A tough fight between ruling party and opposition in winter session of Parliament
संसद भवन (फाइल फोटो) - फोटो : ANI

सोमवार को संसद का शीतकालीन सत्र आरंभ हो रहा है। शनिवार को स्पीकर ओम बिरला की ओर से बुलाई गई सर्वदलीय बैठक हुई है, दूसरी तरफ कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी भी विपक्षी नेताओं का मन टटोलने में लगी हैं। विपक्ष भी कमर कस रहा है और संसद के शीतकालीन सत्र में सत्ता पक्ष-विपक्ष के बीच में तीखे बाण देखने को मिल सकते हैं।

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अर्थव्यवस्था, बेरोजगारी, जांच एजेंसियों का दुरुपयोग और पी चिदंबरम

 

अर्थव्यवस्था में सुस्ती एक बड़ा मुद्दा है। कांग्रेस पार्टी  के महासचिव केसी वेणुगोपाल और पार्टी के मीडिया विभाग के प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने आर्थिक सुस्ती,  बेरोजगारी,  किसानों की समस्या को बड़ा मुद्दा बताया है। कांग्रेस पार्टी ने इसे ध्यान में रखकर 30 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में जनसभा का आयोजन भी करने जा रही है। पार्टी के राज्यसभा से सांसद का कहना है कि पहले रीयल स्टेट, फिर आटो मोबाइल और अब दूरसंचार क्षेत्र से बुरी खबर आ रही है। केंद्र सरकार द्वारा अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में उठाया गया कोई कदम कारगर साबित नहीं हो रहा है। इसके समानांतर देश की जांच एजेंसियां निष्पक्षता से मामले की जांच के बजाय केंद्र सरकार के हाथ का खिलौना बनती जा रही है। सरकार राजनीतिक बदले की भावना के साथ इनका दुरुपयोग कर रही हैं। सूत्र का कहना है कि देश के पूर्व गृह और वित्त मंत्री पी चिदंबरम भी इसका शिकार हुए हैं। संसद में यह मुद्दा उठना भी तय है।

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राम मंदिर पर अदालत के फैसले ने डाली जान, राफेल पर भी होगी तकरार

 

सत्ता पक्ष के सांसद राम मंदिर निर्माण को लेकर उच्चतम न्यायालय का निर्णय आने के बाद से उत्साहित हैं। पूर्वांचल के एक सांसद का कहना है कि राफेल लड़ाकू विमान सौदे पर सुप्रीम कोर्ट दायर पुनर्विचार याचिका खारिज हो गई है। अदालत ने मामले में किसी जांच की आवश्यकता से इनकार किया है। इसलिए संसद के शीतकालीन सत्र के पहले ही दिन सत्ता पक्ष के सांसद कांग्रेस पार्टी और उसके पूर्व अध्यक्ष से देश से माफी मांगने की मांग कर सकते हैं। इसके जवाब में कांग्रेस पार्टी ने केंद्र सरकार से राफेल लड़ाकू विमान सौदे की सीबीआई जांच कराने और संसद की संयुक्त संसदीय समिति को जांच के लिए मामला सौंपने की मांग करने का मन बनाया है। संसद के शीतकालीन सत्र में ही सरकार को राम मंदिर निर्माण के लिए कानून लाने और संसद की मंजूरी लेने की आवश्यकता पड़ेगी। समझा जा रहा है कि इस दौरान भी सत्ता पक्ष और विपक्ष में तकरार के पूरे आसार हैं।

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समान नागरिक संहिता

 

देश में आम चुनाव के बाद संसद के सत्र में कई अहम कानून पारित हुए थे। तीन तलाक, जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाया जाना, राज्य को विभाजित करके केंद्रशासित प्रदेश में तब्दील करना आदि। इस बार भी केंद्र सरकार की योजना कुछ अहम बिलों को सदन में लेकर आने की है। इस क्रम में समान नागरिक संहिता (कॉमन सिविल कोड) विधेयक भी चर्चा में है। बताते हैं सरकार इस विधेयक को सदन में पेश करने के लिए इसके मसौदे पर काम कर रही है। समझा जा रहा है कि इस बिल के संसद में पेश होने के बाद लोकसभा और राज्यसभा दोनों में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तकरार बढ़ सकती है।

 

महाराष्ट्र में सरकार बनाने के प्रयास से आएगी गर्मी

 

भाजपा के महाराष्ट्र के नेता चंद्रकांत सिंदे अब भी वहां भाजपा की सरकार बनने का दावा कर रहे हैं। शिवसेना एनडीए से अलग होकर विपक्ष के खेमे में शामिल हो गई है, लेकिन राज्य में अभी राष्ट्रपति शासन है। शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस के नेता राज्य में सरकार बनाने की कोशिशों में जुटे हैं। ऐसे में महाराष्ट्र में राज्यपाल के पास सरकार बनाने का दावा पेश करने से लेकर नए मुख्यमंत्री के शपथ लेने तक का असर संसद के शीतकालीन सत्र के वातावरण पर भी पड़ने के आसार हैं।

 

कश्मीर पर सत्ता पक्ष जोह रहा बाट तो संभलकर चल रहा है विपक्ष

 

विपक्ष कश्मीर में हालात को लेकर बेचैन है। केंद्र सरकार से सवाल करना चाहता है, लेकिन संभलकर चलने के मूड में है। वहीं सत्ता पक्ष कश्मीर का मुद्दा उठने की बाट जोह रहा है। राज्य में अनुच्छेद 370 को हटाए 100 दिन से अधिक हो गए, लेकिन वहां अभी भी आम नागरिकों को पाबंदियों का सामना करना पड़ रहा है। जम्मू-कश्मीर के तमाम बड़े राजनेता नजरबंद हैं। राज्य में स्कूल खुल गए हैं, रेलवे स्टेशन, बाजार आदि खुले हैं, लेकिन स्कूलों में अब भी बच्चों की संख्या काफी कम है। हालांकि शुक्रवार को केंद्र सरकार की संसदीय मामलों की समिति ने नेताओं की रिहाई के संकेत दिए हैं। राज्य में आम जन जीवन को ध्यान में रखकर सहूलियतें बढ़ाने तथा लगातार ढील देने की योजना के बारे में जानकारी दी है, लेकिन इसको लेकर विपक्ष केंद्र सरकार को घेरने का अवसर ढूंढ़ रहा है। यहां विपक्ष थोड़ा बेबस है। वह अपने ऊपर पाकिस्तान की भाषा बोलने का सत्ता पक्ष का ताना नहीं लेना चाहता।

 

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