अभयरैब: रेबीज रोधी टीके का बैच गुणवत्ता जांच में फेल, कंपनी बोली- हमने नहीं बनाए; संदिग्ध शीशियां कहां बनीं?
रेबीज से बचाव के लिए इस्तेमाल होने वाली वैक्सीन- अभयरैब के एक बैच को गुणवत्ता जांच में विफल पाया गया है। कंपनी ने जब्त दवाओं के उत्पादन से इनकार किया है। ऐसे में करीब साढ़े चार महीने पहले दिल्ली में जब्त टीके की संदिग्ध शीशियों के मामले की जांच जारी है।
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रेबीज रोधी टीके अभयरैब के एक बैच को गुणवत्ता जांच में विफल पाया गया है। इसके बाद हिमाचल प्रदेश के कसौली स्थित केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला (सीडीएल) ने इस बैच को नकली घोषित कर दिया है। इस खुलासे के बाद मामले की जांच शुरू कर दी गई है। उधर, टीके के मूल निर्माता ने इस बैच के उत्पादन से इनकार किया है।
130+ दिन से पहले जब्त की गई थी संदिग्ध वैक्सीन
केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) के अनुसार, करीब साढ़े चार महीने पहले हुई एक कार्रवाई के दौरान बैच संख्या केई25012 की ये संदिग्ध खुराकें 22 अप्रैल को दिल्ली पुलिस और ड्रग्स कंट्रोल विभाग ने एक गैर-लाइसेंसी आवासीय परिसर से जब्त की थीं।
दिल्ली में मिली नकली रेबीज वैक्सीन, अब देशभर में जांच क्यों?
- रेबीज रोधी अभयरैब वैक्सीन का फर्जी और नकली बैच पकड़े जाने के बाद भारत के औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) और जांच एजेंसियों ने देशभर में नकली दवाओं के अवैध निर्माण और वितरण के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी गई है।
- भारत के औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) की ओर से शनिवार को जारी किए गए नोटिस के मुताबिक, 22 अप्रैल को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच और ड्रग्स विभाग ने मुखर्जी नगर स्थित एक बिना लाइसेंस वाले परिसर में छापेमारी की।
- हिमाचल प्रदेश के कसौली स्थित केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला (सीडीएल) में इसके नमूनों की जांच कराई गई, जहां यह वैक्सीन मिसब्रांडेड और नकली पाई गई।
- टीका बनाने वाली मूल निर्माता कंपनी इंडियन इम्यूनोलॉजिकल्स लिमिटेड ने कहा कि उसने यह बैच नहीं बनाई थी।
वैक्सीन की संदिग्ध शीशियां कहां बनीं?
जांच में पाया गया कि इन शीशियों की पैकेजिंग, लेबलिंग, क्यूआर-कोड, ढक्कन का रंग और लाइसेंस विवरण असली नमूनों से काफी अलग हैं। मामले में दिल्ली पुलिस अब तक चार लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि ये संदिग्ध शीशियां कहां बनीं और क्या मरीजों को भी यह टीका लगाया गया है।
राज्यों को डीसीजीआई ने क्या निर्देश दिए?
डीसीजीआई ने 27 अगस्त को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के औषधि नियंत्रकों को निर्देश जारी कर इस बैच की आपूर्ति और बिक्री पर कड़ी नजर रखने और कानूनी कार्रवाई करने को कहा है। यह भी स्पष्ट किया है कि अस्पतालों और वैध मेडिकल स्टोर्स पर मिलने वाली दवाएं पूरी जांच के बाद ही पहुंचती हैं, इसलिए मरीज केवल प्रमाणित माध्यमों से ही टीके लगवाएं।