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सर्वे में दावा: मानसिक स्वास्थ्य के प्रति मजबूत हुई है भारतीयों की अवधारणा, 2018 के मुकाबले उल्लेखनीय प्रगति

Wed, 08 Dec 2021 09:54 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Wed, 08 Dec 2021 09:54 PM IST
सार

मानसिक स्वास्थ्य और इससे जुड़ी समस्याओं को लेकर भारतीयों की सोच में खासा सुधार आया है। एक सर्वे के अनुसार अधिकतर लोग अब मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के इलाज के लिए आगे आने से हिचक नहीं रहे हैं।

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A Survey by LLL foundation says perception of Indians on mental health increased significantly after 2018 all you need to know in Hindi
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पिक्साबे

विस्तार

भारतीयों में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर धारणा में बीते कुछ वर्षों में उल्लेखनीय इजाफा हुआ है। यह दावा एक नए सर्वे में किया गया है। इसके अनुसार इसमें हिस्सा लेने वाले 92 फीसदी लोगों ने मानसिक स्वास्थ्य को लेकर इलाज पर सहमति जताई है। साल 2018 में यह आंकड़ा केवल 54 फीसदी था। यह सर्वे लिवलवलाफ (एलएलएल) फाउंडेशन की ओर से किया गया है। यह एक चैरिटेबल ट्रस्ट है जिसकी स्थापना प्रसिद्ध बॉलीवुड अभिनेत्री दीपिका पादुकोण ने की थी।

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इस अध्ययन का मुख्य उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता, दृष्टिकोण और प्रथाओं के संबंध में साल 2018 में किए गए सर्वे के मुकाबले स्थिति में आए बदलाव को समझना था। इसके लिए एलएलएल नौ शहरों में 3497 प्रतिभागियों का सर्वे करने का काम सत्व कन्सल्टिंग को दिया था। पांच अगस्त से नौ सितंबर के बीच किया गया यह सर्वे जिन नौ शहरों में हुआ उनमें बेंगलुरु, दिल्ली, गुवाहाटी, हैदराबाद, कानपुर, कोलकाता, मुंबई, पटना और पुणे में करवाया गया था।
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मानसिक बीमारियों को लेकर अब जागरूक हुए हैं लोग
इस अध्ययन की रिपोर्ट के अनुसार, 92 फीसदी लोगों ने कहा है कि वह मानसिक बीमारी का इलाज करवाने और इसके लिए किसी व्यक्ति का सहयोग लेना पसंद करेंगे। साल 2018 में किए गए सर्वे में ऐसी अवधारणा रखने वाले लोगों की संख्या केवल 54 फीसदी थी। एलएलएल की सीईओ अनीशा पादुकोण ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता अधिक स्वीकार्यता और बातचीत के लिए बहुत आवश्यक है। हम इस परिवर्तन को देखकर बहुत उत्साहित हैं।
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96 फीसदी लोगों को एक मानसिक बीमारी की जानकारी
सर्वे के अनुसार 96 फीसदी लोगों ने कहा कि उन्हें कम से कम एक मानसिक बीमारी के बारे में जानकारी है। ऐसे लोगों में से 77 फीसदी को अवसाद के बारे में पता था और 65 फीसदी ने तनाव को मानसिक बीमारी का एक प्रमुख कारण माना। हालांकि, ऐसे लोगों की संख्या काफी कम रही जिन्हें पर्सनालिटी डिसऑर्डर, ऑब्सेससिव कम्पल्सिव डिसऑर्डर (ओसीडी), स्किजोफ्रेनिया, ईटिंग डिसऑर्डर और चाइल्ड डिसऑर्डर जैसा मानसिक बीमारियों के बारे में पता है। 

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